छांगुर बाबा सहित 8 आरोपियों पर धर्मांतरण केस में आरोप तय

विदेशी फंडिंग के जरिए कथित रूप से धन का दुरुपयोग कर हिंदुओं और गैर मुस्लिमों का जबरन या प्रलोभन देकर धर्मांतरण कराने के गंभीर मामले में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा सहित आठ आरोपियों पर अदालत ने आरोप तय कर दिए हैं। एनआईए की विशेष अदालत की न्यायाधीश नीतू पाठक ने मामले में अगली सुनवाई और गवाही के लिए 2 मई की तारीख निर्धारित की है।
जेल से लाकर कोर्ट में पेश किए गए आरोपी
इस मामले में जलालुद्दीन उर्फ छांगुर बाबा, नीतू रोहरा उर्फ नसरीन, सबरोज, शहाबुद्दीन, रशीद, राजेश कुमार उपाध्याय, नवीन रोहरा उर्फ जमालुद्दीन और महबूब को जेल से लाकर अदालत में पेश किया गया। सुनवाई के दौरान सभी आरोपियों पर लगाए गए आरोपों को कोर्ट ने रिकॉर्ड में लिया।
संगठित गिरोह बनाकर धर्मांतरण कराने का आरोप
अदालत ने अपने आदेश में कहा कि 16 नवंबर 2015 के बाद से यह गिरोह विभिन्न स्थानों पर संगठित तरीके से काम कर रहा था। आरोप है कि यह लोग डर, प्रलोभन और अन्य तरीकों से गैर मुस्लिमों का अवैध धर्मांतरण कराने में शामिल थे।
गंभीर आपराधिक साजिश के आरोप
कोर्ट के अनुसार आरोप है कि इस समूह का उद्देश्य धार्मिक जनसंख्या में बदलाव कर देश की एकता, अखंडता और सामाजिक ढांचे को प्रभावित करना था। साथ ही आरोप लगाया गया कि यह गतिविधियां एक बड़े आपराधिक षड्यंत्र का हिस्सा थीं।
अदालत ने यह भी कहा कि आरोपियों पर दो समुदायों के बीच वैमनस्य फैलाने, धोखाधड़ी, सामूहिक अपराध, छेड़छाड़ और अन्य गंभीर धाराओं में आरोप तय किए गए हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म परिवर्तन कानून और एससी-एसटी एक्ट भी शामिल है।
आरोपों से किया इनकार, ट्रायल शुरू
सभी आरोपियों ने अदालत में अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार करते हुए मुकदमे का सामना करने की बात कही। इसके बाद अदालत ने अभियोजन पक्ष को गवाह पेश करने का निर्देश दिया।
ATS की जांच में सामने आए थे बड़े खुलासे
इससे पहले एटीएस ने 16 नवंबर 2024 को गोमतीनगर थाने में इस मामले में एफआईआर दर्ज कराई थी। जांच में आरोप लगाया गया था कि विदेशी फंडिंग के सहारे अवैध धर्मांतरण का नेटवर्क चलाया जा रहा था और इसके लिए एक संगठित ढांचा तैयार किया गया था। रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया था कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों ने बड़ी संपत्तियां अर्जित की थीं और अवैध निर्माण कार्य किए गए थे।
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