रक्षाबंधन पर मुफ्त बस यात्रा शुरू होते ही बढ़ी भीड़, बाराबंकी में घंटों इंतजार

HIGHLIGHTS
- बाराबंकी डिपो की 114 बसें 29 रूटों पर चल रही हैं
- स्टेशन की कुर्सियां यात्रियों से पूरी तरह भर गईं
- बड़ी संख्या में यात्री धूप में खड़े होकर बसों का इंतजार करते रहे
रक्षाबंधन के मौके पर प्रदेश सरकार की ओर से महिलाओं के लिए करीब 64 घंटे तक रोडवेज बसों में मुफ्त यात्रा की सुविधा शुरू होते ही यात्रियों की भीड़ बढ़ गई। पर्व से एक दिन पहले गुरुवार को बाराबंकी बस स्टेशन पर सामान्य दिनों की तुलना में करीब चार गुना अधिक भीड़ नजर आई। बसों की कमी के चलते यात्रियों को तीन से चार घंटे तक इंतजार करना पड़ा।
बाराबंकी डिपो की 114 बसें 29 अलग-अलग रूटों पर चल रही हैं, लेकिन सुबह से ही बाहरी यात्रियों की भारी भीड़ पहुंचने के कारण बसों की कमी हो गई। बस स्टेशन के अंदर यात्रियों के बैठने के लिए लगी कुर्सियां पूरी तरह भर गईं। वहीं, बड़ी संख्या में लोग बाहर धूप में खड़े होकर बसों का इंतजार करते रहे।
सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को हुई। बस पहुंचते ही यात्री सीट पाने के लिए दौड़ पड़ते। कई बार यात्रियों के उतरने से पहले ही बस में चढ़ने की होड़ लग जाती और धक्का-मुक्की की स्थिति बन जाती।
भीड़ और अव्यवस्था को देखते हुए एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बस स्टेशन पर तीन पुलिस टीमें तैनात कर दी हैं। पुलिसकर्मी बस स्टेशन के अंदर से बाहर तक यात्रियों को व्यवस्थित तरीके से बसों में बैठाने में जुटे हैं। हालांकि, भारी भीड़ के कारण व्यवस्था पूरी तरह सामान्य नहीं हो सकी और यात्रियों की परेशानी बनी रही।
"दो बसें भरकर निकल गईं, लेकिन जगह नहीं मिली"
सीतापुर निवासी पूजा वर्मा ने कहा, “सुबह से बस का इंतजार कर रहे हैं। दो बसें भरकर निकल गईं, लेकिन जगह नहीं मिली। भाई को राखी बांधने घर जाना है, इसलिए इंतजार कर रहे हैं।”
फतेहपुर निवासी रामकुमार ने बताया, “करीब तीन घंटे से यहां बैठे हैं। बस आते ही इतनी भीड़ टूट पड़ती है कि बच्चों और बुजुर्गों के साथ चढ़ना मुश्किल हो जाता है।”
लखनऊ जाने वाली यात्री शबनम ने कहा, “महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा अच्छी सुविधा है, लेकिन बसें कम पड़ रही हैं। धूप में बच्चों के साथ इंतजार करना बहुत परेशानी भरा है।”
एक बुजुर्ग यात्री शिवकुमार ने कहा, “रक्षाबंधन पर हर कोई घर पहुंचना चाहता है। बसों की संख्या बढ़ा दी जाती तो यात्रियों को घंटों परेशान नहीं होना पड़ता।”
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