ओमान के पास कच्चे तेल के टैंकर पर अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से हमला, 5 भारतीय नाविक सुरक्षित

HIGHLIGHTS
- UKMTO को शुक्रवार देर रात टैंकर पर हमले की सूचना मिली।
- घटना ओमान के पूर्व में करीब चार समुद्री मील दूर हुई।
- टैंकर के कप्तान ने जहाज के बाईं ओर प्रक्षेपास्त्र लगने की जानकारी दी।
पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है। ताजा घटनाक्रम में यूनाइटेड किंगडम समुद्री व्यापार संचालन (UKMTO) ने शुक्रवार को स्थानीय समय के अनुसार बताया कि ओमान के पूर्व में करीब चार समुद्री मील की दूरी पर एक कच्चे तेल के टैंकर पर अज्ञात प्रक्षेपास्त्र से हमला हुआ। UKMTO ने एक्स पर जारी रिपोर्ट में बताया कि सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित हैं और पर्यावरण पर किसी तरह के प्रभाव की सूचना नहीं मिली है। अधिकारियों ने घटना की जांच शुरू कर दी है। जहाजों को सावधानी के साथ यात्रा करने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की जानकारी UKMTO को देने की सलाह दी गई है।
ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने बताया कि होर्मुज जलडमरूमध्य में कुवैत के झंडे वाले एक अन्य टैंकर पर भी प्रक्षेपास्त्र से हमला हुआ था। इस घटना के बाद पांच भारतीय नागरिकों को सुरक्षित किनारे पहुंचाया गया। दूतावास ने एक्स पर जानकारी दी कि उसने MT Kazimah III टैंकर पर सवार पांच भारतीय नागरिकों के बचाव अभियान का समन्वय किया। दूतावास ने बचाव अभियान के दौरान ओमान के अधिकारियों की लगातार मदद के लिए उनका आभार जताया।
समुद्री जहाज ट्रैकर के अनुसार, MT Kazimah III कुवैत के झंडे वाला कच्चे तेल का टैंकर है और यह टोगो के लोमे बंदरगाह की ओर जा रहा था। भारत फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर मौजूद भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कुशलता पर लगातार नजर रख रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि क्षेत्र में अलग-अलग वाणिज्यिक जहाजों पर 4,500 से अधिक भारतीय नाविक सवार हैं। इनमें 12 सक्रिय मालवाहक जहाजों पर 163 भारतीय नाविक शामिल हैं।
टैंकरों पर हमले और बचाव अभियान कैसे हुआ?
UKMTO को शुक्रवार देर रात ओमान के पूर्व में करीब चार समुद्री मील दूर एक कच्चे तेल के टैंकर पर हमले की सूचना मिली। टैंकर के कप्तान ने बताया कि जहाज के बाईं ओर एक अज्ञात प्रक्षेपास्त्र लगा। घटना के बाद सभी चालक दल के सदस्य सुरक्षित रहे और पर्यावरण पर किसी तरह के प्रभाव की सूचना नहीं मिली। अधिकारियों ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
वहीं, होर्मुज जलडमरूमध्य में MT Kazimah III पर हुए हमले के बाद ओमान स्थित भारतीय दूतावास ने पांच भारतीय नाविकों को सुरक्षित किनारे पहुंचाने में मदद की। दूतावास ने इस दौरान सहयोग और सहायता के लिए ओमान के अधिकारियों का धन्यवाद किया।
भारतीय नाविकों की सुरक्षा के लिए भारत क्या कर रहा है?
भारत फारस की खाड़ी में वाणिज्यिक जहाजों पर मौजूद भारतीय नाविकों की सुरक्षा और कुशलता पर लगातार नजर रख रहा है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल के अनुसार, इस क्षेत्र में भारत के झंडे वाले छह वाणिज्यिक जहाज हैं। इसके अलावा छह विदेशी झंडे वाले जहाज भी हैं, जो भारत के लिए माल लेकर जा रहे हैं। इन 12 जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं।
क्षेत्र में संचालित विभिन्न वाणिज्यिक जहाजों पर 4,500 से अधिक भारतीय नाविक मौजूद हैं। जहाजरानी मंत्रालय, भारतीय राजनयिक मिशनों और स्थानीय हितधारकों के समन्वय से जहाजों की आवाजाही और नाविकों की कुशलता पर नजर रखी जा रही है। जायसवाल ने कहा कि भारत विदेशों में अपने समुद्री समुदाय की सुरक्षा और कुशलता के लिए प्रतिबद्ध है।
समुद्री गलियारों में बढ़ते जोखिम पर वैश्विक प्रतिक्रिया क्या है?
ये घटनाक्रम फारस की खाड़ी, लाल सागर और काला सागर समेत प्रमुख समुद्री गलियारों में बढ़े सुरक्षा जोखिमों के बीच हुए हैं। इन इलाकों में वाणिज्यिक शिपिंग को बार-बार हमलों का सामना करना पड़ा है।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पिछले सप्ताह 81वें संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान वाणिज्यिक जहाजों और नाविकों पर हुए हमलों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा था कि समुद्री क्षेत्र में नई चुनौतियां जमीन पर लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों में जुड़ गई हैं।
जयशंकर ने कहा कि भारतीय नाविकों और अन्य देशों के नाविकों की जान गई है, जो पूरी तरह अस्वीकार्य है। भारत ने लाइबेरिया और 23 भागीदार देशों के साथ एक अंतरराष्ट्रीय गठबंधन में शामिल होकर वैश्विक जनमत जुटाने और वाणिज्यिक शिपिंग मार्गों की रक्षा करने का प्रयास किया है।
जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में तत्काल संयम और तनाव कम करने का भी आह्वान किया। उन्होंने इसे नागरिक चालक दल की सुरक्षा, निर्बाध ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक व्यापार सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक बताया।
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