दिल्ली में 7.36 करोड़ की साइबर ठगी का खुलासा, CSB बैंक के दो मैनेजर समेत 6 गिरफ्तार

HIGHLIGHTS
- पुलिस जांच में साइबर ठगी से जुड़े 37 म्यूल बैंक खातों का पता चला।
- आरोपियों के पास से 63 आधार कार्ड और 60 पैन कार्ड बरामद किए गए।
- दिहाड़ी मजदूरों को ऋण दिलाने का झांसा देकर उनके दस्तावेज हासिल किए जाते थे।
दिल्ली पुलिस ने 7.36 करोड़ रुपये की साइबर ठगी से जुड़े एक नेटवर्क का पर्दाफाश करते हुए कैथोलिक सीरियन बैंक (सीएसबी) के दो शाखा प्रबंधकों समेत छह लोगों को गिरफ्तार किया है। जांच के दौरान 37 म्यूल खातों का पता चला, जिनका इस्तेमाल देशभर में दर्ज साइबर अपराध की 99 शिकायतों से जुड़ी रकम जमा करने के लिए किया गया था।
पुलिस ने आरोपियों के पास से 63 आधार कार्ड, 60 पैन कार्ड, 55 पासपोर्ट आकार के फोटो, 11 म्यूल सिम कार्ड, सात मोबाइल फोन और सात चेकबुक बरामद की हैं। इसके अलावा 60 हजार रुपये नकद, करीब 150 ग्राम सोना और एक लैपटॉप भी जब्त किया गया है।
जांच में पता चला कि इन बैंक खातों में कुल 7.36 करोड़ रुपये जमा हुए थे। आरोपी मयंक कपूर ने साइबर ठगी से प्राप्त रकम को यूएसडीटी (टेथर) में हासिल करने और ट्रांसफर करने के लिए ट्रस्ट वॉलेट का इस्तेमाल किया।
मामले की जांच सीएसबी बैंक की त्रिनगर शाखा में संदिग्ध म्यूल खातों की पहचान होने के बाद शुरू हुई। इनमें एक खाता राहुल नाम के व्यक्ति का था, जिसने बैंक शाखा का दौरा नहीं किया था।
इस मामले में 17 जून, 2026 को भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई। उत्तर-पश्चिम जिला साइबर थाने के एसएचओ निरीक्षक दिनेश दहिया के नेतृत्व में विशेष टीम बनाई गई। टीम में एसआई नवीन, हेड कांस्टेबल गौरव, हेड कांस्टेबल दीपक, हेड कांस्टेबल सचिन और कांस्टेबल अनुज शामिल थे। जांच एसीपी/साइबर सृष्टि भट्ट की निगरानी और पुलिस उपायुक्त के समग्र पर्यवेक्षण में की गई।
मुख्य आरोपी मयंक कपूर गिरफ्तार
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर पुलिस ने म्यूल खातों का संचालन करने वाले मयंक कपूर उर्फ रिंकू की पहचान की। उसे बाबा हरिदास नगर से गिरफ्तार किया गया। उसके ठिकाने से ठगी से जुड़े कई सामान बरामद किए गए।
पुलिस ने सात मोबाइल फोन, एक लैपटॉप, म्यूल खातों से संबंधित सात चेकबुक, 60 हजार रुपये नकद और करीब 150 ग्राम सोना जब्त किया। इसके अलावा अलग-अलग लोगों के 55 पासपोर्ट आकार के फोटो, 11 सिम कार्ड, 63 आधार कार्ड, 60 पैन कार्ड और सात डेबिट कार्ड भी बरामद किए गए।
मजदूरों को ऋण दिलाने का झांसा देकर जुटाए दस्तावेज
पूछताछ में मयंक कपूर ने बताया कि वह दिहाड़ी मजदूरों को निशाना बनाता था। वह मोबाइल फोन के जरिए उनसे संपर्क कर ऋण मंजूर कराने का झांसा देता था। इस बहाने वह मजदूरों के केवाईसी दस्तावेज और तस्वीरें व्हाट्सएप के माध्यम से हासिल कर लेता था।
इन दस्तावेजों का इस्तेमाल म्यूल सिम कार्ड और बैंक खाते खुलवाने के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार, अलग-अलग लोगों के नाम पर बैंक खाते खुलवाए जाते थे और उनका इस्तेमाल साइबर अपराध से हासिल रकम जमा करने के लिए किया जाता था। बाद में इस रकम को यूएसडीटी क्रिप्टोकरेंसी में बदला जाता था।
बैंक अधिकारियों की मिलीभगत का आरोप
जांच में सामने आया कि मयंक कपूर की मुलाकात सीएसबी बैंक के शाखा प्रबंधक शोभित अग्रवाल से हुई थी। शोभित अग्रवाल सरस्वती विहार शाखा के प्रबंधक थे। पुलिस के अनुसार, धोखे से हासिल किए गए केवाईसी दस्तावेजों के आधार पर बैंक अधिकारियों की मदद से खाताधारकों की वास्तविक मौजूदगी के बिना म्यूल खाते खोले गए। इन खातों में फर्जी हस्ताक्षर भी किए गए थे।
पुलिस के मुताबिक, ठगी से प्राप्त रकम का एक हिस्सा बैंककर्मी शोभित अग्रवाल को दिया जाता था। शोभित अग्रवाल ने मयंक कपूर की मुलाकात त्रिनगर शाखा के प्रबंधक सुशांत कुमार से कराई थी। इसी तरीके से सरस्वती विहार शाखा में करीब 17 और त्रिनगर शाखा में करीब 20 म्यूल खाते खोले गए।
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