मुजफ्फरनगर में 75 करोड़ के विकास कार्यों को मंजूरी, वहलना चौक अब कहलाएगा महाराणा प्रताप चौक

HIGHLIGHTS
- मुजफ्फरनगर नगर पालिका की बोर्ड बैठक में 111 प्रस्ताव सर्वसम्मति से पास हुए।
- करीब 75 करोड़ रुपये के विकास कार्यों को मंजूरी दी गई।
- वहलना चौक का नाम बदलकर महाराणा प्रताप चौक किया जाएगा।
मुजफ्फरनगर शहर के विकास कार्यों को आगे बढ़ाने के लिए नगर पालिका परिषद की बोर्ड बैठक में करीब 75 करोड़ रुपये की लागत वाले 111 प्रस्तावों को सर्वसम्मति से मंजूरी दे दी गई। शुक्रवार को पालिका सभागार में अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में सड़क निर्माण, सड़कों की मरम्मत, प्रकाश व्यवस्था और सफाई सहित कई विकास कार्यों पर सहमति बनी। इसके अलावा वहलना चौक का नाम बदलकर महाराणा प्रताप चौक करने और वाल्मीकि चौक के नामकरण से संबंधित प्रस्ताव भी स्वीकृत किए गए।
बैठक के दौरान शहर के विभिन्न वार्डों में होने वाले निर्माण और विकास कार्यों को लेकर विस्तार से चर्चा की गई। कुछ प्रस्तावों पर सभासदों के बीच बहस भी देखने को मिली। इस दौरान नगर पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप और अधिशासी अधिकारी पवन कुमार ने हस्तक्षेप करते हुए सभासदों को शांत कराया। इसके बाद बैठक की कार्यवाही आगे बढ़ाई गई।
पालिका अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप ने बताया कि बोर्ड बैठक में लगभग 75 करोड़ रुपये के 111 विकास प्रस्ताव रखे गए थे। सभी बोर्ड सदस्यों ने इन प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित कर दिया है। इन कार्यों के पूरा होने से शहर के अलग-अलग वार्डों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
वहलना चौक का नाम बदलकर होगा महाराणा प्रताप चौक
बोर्ड बैठक में वहलना चौक का नाम बदलकर महाराणा प्रताप चौक रखने के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई। इसके साथ ही वाल्मीकि चौक के नामकरण से संबंधित प्रस्ताव भी पास किया गया। इस फैसले पर पालिका अध्यक्ष ने वाल्मीकि समाज के लोगों को बधाई दी। बैठक के दौरान वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधियों ने अध्यक्ष मीनाक्षी स्वरूप का सम्मान भी किया।
सड़क, प्रकाश व्यवस्था और सफाई के कार्यों को मिलेगी प्राथमिकता
अधिशासी अधिकारी पवन कुमार ने बताया कि बोर्ड बैठक में मंजूर किए गए विकास प्रस्तावों में सड़क निर्माण, मार्गों के विकास, स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था से जुड़े कार्य प्रमुख रूप से शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि बैठक में कुछ मुद्दों पर सभासदों ने अपनी राय रखी और चर्चा भी हुई, लेकिन कोई बड़ा विवाद नहीं हुआ। सभी 111 प्रस्तावों को आपसी सहमति से सर्वसम्मति के साथ पारित कर दिया गया।
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