दिल्ली में हर प्रॉपर्टी को मिलेगा डिजिटल रिकॉर्ड, कैबिनेट में जल्द पेश होगा बिल

HIGHLIGHTS
- दिल्ली सरकार जल्द लाएगी नया लैंड रिकॉर्ड बिल।
- हर जमीन का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा।
- 30 गांवों में स्वामित्व कार्ड देने की योजना।
दिल्ली सरकार जल्द ही नया लैंड रिकॉर्ड बिल लाने की तैयारी कर रही है। इस बिल का उद्देश्य राजधानी में भूमि के स्वामित्व और प्रबंधन व्यवस्था को बेहतर और व्यवस्थित बनाना है। इसके तहत दिल्ली की प्रत्येक जमीन का एक विस्तृत डिजिटल रिकॉर्ड तैयार कर सरकार के पास उपलब्ध कराया जाएगा। माना जा रहा है कि इससे भूमि विवादों को कम करने और व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
सभी एजेंसियों से जुटाया जाएगा भूमि का डेटा
लैंड रिकॉर्ड बिल के तहत दिल्ली सरकार सभी संबंधित एजेंसियों से जमीन से जुड़ा डेटा एकत्र करेगी। इसमें विभिन्न सरकारी विभागों और स्थानीय निकायों के रिकॉर्ड को शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही भूमि के सर्वे और मैपिंग का काम भी जल्द शुरू किया जाएगा। इस प्रक्रिया में ड्रोन और भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा सकता है।
सीएम रेखा बोलीं- जल्द कैबिनेट में पेश होगा बिल
मुख्यमंत्री ने बताया कि इस अहम फैसले को जल्द ही कैबिनेट के सामने रखा जाएगा। इसके लिए विशेष विधानसभा सत्र बुलाकर बिल को पारित कराने की योजना है। इस दौरान तीन सांसद कमलजीत सेहरावत, रामवीर सिंह बिधूड़ी, योगेंद्र चंदोलिया और चार विधायक करतार सिंह, नीलम पहलवान, गजेंद्र द्राल, संदीप सेहरावत मौजूद रहे।
दिल्ली सरकार 30 गांवों के निवासियों को स्वामित्व कार्ड देने की योजना पर भी काम कर रही है। इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू किया जा सकता है। इसके तहत गांव या शहर में रहने वाले हर व्यक्ति के पास अपना प्रॉपर्टी कार्ड होगा। यह कार्ड जमीन के मालिकाना हक का वैध प्रमाण माना जाएगा।
सर्वे और मैपिंग के लिए तैयार की गई योजना
सरकार ने भूमि सर्वे और मैपिंग के लिए एक विस्तृत योजना तैयार की है। इसमें आधुनिक तकनीक का उपयोग किया जाएगा। ड्रोन आधारित सर्वे के जरिए जमीन की सटीक सीमाएं तय की जाएंगी, जबकि जीआईएस मैपिंग के माध्यम से सभी भूमि पार्सल का डिजिटल नक्शा तैयार किया जाएगा।
इस प्रक्रिया से जमीन के हर हिस्से की पहचान सुनिश्चित होगी। साथ ही विभिन्न सरकारी विभागों के मौजूदा रिकॉर्ड को भी एकीकृत किया जाएगा। इससे भूमि से जुड़ी जानकारी अधिक सटीक होगी और रिकॉर्ड व्यवस्था को ज्यादा भरोसेमंद बनाया जा सकेगा।
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