महाराजगंज जेल से बाहर आए पूर्व सपा विधायक इरफान सोलंकी

कानपुर। गैंगस्टर एक्ट के मुकदमे में जमानत मिलने के बाद पूर्व सपा विधायक इरफान सोलंकी आखिरकार 33 माह बाद महाराजगंज जेल से रिहा हो गए। हालांकि जेल से बाहर आने के बावजूद उनके खिलाफ चल रहे कई अन्य मुकदमे अभी भी लंबित हैं। आगजनी मामले में सजा के खिलाफ हाईकोर्ट में अपील लंबित है, जबकि सेशन कोर्ट और लोअर कोर्ट में गैंगस्टर एक्ट, फर्जी आधार कार्ड से हवाई यात्रा, रंगदारी वसूली समेत कई मामलों की सुनवाई चल रही है।
इरफान और उनके भाई रिजवान पर 7 नवंबर 2022 को जाजमऊ डिफेंस कॉलोनी निवासी नजीर फातिमा के घर में आगजनी का आरोप था। इसके बाद दोनों ने 2 दिसंबर 2022 को पुलिस कमिश्नर के बंगले पर समर्पण किया और जेल भेज दिए गए। सुरक्षा कारणों से इरफान को 21 दिसंबर को महाराजगंज जेल भेजा गया था, जबकि अन्य आरोपी कानपुर जेल में बंद रहे।
जमानत से अटकी थी रिहाई
एमपीएमएलए सेशन कोर्ट ने नजीर फातिमा के प्लाट पर आगजनी मामले में 7 जून 2024 को इरफान, रिजवान और अन्य आरोपियों को सात-सात साल कैद की सजा सुनाई थी। इसके खिलाफ हाईकोर्ट में अपील की गई, जो स्वीकार होने पर 14 नवंबर 2024 को इरफान को जमानत मिल गई। गैंगस्टर एक्ट सहित अन्य मामलों में पहले ही उन्हें जमानत मिल चुकी थी, केवल गैंगस्टर के मामले में जमानत न मिलने से रिहाई अटकी थी।
विधायकी चली गई, पत्नी जीती उपचुनाव
सात साल की सजा के कारण इरफान की विधायकी समाप्त हो गई। इसके बाद सीसामऊ विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में सपा ने इरफान की पत्नी नसीम सोलंकी को मैदान में उतारा। भावनाओं को वोट में बदलते हुए नसीम ने चुनाव जीतकर परिवार की राजनीतिक पकड़ बरकरार रखी।
इरफान पर दर्ज मुकदमे और सुनवाई
इरफान के खिलाफ विभिन्न थानों में कुल 18 मुकदमे दर्ज हैं, जिनमें से कुछ में वे बरी भी हो चुके हैं। 2022 में दर्ज किए गए दस मुकदमों में आठ आगजनी की घटना के एक महीने के भीतर दर्ज हुए थे। अन्य मामलों में गैंगस्टर एक्ट, फर्जी आधार कार्ड से हवाई यात्रा, फर्जी निवास प्रमाण पत्र और रंगदारी वसूली शामिल हैं।
गैंगस्टर एक्ट के मामले में एमपीएमएलए सेशन कोर्ट में अगली सुनवाई 14 अक्टूबर को होगी। इस मुकदमे में इरफान, रिजवान, मो. शरीफ, शौकत अली, इसराइल आटेवाला, अज्जन उर्फ एजाज और मुर्सलीन खां उर्फ भोलू पर लोगों को धमकाकर वसूली करने और अवैध संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं। मंगलवार को पहले गवाह की पेशी होनी थी, लेकिन गवाह न आने के कारण सुनवाई स्थगित हो गई।
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