गोली लगने के बाद भी मिशन में डटा रहा टाइसन, आतंकियों की लोकेशन खोजने वाले आर्मी डॉग को मिला सम्मान

HIGHLIGHTS
- आर्मी डॉग टाइसन को असाधारण साहस और वीरता के लिए स्वतंत्रता दिवस पर सम्मान मिला।
- किश्तवाड़ के ऑपरेशन त्राशी के दौरान टाइसन आतंकियों की लोकेशन तक पहुंचा था।
- टाइसन उस ठिकाने तक पहुंच गया था, जहां तीन आतंकी छिपे हुए थे।
- आतंकियों की गोली लगने से टाइसन गंभीर रूप से घायल हो गया था।
जम्मू। जम्मू संभाग के किश्तवाड़ के छात्रु इलाके के जंगलों में सेना के सफल अभियान में अहम भूमिका निभाने वाले आर्मी डॉग टाइसन को वीरता और असाधारण साहस के लिए स्वतंत्रता दिवस पर सम्मानित किया गया है।
किश्तवाड़ में ऑपरेशन त्राशी के दौरान सेना की 2 पैरा स्पेशल फोर्स का एलीट जर्मन शेफर्ड आर्मी डॉग टाइसन उस ढोक (छिपने के ठिकाने) तक पहुंच गया था, जहां तीन आतंकी छिपे हुए थे। इसी दौरान आतंकियों की गोली लगने से टाइसन गंभीर रूप से घायल हो गया था।
साइलेंट वारियर टाइसन की वीरता का उल्लेख
टाइसन की मदद से आतंकियों की लोकेशन का पता चला था। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सशस्त्र बलों और केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों के जवानों व अधिकारियों के लिए 78 वीरता पुरस्कारों और 89 प्रशस्ति उल्लेखों को मंजूरी दी। इन प्रशस्ति उल्लेखों में साइलेंट वारियर टाइसन की वीरता का भी उल्लेख किया गया।
जम्मू संभाग के किश्तवाड़ में इस वर्ष आतंकवादियों के खिलाफ चलाए गए ऑपरेशन त्राशी में मुठभेड़ के दौरान असाधारण वीरता के लिए सेना की 2 पैरा को दो कीर्ति चक्र मिले। पैरा कमांडो हवलदार गजेंद्र सिंह को मरणोपरांत कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया।
असाधारण वीरता दिखाने वाले 2 पैरा के मेजर जितेंद्र राठी को भी कीर्ति चक्र
वहीं, मुठभेड़ में असाधारण वीरता दिखाने वाले 2 पैरा के मेजर जितेंद्र राठी को भी कीर्ति चक्र मिला है। इन वीरों के साथ आर्मी डॉग टाइसन ने भी 2 पैरा का मान बढ़ाया है।
घने जंगल में छिपे आतंकियों की लोकेशन का पता लगाना मुश्किल था। ऐसे में टाइसन ने छिपे आतंकियों को तलाश लिया था। वह अपने हैंडलर के साथ आतंकियों तक पहुंच गया था।
हताश आतंकियों ने उस पर गोली चला दी, जिससे उनकी लोकेशन का पता चला। गोली लगने से घायल टाइसन को सेना ने हेलीकॉप्टर से एयरलिफ्ट कर उधमपुर के आर्मी अस्पताल पहुंचाया।
सेना के K-9 दस्ते के योगदान को सराहा
जम्मू-कश्मीर में भारतीय सेना के K-9 दस्ते के आर्मी डॉग आतंकियों के मंसूबों को नाकाम करने में अहम योगदान दे रहे हैं। कई बार आतंकियों द्वारा फिट की गई आईईडी को समय पर तलाश कर K-9 दस्ते ने बड़े हादसे टाले हैं। टाइसन जैसे आर्मी डॉग को बेहद कठोर ट्रेनिंग दी जाती है।
इस बार स्वतंत्रता दिवस पर टाइसन को सम्मान देकर सेना के K-9 दस्ते के योगदान को सराहा गया है। ये साइलेंट वारियर अत्यधिक जोखिम वाली परिस्थितियों में सैनिकों की जान बचाने के लिए बिना किसी डर के मौत के मुंह में भी कूद जाते हैं।
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