'विकसित भारत' से आत्मनिर्भरता तक: लाल किले से पीएम मोदी ने दिए 10 बड़े संदेश

HIGHLIGHTS
- पीएम मोदी ने युवाओं की ऊर्जा को विकास की दिशा में लगाने पर जोर दिया।
- उन्होंने समाज को गलत दिशा में ले जाने वाले तत्वों की पहचान की अपील की।
- प्रधानमंत्री ने कहा कि हथियारबंद नक्सलियों की ताकत लगभग खत्म हो चुकी है।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के मौके पर लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित किया। उन्होंने देशवासियों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि देश नए संकल्पों के साथ आगे बढ़ रहा है। पीएम मोदी ने कहा कि आज हर घर तिरंगा है और हर मन तिरंगा है। उन्होंने यह भी कहा कि आजादी के बाद 15 अगस्त को पहली बार लाल किले पर वंदे मातरम् गूंज रहा है।
2047 तक विकसित भारत बनाने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत का बड़ा सपना 2047 तक विकसित भारत बनाना है। इस लक्ष्य को पूरा करने की ताकत और संकल्प 140 करोड़ भारतीयों से मिल रहा है। उन्होंने कहा कि जब दुनिया का सबसे अधिक आबादी वाला देश खुद को विकसित राष्ट्र बनाने का लक्ष्य तय करता है तो इससे पूरी दुनिया को मजबूत संदेश जाता है। भारत के इस लक्ष्य से दुनिया की नजर में देश की छवि बदल रही है।
ऊर्जा सुरक्षा पर मजबूत कदम
लाल किले से अपने 13वें संबोधन में प्रधानमंत्री ने क्रिटिकल मिनरल्स, सेमीकंडक्टर और ऊर्जा सुरक्षा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तकनीक के लिए क्रिटिकल मिनरल्स महत्वपूर्ण हैं और भारत इस क्षेत्र में खुद को सुरक्षित करने के लिए काम कर रहा है। उन्होंने मिशन क्रिटिकल मिनरल्स और कॉरिडोर शुरू किए जाने की बात कही।
पीएम मोदी ने कहा कि एआई और डेटा सेंटर के लिए बड़ी मात्रा में बिजली की जरूरत होगी। ऐसे में ऊर्जा सुरक्षा पूरी दुनिया की जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस दिशा में भारत ने मजबूत कदम उठाए हैं और परमाणु ऊर्जा इसका एक जरूरी माध्यम है। 2047 तक 100 गीगावॉट न्यूक्लियर पावर का लक्ष्य रखा गया है।
बाढ़ और भूस्खलन प्रभावित परिवारों के साथ देश
प्रधानमंत्री ने देश के विभिन्न हिस्सों में बाढ़ और भूस्खलन से प्रभावित परिवारों के प्रति एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों में देश के कई हिस्सों में आई प्राकृतिक आपदाओं से अनेक परिवार प्रभावित हुए हैं और सरकार उनके दर्द को समझती है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष असम, केरल, उत्तराखंड और नागालैंड समेत कई राज्यों में भारी मानसूनी बारिश, अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन से जनजीवन प्रभावित हुआ है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पूरा देश प्रभावित परिवारों के साथ खड़ा है।
पांच दशक में नहीं हुए काम 5-7 साल में करने का लक्ष्य
पीएम मोदी ने कहा कि देश के सीफूड क्षेत्र में आगे बढ़ने की संभावनाएं हैं और सी बेल्ट का इस दिशा में इस्तेमाल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि 2047 का लक्ष्य मजबूत नींव पर खड़ा है और पिछले 10-12 वर्षों में देशवासियों ने अपनी क्षमता दिखाई है।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत इसी प्रयास का हिस्सा है। अब लक्ष्य को हासिल करने के लिए संस्कृति, सोच और काम की गति में बदलाव करना होगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि जो काम पिछले पांच दशक में नहीं हुए, उन्हें पूरा करने में 5-7 साल लगे हैं और उन्हें भरोसा है कि देश इस सपने को साकार कर सकता है।
आत्मनिर्भरता के मंत्र से चुनौतियों का सामना
प्रधानमंत्री ने कहा कि एक समय जब वह आत्मनिर्भरता की बात कर रहे थे, तब कुछ लोग वैश्वीकरण का हवाला देते थे। उन्होंने कहा कि संकट के समय कुछ लोगों ने पेट्रोल, डीजल, फर्टिलाइजर, दवाइयों और तकनीक जैसी जरूरी चीजों का हथियारीकरण किया।
पीएम मोदी ने कहा कि अगर भारत आत्मनिर्भरता के मंत्र के साथ आगे नहीं बढ़ता तो ऐसी चुनौतियों का सामना करना मुश्किल होता। उन्होंने कहा कि इस तरह की चुनौतियां आगे भी बढ़ती जा रही हैं।
पांच न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत पांच न्यूक्लियर रिएक्टर शुरू करने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। उन्होंने कच्चे तेल पर देश की निर्भरता का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि समुद्र तट के 99 फीसदी इलाके को नो गो एरिया घोषित किया गया था और समुद्र के अंदर एक्सप्लोरेशन नहीं करने का फैसला लिया गया था। अब इस क्षेत्र को खोला गया है और समुद्र के अंदर एक्सप्लोरेशन का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने समुद्र मंथन की घोषणा और हाल ही में 85 हजार करोड़ रुपये आवंटित किए जाने का भी उल्लेख किया।
दुनिया का नेतृत्व भारत के हाथों में हो: पीएम मोदी
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की कंपनियों को फॉर्च्यून 500 में आगे होना चाहिए। उन्होंने कहा कि बैंकिंग क्षेत्र में भारत आगे बढ़ रहा है और दुनिया के शीर्ष बैंकों में भारतीय बैंकों की हिस्सेदारी होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि भारतीय फार्मा कंपनियों ने विदेशों में काम किया है और दुनिया की बड़ी फार्मा कंपनियों में भारत की एक-दो कंपनियां होनी चाहिए। पीएम मोदी ने कहा कि समय की मांग है कि दुनिया का नेतृत्व भारत के हाथ में हो। उन्होंने राज्य सरकारों और स्वराज संस्थाओं से काम की रफ्तार बढ़ाने की अपील की।
नक्सलवाद को खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ा देश
प्रधानमंत्री ने कहा कि माओवाद और नक्सलवाद ने देश के कई परिवारों को बर्बाद किया और चार दशक तक बड़ी आबादी को बंदूक की नोक पर दबाकर रखा। उन्होंने कहा कि देश के नागरिकों की रक्षा करते हुए साढ़े तीन हजार सुरक्षाबलों और पुलिस जवानों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
पीएम मोदी ने कहा कि 2014 में सरकार को मौका मिलने के बाद नक्सलवाद को खत्म करने का संकल्प लिया गया था और देश अब इसे पूरी तरह खत्म करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि जहां कभी नक्सलियों की गोलियां चलती थीं, वहां आज विश्वास, प्रयास और विकास का तिरंगा लहरा रहा है।
हथियार वाले नक्सली गए, लेकिन वैचारिक नक्सलियों से सावधान रहने की अपील
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की सत्ता में वर्षों तक माओवादी सोच वाले लोग प्रभावशाली जगहों पर रहे और उन्होंने सरकारों की नीतियों को भी प्रभावित किया। उन्होंने कहा कि हथियार वाले नक्सली कमजोर हुए हैं, लेकिन वैचारिक नक्सल अब भी देश में हैं।
पीएम मोदी ने कहा कि ऐसे तत्व देश को हिंसा की ओर ले जाने की कोशिश में जुटे हैं। उन्होंने इन्हें पहचानने और अलग-थलग करने की जरूरत बताई। उन्होंने कहा कि सुरक्षित भारत बनाना सभी का दायित्व है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि सुरक्षा सीमा के अंदर हो या बाहर, देश इसके लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं कि युद्ध केवल सीमाओं पर हो, आज तेल रिफाइनरियों और बैंकिंग क्षेत्र को भी हमलों का सामना करना पड़ रहा है। इन क्षेत्रों की सुरक्षा भी जरूरी है।
पीएम मोदी ने किया शक्ति की सप्तधारा का आह्वान
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लाल किले की प्राचीर से देश में शक्ति की सप्तधारा का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जो काम पांच दशक में नहीं हुए, उन्हें 5-7 साल में पूरा करने के लिए नई ऊर्जा देनी होगी और इसमें युवाओं की शक्ति को भी शामिल किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सप्तधारा की शक्ति में उत्पादन की शक्ति शामिल है। देश में विनिर्माण को बढ़ाना होगा। छोटे-छोटे पुर्जों से लेकर बड़े उत्पादों तक पूरी वैल्यू चेन पर भारत का अधिकार होना चाहिए।
पीएम मोदी ने कहा कि डिजाइन से उत्पादन तक भारत को वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का केंद्र बनना होगा। इसके लिए गुणवत्ता और पैमाने में वैश्विक मानकों पर खरा उतरना जरूरी है। उन्होंने कहा कि भारतीय उत्पाद यूजर फ्रेंडली और आकर्षक होने चाहिए तथा जीरो डिफेक्ट उत्पाद देश की पहचान बनें।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वैश्विक बाजार में भारत की पहचान गुणवत्ता के आधार पर होनी चाहिए। उन्होंने गुणवत्ता से समझौता नहीं करने और गुणवत्ता को ही लक्ष्य बनाने पर जोर दिया।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.


















Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.