'गाय हमारी माता है, राष्ट्रीय पशु भर नहीं', मौलवियों के ज्ञापन पर भड़के CM योगी

HIGHLIGHTS
- मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि गाय सनातन संस्कृति में केवल पशु नहीं, बल्कि माता का स्वरूप है।
- मौलवियों की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने संबंधी ज्ञापन का CM योगी ने जिक्र किया।
- ज्ञापन में गाय के लिए ‘पशु’ शब्द के इस्तेमाल पर योगी ने संबंधित मौलवियों से सवाल किया।
- मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदुओं को गोमाता की पूजा का तरीका सिखाने की जरूरत नहीं है।
अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को दिगंबर अखाड़ा में आयोजित संत सभा में गो संरक्षण और सनातन परंपरा का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि गाय सनातन संस्कृति में केवल एक पशु नहीं, बल्कि माता का स्वरूप है। मुख्यमंत्री ने कुछ मौलवियों की ओर से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर दिए गए ज्ञापन का उल्लेख करते हुए कहा कि गाय हमारी माता है, केवल राष्ट्रीय पशु नहीं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिंदुओं को गोमाता की पूजा करने का तरीका बताने की जरूरत नहीं है। उन्होंने बताया कि कुछ दिन पहले उनके पास भी एक ज्ञापन आया था, जिसमें गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की गई थी। उन्होंने कहा कि उस ज्ञापन में गाय के लिए ‘पशु’ शब्द का इस्तेमाल किया गया था, जिसके बाद उन्होंने संबंधित मौलवियों से इस बारे में बातचीत की।
योगी आदित्यनाथ के मुताबिक, उन्होंने मौलवियों से सवाल किया कि सनातन परंपरा में पूजनीय गोमाता के लिए ‘पशु’ शब्द का प्रयोग क्यों किया गया। इस पर उन्हें बताया गया कि यह शब्द गलती से लिखा गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने आगे पूछा कि क्या यह सिर्फ गलती थी या फिर बार-बार की जाने वाली शरारत।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गाय केवल सनातन धर्म का हिस्सा नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक विरासत भी है। उन्होंने ‘गावो विश्वस्य मातरः...’ का उल्लेख करते हुए कहा कि इसका भाव है कि गाय पूरे विश्व की माता है। हिंदू समाज के संस्कारों में गोमाता का विशेष स्थान है और किसी भी शुभ कार्य को गो पूजन के बिना पूर्ण नहीं माना जाता।
मोदी जैसा पीएम होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शुक्रवार को देश के विभाजन, राम जन्मभूमि आंदोलन और मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों को लेकर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अगर 1947 में कांग्रेस मजबूती से खड़ी होती तो देश का विभाजन नहीं होता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर उस समय सरदार वल्लभभाई पटेल या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जैसा नेतृत्व देश को मिला होता तो लाखों हिंदुओं का कत्लेआम नहीं होता।
दिगंबर अखाड़ा में राम मंदिर आंदोलन के महानायक ब्रह्मलीन महंत रामचंद्र दास परमहंस की 23वीं पुण्यतिथि पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि परमहंस रामचंद्र दास का पूरा जीवन श्रीराम जन्मभूमि पर भव्य मंदिर निर्माण के संकल्प के लिए समर्पित रहा।
मुख्यमंत्री ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि देश के विभाजन के समय लिए गए राजनीतिक फैसलों का खामियाजा लाखों लोगों को भुगतना पड़ा। उन्होंने कहा कि अगर उस समय मजबूत नेतृत्व होता तो देश के विभाजन और बड़े पैमाने पर हुई हिंसा जैसी परिस्थितियों को टाला जा सकता था।
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