जुबानी टिप्पणी के गलत इस्तेमाल पर CJI सूर्यकांत ने जताई चिंता, बोले- यह दुर्भाग्यपूर्ण है

HIGHLIGHTS
- CJI सूर्यकांत ने सोशल मीडिया पर कोर्ट की कार्यवाही के छोटे क्लिप्स के प्रसार पर चिंता जताई।
- उन्होंने कहा कि बिना संदर्भ के टिप्पणियों को पेश करना युवाओं को गुमराह कर सकता है।
- CJI ने नागरिकों और मीडिया से संवैधानिक जिम्मेदारियों का ध्यान रखने की अपील की।
नई दिल्ली। मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शुक्रवार को कहा कि सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के दौरान उनकी जुबानी टिप्पणियों को गलत तरीके से पेश किया गया और बाद में देश के युवाओं को गुमराह करने के लिए उनका गलत इस्तेमाल किया गया।
टिप्पणी को गलत तरीके से पेश करने का आरोप
डीडी न्यूज को दिए एक इंटरव्यू में CJI सूर्यकांत ने कहा कि उनकी टिप्पणी को गलत तरीके से पेश किया गया। उन्होंने कहा कि जो बात कही ही नहीं गई, उसे इस तरह दिखाया गया जैसे वह कही गई हो। उन्होंने इसे दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा कि यह देश के युवाओं को गुमराह करने की एक बड़ी और बुरी नीयत वाली कोशिश है।
CJI ने सोशल मीडिया पर बिना जरूरी संदर्भ के कोर्ट की कार्यवाही के छोटे-छोटे क्लिप्स फैलाए जाने पर भी चिंता जताई।
उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया, प्रिंट मीडिया या किसी अन्य माध्यम से जुड़े लोगों के साथ-साथ आम नागरिकों के भी कुछ अधिकार, संवैधानिक कर्तव्य और जिम्मेदारियां हैं।
उन्होंने कहा कि अधिकारों की बात करते समय सभी को अपने कर्तव्यों को पूरा करने की क्षमता भी रखनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपनी जिम्मेदारियों को ध्यान में रखने और समाज में सद्भाव बनाए रखने के लिए लगातार प्रयास करने की अपील की।
क्या है पूरा मामला?
15 मई 2026 को सुप्रीम कोर्ट में एक मामले की सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने कथित तौर पर फर्जी डिग्री वाले कुछ लोगों की तुलना 'कॉकरोच' से की थी। उन्होंने यह भी कहा था कि ऐसे लोग सोशल मीडिया या सोशल एक्टिविस्ट बनकर चल रही व्यवस्था को निशाना बनाते हैं।
इस टिप्पणी के बाद युवाओं के बीच प्रतिक्रिया देखने को मिली और इसी टिप्पणी के बाद व्यंग्यात्मक ऑनलाइन आंदोलन 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) का जन्म हुआ।
बाद में यह आंदोलन इसी संगठन के नेतृत्व में NEET-UG पेपर लीक के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर एक महीने से अधिक समय तक चले विरोध प्रदर्शन में बदल गया। 20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी, जिसमें दोनों पक्षों के कई लोग घायल हुए थे।
इन प्रदर्शनों के बाद तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दिया था।
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