'21 जुलाई से पहले जहां जाना है, चले जाएं': ममता बनर्जी ने बागियों पर साधा निशाना

HIGHLIGHTS
- ममता बनर्जी ने टीएमसी छोड़ने वाले नेताओं को लेकर बयान दिया, कहा कि जो लोग दबाव में पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे अपने फैसले के लिए स्वतंत्र हैं।
- टीएमसी प्रमुख ने भाजपा पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि जांच एजेंसियों और अन्य दबावों के कारण कुछ नेता राजनीतिक फैसले ले रहे हैं।
- ममता ने अपने पुराने 26 दिन के अनशन का जिक्र किया और कहा कि देश की मौजूदा स्थिति को लेकर कई लोग चिंता जता रहे हैं।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी ने गुरुवार को पार्टी छोड़ने की अटकलों के बीच एक सांसद का जिक्र करते हुए भाजपा पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि फिल्म जगत से जुड़ी एक महिला सांसद ने भाजपा नेता से मुलाकात कर इस्तीफा देने की प्रक्रिया शुरू की है। ममता ने कहा कि वह उस सांसद का सम्मान करती हैं और उन्होंने पहले ही ईमेल के जरिए अपने फैसले की जानकारी दे दी थी।
ममता ने कहा कि सांसद के खुद आकर मिलने के फैसले के लिए वह उनका आभार व्यक्त करती हैं। हालांकि उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लोग दबाव की वजह से राजनीतिक फैसले ले रहे हैं।
दबाव में पार्टी बदलने का लगाया आरोप
टीएमसी प्रमुख ने कहा कि जो नेता भाजपा, पुलिस कार्रवाई, अदालत के मामलों, ईडी, सीबीआई या सीआईडी जैसी जांच एजेंसियों के दबाव में पार्टी छोड़ना चाहते हैं, वे अपने फैसले के लिए स्वतंत्र हैं। उन्होंने कहा कि 21 जुलाई से पहले लोग अपनी राजनीतिक राह चुन सकते हैं।
ममता ने राज्य में हुई हिंसा का जिक्र करते हुए दावा किया कि कई कार्यकर्ताओं और आम लोगों को नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि कई परिवारों को प्रताड़ना, हिंसा और अन्य परेशानियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे अपनी आवाज मजबूती से नहीं उठा पाए।
प्रशासन से निष्पक्ष भूमिका निभाने की अपील
ममता बनर्जी ने कहा कि उनकी पार्टी विधानसभा में अपनी बात शांतिपूर्ण तरीके से रखने की कोशिश करेगी। उन्होंने आरोप लगाया कि कई स्थानों पर पुलिस कार्यकर्ताओं को रोक रही है और प्रशासन से निष्पक्ष रवैया अपनाने की अपील की।
उन्होंने कहा कि कौन साथ रहेगा और कौन नहीं, इससे उन्हें फर्क नहीं पड़ता। जो लोग उनके साथ रहेंगे, वे आगे की नई राजनीतिक दिशा तय करेंगे। ममता ने कहा कि जिस तरह उन्होंने 1997 में नई राजनीतिक शुरुआत की थी, उसी तरह 2026 में भी आगे बढ़ने का रास्ता बनाया जा सकता है।
पुराने अनशन को याद कर केंद्र पर साधा निशाना
ममता ने अपने पुराने 26 दिन के अनशन का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उस समय सरकार की ओर से कोई बातचीत के लिए आगे नहीं आया था। केवल तत्कालीन राज्यपाल गोपालकृष्ण गांधी उनसे मिलने पहुंचे थे।
उन्होंने कहा कि देश की मौजूदा स्थिति को लेकर आम लोग, अर्थशास्त्री और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई लोग चिंता जता रहे हैं। ममता ने दावा किया कि आने वाले समय में देश को किसी बड़े संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए सभी को सतर्क रहने की जरूरत है।
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