गोवा नाइटक्लब अग्निकांड: सुप्रीम कोर्ट ने मालिकों की जमानत रद्द करने के आदेश में दखल से किया इनकार

HIGHLIGHTS
- 50 से ज्यादा लोग हादसे में घायल हुए थे।
- तीनों आरोपियों को दो सप्ताह में सरेंडर करना होगा।
- निचली अदालत को सुनवाई में तेजी लाने के निर्देश दिए गए।
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को बॉम्बे हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें गोवा के एक नाइटक्लब के मालिकों की जमानत रद्द कर दी गई थी। इस नाइटक्लब में लगी आग में 25 लोगों की मौत हुई थी।
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस शील नागू की पीठ ने हाई कोर्ट के 18 अगस्त के आदेश को बरकरार रखते हुए सौरभ लूथरा, गौरव लूथरा और अजय गुप्ता की कई याचिकाएं खारिज कर दीं। तीनों नॉर्थ गोवा के अर्पोरा इलाके में स्थित बिर्च बाय रोमियो लेन नाइटक्लब के सह-मालिक हैं। पिछले साल 6 दिसंबर को नाइटक्लब में भीषण आग लगने से 25 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 50 से ज्यादा लोग घायल हुए थे।
दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का निर्देश दिया। साथ ही निचली अदालत को आरोप तय करने की प्रक्रिया में तेजी लाने और मामले की सुनवाई जल्द पूरी करने के लिए कहा।
लूथरा ब्रदर्स की तरफ से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी और सिद्धार्थ दवे ने दलील दी कि यह मामला जानबूझकर किए गए अपराध का नहीं, बल्कि कथित लापरवाही का है।
दवे ने कहा कि लूथरा ब्रदर्स की ओर से ऐसा कोई कार्य नहीं किया गया, जिससे लोगों की मौत हुई हो। उन्होंने कहा कि आईपीसी की धारा 304 पार्ट-II इस मामले में लागू नहीं होती। उनके अनुसार, अगर अभियोजन पक्ष मामले में सफल होता है तो अधिकतम धारा 304A यानी लापरवाही से मौत का मामला बन सकता है।
अभिषेक मनु सिंघवी ने क्या दलील दी?
जस्टिस दत्ता ने सिंघवी से पूछा कि रेस्टोरेंट में कितने लोगों की जान गई थी। इस पर वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि मृतकों की संख्या 25 थी। हालांकि, उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट के फैसले में दो बुनियादी गलतियां हैं।
सिंघवी ने यह भी बताया कि मामले में कई अन्य सह-आरोपियों को जमानत मिल चुकी है। वहीं, अजय गुप्ता की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कहा कि कारोबार में गुप्ता की हिस्सेदारी केवल 10 प्रतिशत है और घटना से उनका कोई संबंध नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाएं कीं खारिज
गोवा सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू और स्टैंडिंग काउंसिल सुरजेंदु शंकर दास ने तीनों आरोपियों की याचिकाओं का विरोध किया। उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट ने तीनों को दो सप्ताह में सरेंडर करने का निर्देश दिया है।
याचिकाएं खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि आरोपियों को आज से दो सप्ताह के भीतर सरेंडर करना होगा।
अग्निकांड के कुछ समय बाद लूथरा परिवार थाईलैंड के फुकेत चला गया था। इसके बाद उनके खिलाफ इंटरपोल का ब्लू कॉर्नर नोटिस जारी किया गया। भारतीय मिशन के हस्तक्षेप के बाद थाई अधिकारियों ने 11 दिसंबर को फुकेत में दोनों को हिरासत में लिया। भारत लाए जाने के बाद दिल्ली की एक अदालत ने 16 दिसंबर 2025 को गोवा पुलिस को दो दिन की ट्रांजिट रिमांड दी थी।
हाई कोर्ट ने अपने आदेश में क्या कहा था?
बॉम्बे हाई कोर्ट ने 18 अगस्त को तीनों आरोपियों की जमानत रद्द कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि ट्रायल कोर्ट जांच के दौरान जुटाए गए सबूतों पर उचित तरीके से विचार करने में विफल रहा। साथ ही अपराध को हत्या या डकैती जितना गंभीर नहीं मानना भी गलत था।
हाई कोर्ट ने कहा था कि रिकॉर्ड में मौजूद जानकारी से संकेत मिलता है कि रेस्टोरेंट बिना लाइसेंस के संचालित किया जा रहा था और उसका ढांचा भी गैर-कानूनी था। कोर्ट के अनुसार, आरोपी और उनके साझेदार कथित तौर पर इस जोखिम से परिचित थे कि आवश्यक सुरक्षा इंतजामों के बिना परिसर में आतिशबाजी करने से खतरा पैदा हो सकता है।
अपने आदेश में हाई कोर्ट ने तीनों आरोपियों को दो सप्ताह के भीतर सेशंस कोर्ट के समक्ष सरेंडर करने का निर्देश दिया था।
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