अमेरिकी फेड के सख्त रुख से सोने-चांदी पर दबाव, एक हफ्ते में सोना 0.64% और चांदी 1.12% फिसली

HIGHLIGHTS
- MCX पर अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना 1,56,281 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ
- एक सप्ताह में MCX सोना 6,157 रुपये यानी 3.79% गिरा
- सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 2,36,704 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंची
नई दिल्ली। अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व के सख्त रुख और अमेरिका की मजबूत अर्थव्यवस्था से जुड़े आंकड़ों का असर इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों पर साफ दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार से मिले कमजोर संकेतों के चलते पूरे सप्ताह कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा। सोने के भाव में सप्ताह के दौरान करीब 1.86 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई, जबकि चांदी की कीमतों में भी कमजोरी रही।
MCX पर सोना-चांदी में बड़ी गिरावट
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आंकड़ों के अनुसार, इस सप्ताह दोनों कीमती धातुओं के भाव में गिरावट रही।
- सोने का हाल: शुक्रवार, 28 अगस्त को अक्टूबर डिलीवरी वाले सोने का वायदा भाव 1,56,281 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। एक दिन में इसमें करीब 2,600 रुपये यानी 1.6 प्रतिशत की गिरावट आई। 21 अगस्त को सोने का भाव 1,62,438 रुपये था। इस तरह एक सप्ताह में MCX पर सोना 6,157 रुपये यानी 3.79 प्रतिशत नीचे आ गया।
- चांदी का हाल: 28 अगस्त को सितंबर डिलीवरी वाली चांदी 4,000 रुपये से अधिक गिरकर 2,36,704 रुपये प्रति किलोग्राम पर पहुंच गई। पिछले सप्ताह की तुलना में चांदी के भाव में 9,893 रुपये यानी 4.01 प्रतिशत की गिरावट दर्ज हुई।
IBJA पर भी नरम पड़े सोने-चांदी के भाव
इंडियन बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के आंकड़ों के मुताबिक, हाजिर बाजार में भी कीमती धातुओं की कीमतों में कमजोरी रही।
- 24 कैरेट यानी 999 प्यूरिटी वाले सोने का भाव 28 अगस्त को 1,59,578 रुपये प्रति 10 ग्राम रहा। सोमवार को यह 1,62,603 रुपये था। पिछले शुक्रवार के 1,60,620 रुपये के भाव से तुलना करें तो एक सप्ताह में सोना 1,042 रुपये यानी 0.64 प्रतिशत सस्ता हुआ।
- 999 प्यूरिटी वाली चांदी 28 अगस्त को 2,43,892 रुपये प्रति किलोग्राम रही। पिछले शुक्रवार को इसका भाव 2,46,630 रुपये था। इस तरह सप्ताह के दौरान चांदी 2,738 रुपये यानी 1.12 प्रतिशत फिसली।
सोने-चांदी में इतनी गिरावट की वजह क्या रही?
बाजार जानकारों के मुताबिक, कीमतों में गिरावट की सबसे बड़ी वजह अमेरिका से आए आर्थिक आंकड़े रहे। अमेरिका में जुलाई के पर्सनल कंजम्पशन एक्सपेंडिचर (PCE) यानी महंगाई के आंकड़े 3.7 प्रतिशत रहे, जो उम्मीद से अधिक हैं। इसके अलावा रोजगार और व्यापार से जुड़े आंकड़े भी मजबूत रहे।
वहीं, जैक्सन होल सम्मेलन में फेडरल रिजर्व के नए अध्यक्ष केविन वॉर्श ने अपने पहले भाषण में सख्त मौद्रिक नीति यानी कठोर ब्याज दरें बनाए रखने के संकेत दिए। उनके भाषण के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने की कीमत कुछ ही मिनटों में करीब 70 डॉलर प्रति औंस तक गिर गई। हालांकि बाद में इसमें कुछ सुधार आया, लेकिन कीमतों पर दबाव बना रहा।
निवेशकों ने क्यों की मुनाफावसूली?
अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों से निवेशकों को संकेत मिला कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों को लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर रख सकता है। ब्याज दरें बढ़ने पर निवेशक सोने जैसी परिसंपत्तियों से पैसा निकालकर बॉन्ड जैसे विकल्पों में निवेश करते हैं, क्योंकि सोने से ब्याज आय नहीं मिलती। इसी वजह से इस सप्ताह निवेशकों की ओर से मुनाफावसूली देखने को मिली।
इसके अलावा, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास कूटनीतिक परिस्थितियों में सुधार के कारण कच्चे तेल की कीमतों में भी नरमी आई। तेल की कीमत घटने से वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता कुछ कम हुई, जिससे सोने को मिलने वाला समर्थन भी कमजोर पड़ा।
आगे कैसी रह सकती है सोने-चांदी की चाल?
एक्सपर्ट्स के अनुसार, आने वाले समय में सोने की दिशा अमेरिकी ब्याज दरों और फेडरल रिजर्व की नीतियों से प्रभावित होगी।
- अंतरराष्ट्रीय बाजार: कॉमेक्स गोल्ड के लिए 4,600 से 4,630 डॉलर प्रति औंस का स्तर बड़ी रुकावट यानी Resistance माना जा रहा है। वहीं 4,500 से 4,470 डॉलर का स्तर अहम Support रह सकता है।
- घरेलू बाजार (MCX): भारतीय बाजार में सोने के लिए 1,59,200 रुपये से 1,60,000 रुपये का स्तर पार करना मुश्किल हो सकता है। दूसरी ओर, 1,56,200 रुपये से 1,55,500 रुपये के बीच मजबूत Support मिलने की संभावना है।
अगर अमेरिकी अर्थव्यवस्था की मजबूती आगे भी बनी रहती है, तो छोटी अवधि में सोने और चांदी की कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.




























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.