डॉक्टरों पर बढ़ती हिंसा को लेकर IMA का डिजिटल ग्रिड जारी, 100 हमलों का दर्ज हुआ ब्यौरा
By Hitesh — July 22, 2026

HIGHLIGHTS
- डोंबिवली अस्पताल घटना के बाद IMA ने डॉक्टरों पर हुए 100 हमलों का डिजिटल रिकॉर्ड जारी किया।
- WHO के अनुसार, दुनियाभर में करीब 40% स्वास्थ्यकर्मी शारीरिक हिंसा का सामना करते हैं।
- डॉक्टरों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय कानून और बेहतर व्यवस्था की मांग तेज हुई।
Author: — Dainik Dehat
मुंबई। मुंबई के डोंबिवली स्थित शास्त्री नगर अस्पताल में डॉक्टरों के साथ हुई मारपीट की घटना के बाद चिकित्सा जगत में नाराजगी बढ़ गई है। डॉक्टरों की सुरक्षा और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ हिंसा के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (IMA) ने एक डिजिटल ग्रिड जारी किया है। इसमें हाल के वर्षों में देशभर में डॉक्टरों पर हुए 100 हमलों की जानकारी दर्ज की गई है।
वहीं, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रों में भी डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के खिलाफ बढ़ती हिंसा को वैश्विक चिंता का विषय बताया गया है।
वैश्विक आंकड़ों में क्या स्थिति है?
WHO की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 10 में से करीब 4 यानी लगभग 40 प्रतिशत स्वास्थ्यकर्मियों को अपने करियर के दौरान शारीरिक हिंसा का सामना करना पड़ता है। अगर इसमें अभद्र भाषा और गाली-गलौज जैसी घटनाओं को भी शामिल किया जाए तो यह आंकड़ा 60 प्रतिशत से अधिक पहुंच जाता है।
कई देशों में डॉक्टरों पर हमलों के मामले
स्पेन के मेडिकल जर्नल ‘अटेंशन प्राइमारिया’ के अनुसार, डॉक्टरों पर हमले के मामले जर्मनी में 91 प्रतिशत, चीन में 90 प्रतिशत, पेरू में 84.5 प्रतिशत, तुर्किए में 84 प्रतिशत और भारत में 77.3 प्रतिशत तक दर्ज किए गए हैं।
डॉक्टरों पर हिंसा के पीछे क्या कारण हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, मुंबई से लेकर सिंगापुर तक डॉक्टरों पर हमलों के कारणों में कई समानताएं हैं। इनमें अस्पतालों में अधिक भीड़, कर्मचारियों की कमी, इलाज के लिए लंबा इंतजार और मरीजों व परिजनों का धैर्य खोना प्रमुख कारण हैं।
इसके अलावा मरीजों और डॉक्टरों के बीच बेहतर संवाद की कमी भी तनाव बढ़ाने का कारण बनती है। विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार लोग यह मान लेते हैं कि इलाज पर पैसा खर्च करने के बाद मरीज का पूरी तरह ठीक होना तय है, जिससे उम्मीदें पूरी नहीं होने पर विवाद की स्थिति बन जाती है।
विशेषज्ञ ने जताई चिंता
महाराष्ट्र आईएमए के पूर्व अध्यक्ष डॉ. संतोष कदम ने कहा कि समाज में धैर्य की कमी बढ़ रही है। हर व्यक्ति तुरंत इलाज और 100 प्रतिशत परिणाम की उम्मीद करता है।
कड़े कानूनों के बावजूद नहीं रुक रहे हमले
भारत में 19 राज्यों ने स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा के लिए विशेष कानून बनाए हैं, लेकिन इसके बावजूद डॉक्टरों पर हमले जारी हैं।
महाराष्ट्र में 2010 से 2021 के बीच डॉक्टरों पर हमले के 738 मामले दर्ज किए गए, लेकिन इनमें केवल 4 मामलों में ही सजा हो सकी।
महाराष्ट्र मेडिकल काउंसिल के पूर्व सदस्य डॉ. सुहास पिंगले ने कहा कि भारत को एक मजबूत केंद्रीय कानून की जरूरत है। उन्होंने बताया कि देश का स्वास्थ्य बजट कुल बजट का करीब 2 प्रतिशत ही है, जिसके कारण डॉक्टरों को कम समय में बड़ी संख्या में मरीजों को देखना पड़ता है और तनाव की स्थिति बनती है।
दूसरे देशों में हिंसा रोकने के प्रयास
स्पेन ने स्वास्थ्यकर्मियों पर हमले को ‘राज्य के खिलाफ अपराध’ की श्रेणी में रखा, जिसके बाद वहां ऐसे मामलों में 50 प्रतिशत की कमी आई।
वहीं, सिंगापुर में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के साथ दुर्व्यवहार करने पर 5000 सिंगापुर डॉलर तक का जुर्माना, एक साल तक की जेल या दोनों का प्रावधान है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.