एसआईआर विवाद पर सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग का जवाब, 15 बिंदुओं में दी सफाई

HIGHLIGHTS
- आयोग ने एसआईआर से जुड़े फैसलों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सर्वसम्मति से मंजूरी मिलने की बात कही।
- हलफनामे में मतदाता पंजीकरण फॉर्म-6 और ऑनलाइन आवेदन की व्यवस्था पर स्पष्टीकरण दिया गया।
- मतदाता सूची में नाम जोड़ने या हटाने के अधिकार को लेकर आयोग ने अपनी स्थिति स्पष्ट की।
मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर चुनाव आयोग और विपक्ष के बीच विवाद बढ़ गया है। आयोग ने सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में 15 बिंदुओं वाला जवाबी हलफनामा दाखिल कर अपनी प्रक्रिया और फैसलों का बचाव किया। साथ ही, मतदाता सूची में अनियमितताओं के आरोपों को खारिज करते हुए याचिका के आधार पर भी सवाल उठाए। आयोग के मुताबिक, याचिका एक समाचार रिपोर्ट पर आधारित है। इस हलफनामे को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
क्या है पूरा मामला?
यह मामला राहुल गांधी और विपक्षी गठबंधन इंडिया ब्लॉक के अन्य नेताओं की ओर से दायर याचिका से जुड़ा है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग, मुख्य चुनाव आयुक्त और दोनों चुनाव आयुक्तों को नोटिस जारी किया था। याचिकाकर्ताओं ने एसआईआर से संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड सार्वजनिक करने, मतदाता सूची से हटाए गए नामों का स्वतंत्र ऑडिट कराने और बूथवार सूची उपलब्ध कराने की मांग की है।
विपक्ष का तर्क है कि किसी योग्य मतदाता का नाम बिना सूचना दिए और उसे अपना पक्ष रखने का अवसर दिए बिना मतदाता सूची से नहीं हटाया जाना चाहिए। आयोग ने अपने हलफनामे में निर्णय लेने की प्रक्रिया, फॉर्म-6, मतदाता सूची और डिजिटल डेटाबेस से जुड़े सवालों पर अपना पक्ष रखा है।
चुनाव आयोग ने हलफनामे में किन 15 बिंदुओं पर दी सफाई?
चुनाव आयोग ने अपने जवाबी हलफनामे में एसआईआर की प्रक्रिया और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर 15 प्रमुख बिंदुओं के जरिए अपना पक्ष स्पष्ट किया।
1. हलफनामे को सर्वसम्मति से मंजूरी
मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और दोनों चुनाव आयुक्तों सुखबीर सिंह संधू तथा विवेक जोशी ने जवाबी हलफनामे को सर्वसम्मति से मंजूरी दी।
2. एसआईआर के तीनों आदेश सर्वसम्मति से पारित
आयोग ने कहा कि जून 2025, अक्तूबर 2025 और मई 2026 में एसआईआर को लेकर जारी किए गए तीनों आदेश सर्वसम्मति से लिए गए फैसले थे।
3. फाइलों पर लिखी टिप्पणियां अंतिम निर्णय नहीं
आयोग के अनुसार, किसी फाइल पर मुख्य चुनाव आयुक्त या चुनाव आयुक्त की ओर से लिखे गए सवाल, सुझाव अथवा टिप्पणियों को आयोग का अंतिम फैसला नहीं माना जा सकता।
4. फाइलों को मंजूरी देने की प्रक्रिया
आयोग ने बताया कि सामान्य प्रक्रिया के तहत फाइल पहले एक चुनाव आयुक्त, फिर दूसरे चुनाव आयुक्त और उसके बाद मुख्य चुनाव आयुक्त के पास जाती है। तत्काल मामलों में इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से भी मंजूरी ली जा सकती है, जिसे बाद में फाइल में दर्ज किया जाता है।
5. अधिकार क्षेत्र से बाहर आदेश देने पर कार्रवाई
आयोग का कहना है कि यदि कोई अधिकारी उसे सौंपे गए अधिकारों से बाहर जाकर आदेश जारी करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
6. 28 जुलाई के कार्य आवंटन आदेश पर स्पष्टीकरण
आयोग ने बताया कि 28 जुलाई का कार्य आवंटन आदेश प्रतिनियुक्ति पर आए एक अतिरिक्त सचिव ने जारी किया था। दोनों चुनाव आयुक्तों ने अगले दिन कैबिनेट सचिव को पत्र लिखा था। आयोग के संयुक्त निर्देश के बाद 30 जुलाई को इस आदेश को लागू नहीं किया गया।
7. फॉर्म-6 में कोई संशोधन नहीं
आयोग ने स्पष्ट किया कि मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में कोई बदलाव नहीं किया गया है। आयोग के मुताबिक, इस फॉर्म में संशोधन करने का अधिकार केंद्र सरकार के पास है।
8. एसआईआर का घोषणा पत्र फॉर्म-6 से अलग
आयोग ने कहा कि एसआईआर में इस्तेमाल होने वाला घोषणा पत्र फॉर्म-6 से अलग दस्तावेज है। हालांकि, ऑनलाइन आवेदन में इसे प्रदर्शित करने के तरीके से फॉर्म में बदलाव किए जाने का भ्रम पैदा हो सकता था।
9. ऑनलाइन आवेदन में अलग-अलग दिखेंगे दस्तावेज
आयोग के मुताबिक, 21 अक्तूबर से ऑनलाइन आवेदन में फॉर्म-6 और घोषणा पत्र को अलग-अलग दिखाने की व्यवस्था की जाएगी। यह व्यवस्था कागजी फॉर्म में मौजूद प्रक्रिया के अनुरूप होगी।
10. रिकॉर्ड नहीं मिलने वाले मतदाताओं की सुनवाई
आयोग ने बताया कि जिन मतदाताओं का रिकॉर्ड पुराने दस्तावेजों से नहीं जुड़ पाया है, उन्हें सामान्य तौर पर सुनवाई के लिए बुलाने की आवश्यकता नहीं होगी। बूथ स्तर के अधिकारी उनके घर जाकर दस्तावेज जुटाएंगे। विशेष मामलों में सुनवाई की जाएगी और जहां संभव होगा, ऑनलाइन व्यवस्था अपनाई जाएगी।
11. ईसीआईनेट पर नाम जोड़ने या हटाने का अधिकार
आयोग ने कहा कि ईसीआईनेट पर किसी मतदाता का नाम केवल निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी के आदेश से जोड़ा या हटाया जा सकता है। इस व्यवस्था की जांच के लिए आईआईटी और भारतीय विज्ञान संस्थान के विशेषज्ञों वाली समिति गठित की गई है।
12. गोवा में 97 मतदाताओं के मामले पर जवाब
आयोग के अनुसार, मतदाता सूची से छूटे बताए गए 97 लोगों में से 88 पहले से मतदाता के रूप में दर्ज थे। छह लोग विदेश में थे, जबकि तीन के पास पुर्तगाली पासपोर्ट थे।
13. पश्चिम बंगाल की अपीलों पर आयोग की सफाई
आयोग ने बताया कि मतदाताओं को सूची में शामिल करने से संबंधित अपीलें सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के तहत पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी के अधिकारियों ने दाखिल की थीं। आयोग के मुताबिक, ये मामले उसके सामने नहीं लाए गए थे।
14. मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग पर जवाब
आयोग ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ रोक लगाने की मांग वाली याचिका को कानूनी रूप से विचार योग्य नहीं बताया। आयोग के अनुसार, मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश को हटाने की प्रक्रिया के समान है।
15. आंतरिक दस्तावेज मीडिया को देने से इनकार
आयोग ने कहा कि उसने किसी भी आंतरिक नोट या फाइल को मीडिया के लिए जारी करने की मंजूरी नहीं दी है। आयोग ने यह भी कहा कि इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) को चुनौती देने वाली याचिकाओं को सुप्रीम कोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है।
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