भारत की अर्थव्यवस्था ने पकड़ी रफ्तार, पहली तिमाही में GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी

HIGHLIGHTS
- पिछले साल की समान तिमाही में GDP ग्रोथ 6.9 फीसदी रही थी।
- पहली तिमाही में वास्तविक GVA वृद्धि 8.2 फीसदी दर्ज की गई।
- मजबूत खपत और निर्यात ने आर्थिक वृद्धि को सहारा दिया।
नई दिल्ली। भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2027 की पहली तिमाही में 7.8 फीसदी की मजबूत वृद्धि दर्ज की है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में वृद्धि दर 6.9 फीसदी रही थी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, इस बार इसमें बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
इस वृद्धि में मजबूत खपत और निर्यात का योगदान रहा। सरकार के पूंजीगत खर्च ने भी इसमें अहम भूमिका निभाई। अमेरिका-ईरान युद्ध से पैदा हुई आपूर्ति शृंखला की बाधाओं का अर्थव्यवस्था पर असर नहीं पड़ा। बढ़ी हुई कमोडिटी कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने बेहतर प्रदर्शन किया।
अप्रैल से जून तिमाही में दर्ज 7.8 फीसदी की वृद्धि पिछली तिमाही के 7.8 फीसदी विस्तार के बराबर रही। सकल मूल्य वर्धन (GVA) वास्तविक रूप से 8.2 फीसदी बढ़ा, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में 7.1 फीसदी था। पहली तिमाही में नॉमिनल GVA वृद्धि वास्तविक रूप से 11.5 फीसदी रही।
आर्थिक गतिविधियों में कितना सुधार?
पहली तिमाही में नॉमिनल GDP में 10.3 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। एक साल पहले यह वृद्धि 8.1 फीसदी थी। पिछले साल वस्तु एवं सेवा कर (GST) की दरों में कटौती की गई थी। आयकर में कमी से भी घरेलू आय और मांग को समर्थन मिला। इससे बढ़ती महंगाई के प्रभाव को कम करने में मदद मिली।
GDP पर क्या बोलीं वित्त मंत्री?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने भी GDP के आंकड़ों पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि पहली तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही। निर्मला सीतारमण ने इस मजबूत आर्थिक प्रदर्शन का श्रेय एनडीए सरकार के सुधारों को दिया।
उन्होंने अर्थव्यवस्था के चुस्त प्रबंधन को भी इसके प्रमुख कारणों में शामिल किया। वित्त मंत्री के अनुसार, इन प्रयासों के सकारात्मक परिणाम अब सामने आ रहे हैं। उनके मुताबिक, यह वृद्धि दर मौजूदा आर्थिक नीतियों की सफलता को दर्शाती है। सरकार के नीतिगत फैसले और उनका प्रभावी क्रियान्वयन आर्थिक प्रगति में सहायक रहे हैं। यह आंकड़ा देश की आर्थिक मजबूती का संकेत देता है।
निजी निवेश पर अर्थशास्त्रियों की क्या राय?
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि निजी निवेश में हालिया तेजी अस्थायी हो सकती है। यह वृद्धि कुछ समय तक ही बनी रह सकती है। दीर्घकालिक स्थिरता के लिए दूसरे कारकों पर भी ध्यान देना होगा। आगे भी सरकार की नीतियों का प्रभाव महत्वपूर्ण रहेगा।
राजकोषीय घाटे पर क्या अपडेट?
चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों यानी अप्रैल से जुलाई तक राजकोषीय घाटा 4.5 लाख करोड़ रुपये रहा। यह वार्षिक अनुमान का 26.8 फीसदी है। पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 18.2 फीसदी दर्ज किया गया था, जिससे पता चलता है कि घाटे में कमी आई है। कुल प्राप्तियां 1.31 लाख करोड़ रुपये रहीं।
अप्रैल से जुलाई के दौरान कुल खर्च 1.31 लाख लाख करोड़ रुपये रहा। ये आंकड़े चालू वित्त वर्ष के बजट लक्ष्य के क्रमशः 35.8 फीसदी और 31.8 फीसदी थे। वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच अर्थव्यवस्था की यह वृद्धि दर भारत की मजबूती को दर्शाती है। राजकोषीय घाटे में कमी वित्तीय स्थिरता के लिए सकारात्मक संकेत है।
क्या है GDP वृद्धि का महत्व?
सकल घरेलू उत्पाद (GDP) किसी देश की आर्थिक स्थिति का प्रमुख संकेतक होता है। 7.8 फीसदी की वृद्धि दर बताती है कि देश में उत्पादन और सेवाओं की गतिविधियों में तेजी आई है। इससे रोजगार सृजन और लोगों की आय बढ़ाने में मदद मिलती है। साथ ही विदेशी निवेश आकर्षित करने और आर्थिक विकास को गति देने में भी इसका योगदान रहता है।
राजकोषीय घाटा क्यों महत्वपूर्ण है?
राजकोषीय घाटा सरकार की आय और खर्च के बीच का अंतर होता है। इसमें कमी सरकार के बेहतर वित्तीय अनुशासन को दर्शाती है। घाटा कम होने पर सरकार को कम कर्ज लेने की जरूरत पड़ती है। इसे देश की अर्थव्यवस्था के लिए सकारात्मक संकेत माना जाता है। इससे ब्याज दरों पर भी सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
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