राम मंदिर चोरी मामले में FIR पर क्यों रुका फैसला? चंपत की डायरी में सामने आई चुनावी चिंता

HIGHLIGHTS
- आठ जून की बैठक में एफआईआर नहीं कराने को लेकर सवाल उठाया गया था।
- चंपत राय की डायरी में चार जून से शुरू हुए घटनाक्रम का विवरण दर्ज है।
- एफआईआर के बाद जांच लंबी चलने और कार्रवाई की अवधि स्पष्ट न होने की चिंता थी।
अयोध्या। राम मंदिर के चढ़ावे की रकम चोरी होने के मामले में शुरुआत में एफआईआर दर्ज नहीं कराने के पीछे केवल जांच लंबी चलने की आशंका ही वजह नहीं थी। इसके साथ आगामी विधानसभा चुनाव पर पड़ने वाले संभावित राजनीतिक प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई गई थी। श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र के तत्कालीन महासचिव चंपत राय की डायरी में दर्ज घटनाक्रम में इसका उल्लेख किया गया है।
डायरी के अनुसार, आठ जून को अयोध्या पहुंचे मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र और अनूप मित्तल को चंपत राय ने चार जून से सामने आए पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। पीएफसी भवन में हुई इस बैठक में डॉ. अनिल मिश्र और गोपाल राव भी मौजूद थे। बैठक के दौरान नृपेंद्र मिश्र ने सवाल किया कि मामले में अभी तक पुलिस में एफआईआर क्यों नहीं दर्ज कराई गई।
इस पर चंपत राय ने बताया कि एफआईआर दर्ज होते ही मामला पूरी तरह पुलिस के अधिकार क्षेत्र में चला जाता। इसके बाद पुलिस अपनी तय प्रक्रिया के अनुसार जांच करती और यह स्पष्ट नहीं होता कि कार्रवाई में कितना समय लगेगा। डायरी में यह भी दर्ज है कि इस दौरान चोरी की रकम का बड़ा हिस्सा खुर्द-बुर्द किए जाने की आशंका थी।
इसी बातचीत में एक अन्य चिंता भी सामने आई। कहा गया कि मामला लंबे समय तक चलने और लगातार मीडिया की सुर्खियों में बने रहने से उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। डायरी के मुताबिक, चुनाव पर संभावित असर का मुद्दा उठाए जाने के बाद नृपेंद्र मिश्र ने इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
लखनऊ की बैठक में भी उठा एफआईआर का सवाल
एफआईआर कराने को लेकर सवाल केवल अयोध्या में हुई बैठक तक सीमित नहीं रहा। डायरी के मुताबिक, 11 जून को लखनऊ में हुई बैठक में भी चार जून से शुरू हुए पूरे घटनाक्रम पर चर्चा हुई।
निर्धारित स्थान पर डॉ. अनिल मिश्र, गोपाल राव, भैयाजी जोशी, स्वामी गोविंद देव गिरि, नृपेंद्र मिश्र और कृष्ण मोहन पहुंचे। भोजन के बाद भैयाजी जोशी के साथ बैठक हुई, जिसमें बाद में लखनऊ क्षेत्र प्रचारक अनिल कुमार सिंह भी शामिल हुए। बैठक में कुल सात लोग मौजूद थे। डायरी के अनुसार, इस बैठक में भी घटनाक्रम की जानकारी साझा की गई और एफआईआर दर्ज नहीं कराने को लेकर सवाल किया गया।
बाद में पुलिस को दी जानकारी, नेपाल से पकड़ा गया आरोपी
डायरी में यह भी बताया गया है कि बाद के चरण में पुलिस की मदद ली गई और उसे पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी गई। पुलिस ने कार्रवाई में सहयोग भी किया। इसी दौरान चोरी में शामिल एक युवक के नेपाल सीमा की ओर जाने की सूचना मिली।
डायरी के मुताबिक, पुलिस ने कार्रवाई करते हुए महज 24 घंटे के भीतर उस युवक को नेपाल से हिरासत में ले लिया। उसके पास से चोरी की रकम भी बरामद की गई।
इस पूरे घटनाक्रम से पता चलता है कि शुरुआती स्तर पर एफआईआर नहीं कराने का निर्णय सिर्फ पुलिस जांच की प्रक्रिया और चोरी की रकम बरामद करने से जुड़ी चिंता तक सीमित नहीं था। मामले के सार्वजनिक होने और उसके आगामी विधानसभा चुनाव पर संभावित प्रभाव को लेकर भी शीर्ष स्तर पर विचार किया गया था।
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