जैश की नई साजिश का खुलासा, शादी के बहाने भारतीय महिलाओं को फंसाने की कोशिश: IB रिपोर्ट

HIGHLIGHTS
- आईबी की रिपोर्ट के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद की महिला विंग शादी का झांसा देकर भारतीय महिलाओं को ऑनलाइन फंसाने की कथित साजिश रच रही है।
- खुफिया एजेंसियों का दावा है कि महिलाओं को पाकिस्तान ले जाकर ब्रेनवॉश करने और भारत से संवेदनशील जानकारी जुटाने के लिए इस्तेमाल करने की कोशिश की जा रही है।
नई दिल्ली। भारतीय खुफिया एजेंसी इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी) ने दावा किया है कि आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद की महिला इकाई जमात-उल-मोमिनात (JUM) भारतीय महिलाओं को ऑनलाइन जाल में फंसाने की साजिश पर काम कर रही है। एजेंसी के अनुसार, संगठन ने भोली-भाली भारतीय महिलाओं को निशाना बनाने के लिए एक सुनियोजित नेटवर्क तैयार किया है।
आईबी के मुताबिक, संगठन से जुड़े कुछ युवा सोशल मीडिया और अन्य ऑनलाइन माध्यमों के जरिए भारतीय महिलाओं से संपर्क करते हैं। पहले उन्हें प्रेम और विवाह का झांसा दिया जाता है, फिर उन पर भारत से जुड़ी संवेदनशील जानकारी जुटाने का दबाव बनाया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह का जाल खासतौर पर सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली महिलाओं के लिए बिछाया जाता है, ताकि उन्हें पाकिस्तान ले जाना अपेक्षाकृत आसान हो।
खुफिया एजेंसियों के अनुसार, जैश-ए-मोहम्मद ने अक्टूबर 2025 में अपनी पहली महिला विंग जमात-उल-मोमिनात (JUM) का गठन किया था। इस विंग की कमान आतंकी सरगना मसूद अजहर की बहन सादिया अजहर के हाथों में है। एजेंसी का कहना है कि इस इकाई का उद्देश्य भर्ती करना, कट्टरपंथी विचारधारा फैलाना और फिदायीन दस्ते तैयार करना है।
आईबी के अधिकारियों के मुताबिक, अब इस संगठन ने भारत में अपने नेटवर्क के विस्तार के लिए नया तरीका अपनाया है। साजिश के तहत भारतीय महिलाओं को पाकिस्तान जाकर शादी करने के लिए तैयार किया जाता है। वहां पहुंचने के बाद उनका कथित तौर पर ब्रेनवॉश किया जाता है और फिर उन्हें भारत वापस भेजने की योजना बनाई जाती है।
एक अधिकारी ने बताया कि भारत लौटने के बाद इन महिलाओं से संवेदनशील स्थानों और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां जुटाने की उम्मीद की जाती है। अधिकारियों का कहना है कि जैश-ए-मोहम्मद पहले भी इस तरह की गतिविधियों में शामिल रहा है, लेकिन इस बार जिस स्तर पर नेटवर्क तैयार करने की कोशिश की जा रही है, वह चिंता का विषय है।
आईबी के अनुसार, पहले ऐसे अभियान मुख्य रूप से जम्मू-कश्मीर तक सीमित थे, लेकिन अब संगठन का फोकस राजस्थान की ओर बढ़ गया है, क्योंकि इस राज्य की पाकिस्तान के साथ लंबी अंतरराष्ट्रीय सीमा लगती है।
राजस्थान की पाकिस्तान से करीब 1,070 किलोमीटर लंबी सीमा श्रीगंगानगर के हिंदूमल कोट से लेकर बाड़मेर के शाहगढ़ तक फैली हुई है। अधिकारियों के अनुसार, इन सीमावर्ती क्षेत्रों में इंटरनेट मीडिया पर सक्रिय कई युवतियों की पहचान की गई है, जिनसे आईएसआई समर्थित तत्व संपर्क साधने की कोशिश कर रहे हैं।
कमजोर सामाजिक स्थिति वाली लड़कियां बनती हैं निशाना
अधिकारियों का कहना है कि जिन लड़कियों का व्यक्तित्व कमजोर होता है, जिनके पारिवारिक संबंध मजबूत नहीं होते या जो सामाजिक रूप से अकेली होती हैं, वे ऐसे नेटवर्क के निशाने पर रहती हैं। बताया गया कि जैश के हैंडलर इन महिलाओं से कई-कई घंटे बातचीत करते हैं और विवाह का प्रस्ताव देने से पहले यह संपर्क छह महीने या उससे अधिक समय तक जारी रहता है।
आईबी के मुताबिक, इस दौरान महिलाओं को इस बात का अंदाजा भी नहीं होता कि वे किस साजिश का हिस्सा बन रही हैं। पाकिस्तान पहुंचने के बाद उनके लिए वापस लौटना बेहद मुश्किल हो जाता है। अधिकारियों ने बताया कि शुरुआती बातचीत के दौरान उनसे किसी संवेदनशील स्थान या गोपनीय जानकारी के बारे में कोई सवाल नहीं पूछा जाता, ताकि उन्हें पूरा मामला सामान्य प्रेम संबंध जैसा लगे।
राजस्थान सीमा से प्रवेश पहली पसंद
अधिकारियों के अनुसार, जब कोई महिला विवाह के लिए तैयार हो जाती है तो उसे वैध पासपोर्ट बनवाने के लिए कहा जाता है। यदि राजस्थान सीमा के रास्ते पाकिस्तान पहुंचना संभव हो तो उसी मार्ग को प्राथमिकता दी जाती है।
अगर यह संभव नहीं होता, तो महिलाओं को नेपाल या सऊदी अरब के रास्ते पाकिस्तान पहुंचने के लिए कहा जाता है। वहां प्रवेश कराने के लिए एक व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की जाती है। हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि सभी महिलाओं को भारत लौटाकर जानकारी जुटाने के लिए नहीं भेजा जाता।
आईबी के अनुसार, यह पूरी प्रक्रिया जेयूएम के बड़े नेटवर्क को खड़ा करने की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। संगठन में शामिल होने के बाद इन महिलाओं की जिम्मेदारी अन्य महिलाओं और युवाओं से संपर्क कर उन्हें भी इस नेटवर्क से जोड़ने की होती है।
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