असम में प्रणब डोले पर NSA लगाने को लेकर कांग्रेस का हमला, बोली- असहमति दबाने की कोशिश

HIGHLIGHTS
- प्रणब डोले को NSA के तहत हिरासत में लिए जाने के बाद कांग्रेस ने असम सरकार पर निशाना साधा।
- कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार असहमति की आवाज दबाने के लिए कठोर कानूनों का इस्तेमाल कर रही है।
- जयराम रमेश ने कहा कि डोले को जमानत मिलने के एक दिन बाद NSA लगाना कानून के दुरुपयोग का उदाहरण है।
कांग्रेस ने असम सरकार द्वारा आदिवासी अधिकार कार्यकर्ता प्रणब डोले को राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत हिरासत में लिए जाने को लेकर रविवार को सरकार पर निशाना साधा। पार्टी ने आरोप लगाया कि डोले पर एनएसए लगाना भाजपा सरकारों की उस प्रवृत्ति को दिखाता है, जिसमें असहमति की आवाजों को दबाने के लिए कठोर कानूनों का इस्तेमाल किया जा रहा है।
विपक्षी दल ने इसे निवारक हिरासत कानूनों का दुरुपयोग बताते हुए कहा कि यह राज्य सरकार की कार्रवाई की सीमा से बाहर है। कांग्रेस महासचिव (संचार) जयराम रमेश ने कहा कि 30 जुलाई को असम सरकार ने प्रणब डोले के खिलाफ एनएसए लगाया, जबकि इससे एक दिन पहले ही जिला अदालत ने उन्हें जमानत दी थी।
प्रणब डोले की गिरफ्तारी को लेकर कांग्रेस का दावा
जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि यह निवारक हिरासत से जुड़े कानूनों का स्पष्ट दुरुपयोग है। उन्होंने बताया कि डोले को उन ग्रामीणों के समर्थन में खड़े होने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था, जो काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित पांच सितारा रिसॉर्ट का विरोध कर रहे हैं। इस परियोजना का समर्थन असम के मुख्यमंत्री ने किया था।
कांग्रेस नेता ने कहा कि गोलाघाट के आदिवासी निवासी वर्ष 2022 से इस परियोजना का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने इस मामले को लेकर गुवाहाटी हाईकोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी। ग्रामीणों का आरोप है कि उनकी जमीन जबरन अधिग्रहित की गई।
अदालत की टिप्पणी का किया जिक्र
जयराम रमेश ने कहा कि 29 जुलाई को जमानत देते समय सत्र अदालत ने कहा था कि जहां पर्यावरण संरक्षण और आदिवासी समुदाय के अस्तित्व का सवाल जुड़ा हो, वहां स्थानीय लोगों की जायज चिंताओं को दबाने के लिए आपराधिक कानून का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने आरोप लगाया कि असम सरकार ने एनएसए लगाकर इसी तरह की कार्रवाई की है। रमेश ने कहा कि डोले के खिलाफ जारी निरोध आदेश अस्पष्ट और अनुमान पर आधारित आरोपों पर टिका हुआ है।
एनएसए आदेश पर उठाए सवाल
जयराम रमेश ने दावा किया कि डोले के खिलाफ एनएसए आदेश में "संदिग्ध स्रोतों से संदिग्ध विदेशी लेनदेन" जैसे आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने इसे मोदी सरकार की पहले से अपनाई जा रही कार्यशैली का हिस्सा बताया।
उन्होंने उत्तर प्रदेश का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां भी नोएडा में कथित शोषणकारी कार्य परिस्थितियों के खिलाफ आवाज उठाने वाले श्रमिक अधिकार कार्यकर्ताओं पर एनएसए लगाने की कोशिश की गई थी।
असम सरकार पर कांग्रेस का हमला
कांग्रेस नेता ने कहा कि भाजपा सरकारें मजदूरों, आदिवासी समुदायों और समाज के कमजोर वर्गों की जायज मांगों को गिरफ्तारी और कठोर कानूनों के जरिए नहीं दबा सकतीं।
उन्होंने बताया कि प्रणब डोले को 13 जुलाई को गुवाहाटी से गिरफ्तार किया गया था और उन्हें गोलाघाट जिला जेल भेजा गया था। जून में हुए प्रदर्शन से जुड़े मामले में बुधवार को अदालत ने उन्हें जमानत दी थी। इसके बाद राज्य सरकार ने गुरुवार को उनके खिलाफ एनएसए लगा दिया, जिसके चलते उनकी हिरासत उसी जेल में जारी रही।
रमेश ने कहा कि असम सरकार कानून के शासन और लोकतांत्रिक असहमति के प्रति लगातार लापरवाही बरत रही है। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट और कई हाईकोर्ट पहले भी यह स्पष्ट कर चुके हैं कि निवारक हिरासत कानूनों का इस्तेमाल जमानत आदेशों को निष्प्रभावी करने या किसी व्यक्ति की हिरासत बढ़ाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
यह बयान ऐसे समय आया है जब काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान के पास प्रस्तावित पांच सितारा होटल के विरोध से जुड़े मामले में अदालत से जमानत मिलने के अगले दिन प्रणब डोले को एनएसए के तहत हिरासत में लिया गया।
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