‘दिमागी नक्सल’ विवाद पर किरेन रिजिजू का बड़ा बयान, बताया PM मोदी ने किन लोगों के लिए कहा

HIGHLIGHTS
- किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सफाई दी।
- रिजिजू के मुताबिक, ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल एक खास वर्ग के लिए किया गया।
- उन्होंने माओवादियों का समर्थन करने वालों का उल्लेख किया।
नई दिल्ली। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में विपक्षी नेताओं को ‘दिमागी नक्सल’ नहीं कहा था।
कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम समेत विपक्ष के कई नेताओं की तीखी टिप्पणियों के बाद रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर यह सफाई दी।
किसे कहा गया ‘दिमागी नक्सल’?
रिजिजू ने अपने पोस्ट में साफ किया कि ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल विशेष रूप से उन लोगों के लिए किया गया है जो माओवादियों का समर्थन करते हैं और भारतीय संविधान को नहीं मानते। वे अलगाववादियों के साथ खड़े होते हैं और जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 का समर्थन करते हैं।
रिजिजू ने कहा कि ऐसे लोग भारत के पूर्वोत्तर हिस्से को देश के बाकी हिस्सों से अलग करने के लिए चिकन्स नेक को काटने की साजिश रचते हैं।
पीएम मोदी के संबोधन के बाद उपजा विवाद
इससे पहले, 80वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर देश को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने हजारों सुरक्षाकर्मियों के बलिदान को याद किया और हथियारबंद नक्सलियों के सफल खात्मे पर देश को बधाई दी।
हालांकि, उन्होंने आगाह किया कि सालों तक सार्वजनिक जीवन और सरकारी समितियों में माओवादी सोच वाले लोगों का प्रभाव रहा है।
‘दिमागी नक्सल’ मौके की तलाश में
पीएम मोदी ने कहा कि भले ही जंगल में हथियार उठाने वाले नक्सल खत्म हो गए हों, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ अब भी मौके की तलाश में हैं। वे हिंसा के तरीके ढूंढ रहे हैं और देश को गलत रास्ते पर ले जाने की कोशिश कर रहे हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग-थलग किया जाना चाहिए।
चिदंबरम का तंज
प्रधानमंत्री के इस बयान के बाद सियासत तेज हो गई। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम ने पीएम मोदी के भाषण का जिक्र करते हुए X पर एक पोस्ट किया। उन्होंने इस टिप्पणी पर सीधा पलटवार करते हुए लिखा कि उन्हें ‘दिमागी नक्सल’ होने पर गर्व है।
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