झारखंड में मानसून का असर तेज, जलाशय लबालब और नदियां उफान पर

HIGHLIGHTS
- जल संसाधन विभाग ने 56 जलाशयों की निगरानी के लिए पांच चीफ इंजीनियरों को जिम्मेदारी दी
- कई नदियों में पानी बढ़ने से नदी किनारे बसे गांवों में चिंता बढ़ी
- भारी बारिश की संभावना को देखते हुए कई जिलों में निगरानी बढ़ाई गई
रांची। मानसून के सक्रिय होने से झारखंड के जलाशयों और नदियों में पानी तेजी से बढ़ा है। लगातार हो रही बारिश के चलते प्रदेश के कई जलाशय पूरी तरह भर चुके हैं, वहीं नदियों का जलस्तर भी लगातार ऊपर जा रहा है।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में कुल 56 जलाशय सूचीबद्ध हैं। इनमें 18 जलाशयों में पानी उनकी लाइव स्टोरेज क्षमता के 100 प्रतिशत या उससे अधिक पहुंच गया है। वहीं 10 जलाशयों में जलस्तर 80 से 100 प्रतिशत के बीच है। इस तरह करीब 30 जलाशयों के जलस्तर पर लगातार निगरानी रखी जा रही है।
लगातार बारिश जारी रहने पर इन जलाशयों में पानी का स्तर और बढ़ने की संभावना है। इसका सीधा प्रभाव नदियों के जलस्तर पर भी पड़ सकता है। रांची सहित राज्य के कई जिलों में प्रशासन और जल संसाधन विभाग ने निचले इलाकों तथा नदी किनारे बसे गांवों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने को कहा है।
56 जलाशयों की कुल लाइव स्टोरेज क्षमता 3,16,591.800 हेक्टेयर-मीटर है। एक हेक्टेयर-मीटर 10 हजार घनमीटर के बराबर होता है। ऐसे में इन जलाशयों में मौजूद पानी राज्य के लिए पेयजल, सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों के लिहाज से काफी महत्वपूर्ण है।
रांची के तीन प्रमुख डैम में पर्याप्त पानी
राजधानी रांची के लिए गोंदा, गेतलसूद और हटिया डैम प्रमुख जलाशयों में शामिल हैं। तीनों में पानी की स्थिति बेहतर हुई है। गोंदा डैम का जलस्तर 2128 फीट पहुंचने के बाद एक फाटक खोलकर पानी छोड़ा गया। वहीं गेतलसूद डैम में भी जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है।
अब तक इसका 90 प्रतिशत कैचमेंट एरिया भर चुका है। इसमें लाइव स्टोरेज फुल रिजरवायर लेवल 22469.13 हेक्टेयर मीटर है, जबकि उपलब्ध पानी 16520.67 हेक्टेयर मीटर है। डैम का डेड स्टोरेज लेवल (डीएसएल) 579.27 मीटर है।
वहीं इसका एफआरएल 590.24 मीटर है। वर्तमान वाटर लेवल (पीडब्ल्यूएल) 588.41 मीटर दर्ज किया गया है, जो डेड स्टोरेज लेवल से अधिक है। डैम का जलस्तर 1933 आरएल फीट दर्ज हुआ है, जबकि इसकी अधिकतम जलधारण क्षमता 1936 आरएल फीट है।
जलस्तर 1933.5 आरएल फीट तक पहुंचने पर डैम के रेडियल गेट फिर खोले जा सकते हैं। हटिया डैम में भी पर्याप्त मात्रा में पानी जमा हो चुका है। हालांकि, इसका जलस्तर अभी अधिकतम जलस्तर से करीब पांच फीट नीचे बताया जा रहा है।
रांची के लोगों के लिए यह राहत की बात है कि तीनों प्रमुख डैम में पानी की स्थिति बेहतर हुई है। हालांकि, नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए बढ़ता जलस्तर चिंता का विषय बना हुआ है। इंजीनियरों के अनुसार रांची के तीनों प्रमुख डैम में पर्याप्त पानी एकत्र हो गया है।
नौ जलाशयों से छोड़ा गया पानी
जलस्तर बढ़ने के कारण राज्य के कुल नौ जलाशयों से पानी छोड़ा गया है। जल संसाधन विभाग जलाशयों के जलस्तर, इनफ्लो और आउटफ्लो पर लगातार नजर रख रहा है। 56 जलाशयों की निगरानी के लिए विभाग ने पांच चीफ इंजीनियरों को जिम्मेदारी सौंपी है।
रांची चीफ इंजीनियर के अधीन आने वाले 21 जलाशयों में से 12 में पानी पूरी क्षमता तक पहुंच गया है। वहीं हजारीबाग क्षेत्र के 13 में से आठ जलाशय भी शतप्रतिशत भर चुके हैं।
जिन नौ जलाशयों से पानी छोड़ा गया है, उनमें गेतलसूद, गोंदा, व्यांगबिल, खरकई, गालूडीह, चांडिल और गंजिया बाराज शामिल हैं।
10 नदियों में बढ़ा जलस्तर, नदी किनारे बसे गांवों में चिंता
लगातार बारिश का असर नदियों पर भी दिखाई दे रहा है। रांची में स्वर्णरेखा, हरमू और पोटपोटो नदी का जलस्तर बढ़ रहा है। इसके अलावा दामोदर, पंचेत, कोयल और बराकर नदी में भी पानी बढ़ा है।
कोल्हान क्षेत्र में सोन, संजय, सुरू और शंख नदियां उफान पर हैं। सरायकेला क्षेत्र में खरकई नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। संजय नदी कई जगहों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही है।
सिमडेगा-खूंटी मुख्य मार्ग पर पेलौल गांव के पास बनई नदी में भी पानी बढ़ने के कारण लोगों को सतर्क किया गया है।
17 जिलों में अलर्ट, बारिश बढ़ी तो बदल सकती है स्थिति
मौसम विभाग ने अगले कुछ दिनों में राज्य के कई हिस्सों में भारी बारिश की संभावना जताई है। इसे देखते हुए रांची, देवघर, दुमका, गिरिडीह, गोड्डा, जामताड़ा, पाकुड़, साहिबगंज, हजारीबाग, कोडरमा, लोहरदगा, गुमला, सिमडेगा, रामगढ़, खूंटी, बोकारो और धनबाद सहित कई जिलों में सतर्कता बढ़ाई गई है।
पश्चिमी सिंहभूम, पूर्वी सिंहभूम और सरायकेला-खरसावां में भी भारी बारिश की संभावना को देखते हुए निगरानी बढ़ाई गई है।
100 प्रतिशत या उससे अधिक पानी वाले जलाशय
| क्र. | जलाशय | क्षमता (हेक्टेयर-मीटर) | उपलब्ध पानी | प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| 1 | बुचाओपा | 241.82 | 241.82 | 100% |
| 2 | मासरिया | 355.56 | 357.86 | 100.65% |
| 3 | लावा | 98.76 | 98.76 | 100% |
| 4 | चिंडा | 831.85 | 831.85 | 100% |
| 5 | टाकर | 648.15 | 648.15 | 100% |
| 6 | कांसजोर | 1,787.20 | 1,887.23 | 105.60% |
| 7 | टोरो | 1,182.49 | 1,186.15 | 100.31% |
| 8 | सोनुआ | 3,132.00 | 3,132.00 | 100% |
| 9 | डिगलपहाड़ी | 59.20 | 59.21 | 100.01% |
| 10 | सूर्योडी | 252.86 | 252.87 | 100% |
| 11 | अंजनवा | 617.00 | 698.78 | 113.25% |
| 12 | घाघरा | 854.00 | 854.86 | 100.10% |
| 13 | झुमरा | 216.00 | 216.48 | 100.22% |
| 14 | बौधा | 148.00 | 148.21 | 100.14% |
| 15 | हिरु | 571.00 | 571.96 | 100.17% |
| 16 | दुलकी | 182.00 | 182.65 | 100.36% |
| 17 | मलई | 2,854.37 | 2,896.69 | 101.48% |
| 18 | रानीटोला | 122.45 | 128.81 | 105.19% |
10 जलाशयों में 80 से 100 प्रतिशत के बीच पानी
- पारस — 99.65%
- नंदानी — 99.43%
- लतरातू — 99.87%
- धानसिंगटोली — 99.95%
- कटारी — 90.13%
- अपर सांख — 82.69%
- रामरेखा — 85.98%
- तेनुघाट — 86.44%
- अंराज — 90.22%
- बतरे — 94.03%
70 से 80 प्रतिशत के बीच पानी वाले जलाशय
| क्र. | जलाशय | क्षमता | उपलब्ध पानी | प्रतिशत |
|---|---|---|---|---|
| 1 | नाकटी | 903.26 | 722.00 | 79.00% |
| 2 | सुंदर | 3,087.70 | 2,432.16 | 78.77% |
| 3 | बकसा | 1,103.00 | 813.14 | 73.72% |
| 4 | बिरहोरवा | 2,777.23 | 2,160.07 | 77.78% |
| 5 | चिरका | 568.21 | 441.46 | 77.69% |
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