त्योहारी सीजन से पहले सरकार का बड़ा फैसला, चीनी डीलरों की स्टॉक लिमिट 4,000 से घटाकर 2,000 क्विंटल

HIGHLIGHTS
- सरकार ने त्योहारों से पहले चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नजर बढ़ाई है।
- 31 अगस्त को चीनी की औसत खुदरा कीमत 63.28 रुपये प्रति किलो दर्ज हुई।
- पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले खुदरा कीमत में 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई।
त्योहारों का सीजन शुरू होने से पहले केंद्र सरकार ने चीनी की लगातार बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने चीनी के डीलरों और थोक विक्रेताओं के लिए स्टॉक रखने की अधिकतम सीमा को आधा कर दिया है। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के सख्त रुख के बीच यह फैसला बाजार में जमाखोरी रोकने और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के उद्देश्य से लिया गया है।
सरकार ने स्टॉक लिमिट आधी क्यों की?
देशभर में चीनी की खुदरा कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 31 अगस्त को देश में चीनी की औसत खुदरा कीमत 63.28 रुपये प्रति किलोग्राम दर्ज की गई। पिछले साल इसी अवधि में यह कीमत 46.02 रुपये प्रति किलोग्राम थी। यानी कीमत में 37 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
वहीं, थोक कीमतों में भी सालाना आधार पर 36.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है और यह 58.40 रुपये प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। इसी बढ़ती महंगाई पर रोक लगाने के लिए सरकार ने डीलरों की स्टॉक लिमिट 4,000 क्विंटल से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दी है।
नए नियम क्या हैं और कब से लागू होंगे?
खाद्य मंत्रालय की ओर से जारी नए दिशा-निर्देशों के मुताबिक स्टॉक लिमिट में यह कटौती 15 सितंबर से लागू होगी और 30 नवंबर 2026 तक प्रभावी रहेगी।
नए नियमों के तहत अब कोई भी डीलर देश में किसी भी स्थान पर एक समय में 2,000 क्विंटल से ज्यादा चीनी का स्टॉक नहीं रख सकेगा। इसके साथ ही डीलरों के लिए यह भी जरूरी किया गया है कि वे किसी भी स्टॉक को प्राप्ति की तारीख से 30 दिनों से अधिक समय तक अपने पास न रखें।
इसका उद्देश्य बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और सट्टा कारोबार पर अंकुश लगाना है।
कोलकाता को क्यों मिली राहत?
इस फैसले के बीच पश्चिम बंगाल के कोलकाता और उसके विस्तारित महानगरीय क्षेत्रों को विशेष छूट दी गई है। यहां पुरानी स्टॉक सीमा 4,000 क्विंटल ही रखी गई है।
खाद्य मंत्रालय ने बताया कि कोलकाता अपनी चीनी की जरूरत के लिए मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र पर निर्भर है। इसके अलावा, कोलकाता पूर्वी और उत्तर-पूर्वी भारत के राज्यों के लिए चीनी आपूर्ति का प्रमुख केंद्र है।
इसी भौगोलिक स्थिति और बाजार की मांग को देखते हुए कोलकाता को नई स्टॉक सीमा से छूट दी गई है।
क्या देश में चीनी की कमी है?
सरकार का कहना है कि देश में चीनी का पर्याप्त स्टॉक मौजूद है और मिलें कृत्रिम रूप से कीमतें बढ़ा रही हैं।
हालांकि, चालू विपणन वर्ष 2025-26 यानी अक्टूबर से सितंबर के लिए चीनी उत्पादन का अनुमान पहले के 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन कर दिया गया है। इसके बावजूद यह उत्पादन देश की अनुमानित वार्षिक घरेलू मांग करीब 280 से 285 लाख टन से ज्यादा है।
वहीं, मिल स्तर पर चीनी की कीमतों में कुछ कमी आई है। महाराष्ट्र में एक्स-मिल कीमतें 18 अगस्त को 67 रुपये प्रति किलो के उच्चतम स्तर पर थीं, जो 30 प्रतिशत घटकर 1 सितंबर को 45-46 रुपये प्रति किलो हो गईं।
सरकार को उम्मीद है कि इस कदम के बाद खुदरा बाजार में भी चीनी की कीमतों में जल्द कमी देखने को मिलेगी।
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