2600 करोड़ के उज्जैन-गरोठ हाईवे का 500 मीटर हिस्सा फिर धंसा, NHAI ने दोबारा निर्माण के दिए निर्देश

HIGHLIGHTS
- प्रोजेक्ट पर करीब 2600 करोड़ रुपये की लागत आ रही है
- GHV कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है ROB का निर्माण
- इंजीनियर अमित राय ने वायरल तस्वीरों और वीडियो पर सवाल उठाए
करीब 2600 करोड़ रुपये की लागत से बन रहे उज्जैन-गरोठ फोरलेन हाईवे प्रोजेक्ट के निर्माण और गुणवत्ता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। प्रेमनगर स्थित रेलवे ओवर ब्रिज (ROB) की एप्रोच रोड और रिटेनिंग वॉल सात महीने के भीतर दूसरी बार क्षतिग्रस्त होकर ढह गई। इस मामले में निर्माण एजेंसी के इंजीनियर अमित राय ने सोशल मीडिया पर वायरल फोटो और वीडियो को AI जनरेटेड बताते हुए पुल के धंसने से इनकार किया है। वहीं, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) के प्रोजेक्ट डायरेक्टर शिवम शर्मा ने पुल निर्माण में तकनीकी खामियां सामने आने की बात स्वीकार की है। इसके बाद NHAI ने करीब 400 से 500 मीटर प्रभावित हिस्से को तोड़कर दोबारा बनाने के निर्देश दिए हैं।
इंजीनियर ने वायरल वीडियो को बताया AI जनरेटेड
प्रेमनगर ROB का निर्माण GHV कंस्ट्रक्शन कंपनी कर रही है। कंपनी के इंजीनियर अमित राय ने घटना पर कहा कि पुल कभी धंसा ही नहीं और सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे फोटो-वीडियो AI जनरेटेड हैं। हालांकि, स्थानीय निवासियों और प्रत्यक्षदर्शियों ने इस दावे को खारिज किया है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक, हाईवे सड़क से करीब 17 मीटर की ऊंचाई पर बनाया जा रहा है। निर्माण के दौरान बैकफिलिंग में लाल मिट्टी के इस्तेमाल और बारिश का पानी रिसने से मिट्टी के बहने का आरोप लगाया गया है।
क्षेत्रवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि सपोर्ट के लिए लगाए गए पेवर ब्लॉक और आरई (Reinforced Earth) वॉल ब्लॉक्स को सही तरीके से नहीं लगाया गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, पुल का हिस्सा कई जगह सीधा नजर आने के बजाय अंदर-बाहर की तरफ घुमावदार दिखाई दे रहा है। इसके अलावा कई स्थानों पर दरारें भी दिखाई दे रही हैं।
सात महीने में दूसरी बार क्षतिग्रस्त हुई दीवार
प्रेमनगर ROB की एप्रोच रोड में 13 फरवरी 2026 को पहली बार जमीन धंसने के कारण सड़क की सतह बैठ गई थी और रिटेनिंग वॉल को नुकसान पहुंचा था। इसके बाद NHAI ने GHV कंपनी का भुगतान रोक दिया था और प्रभावित हिस्से को दोबारा बनाने के निर्देश दिए थे।
कंपनी ने करीब चार महीने में काम पूरा कर जून 2026 में नई दीवार तैयार कर दी। लेकिन इसके करीब दो महीने बाद ही अगस्त 2026 में उसी दीवार के आरई ब्लॉक्स दोबारा खिसक गए। इसके साथ भरा हुआ मटेरियल बहने से एप्रोच का हिस्सा फिर से क्षतिग्रस्त हो गया।
IIT दिल्ली की जांच के बाद NHAI ने लिया निर्णय
मामले की गंभीरता को देखते हुए NHAI ने 22 अगस्त को IIT दिल्ली के विशेषज्ञों से साइट का तकनीकी निरीक्षण कराया। NHAI के प्रोजेक्ट डायरेक्टर शिवम शर्मा के अनुसार, तकनीकी जांच में पुल निर्माण से संबंधित खामियां सामने आई थीं।
उन्होंने बताया कि आगामी सिंहस्थ महाकुंभ के दौरान इस मार्ग पर भारी यातायात रहने की संभावना है। ऐसे में निर्माण में किसी भी तरह की कमी यात्रियों के लिए परेशानी का कारण बन सकती थी।
यात्रियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए करीब 400 से 500 मीटर के प्रभावित हिस्से को तोड़कर नए सिरे से बनाने का निर्णय लिया गया है। शिवम शर्मा के मुताबिक, दोबारा निर्माण का खर्च कन्सेशनायर यानी ठेकेदार कंपनी खुद वहन करेगी।
इस काम पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। नए सिरे से निर्माण पूरा करने का लक्ष्य मार्च 2027 रखा गया है।
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