श्रीकृष्ण पर मौलाना जर्जीस के बयान का मुस्लिम समाज ने किया विरोध, माफी की मांग

HIGHLIGHTS
- शाह इस्लामिक लाइब्रेरी के संस्थापक कारी मोहम्मद ख़ालिद क़ासमी ने प्रेसवार्ता कर अपनी प्रतिक्रिया दी।
- उन्होंने कहा कि आपत्तिजनक धार्मिक टिप्पणियां समाज में तनाव और आपसी विश्वास को प्रभावित करती हैं।
- उत्तर प्रदेश सरकार से मामले की निष्पक्ष जांच कर कानून के अनुसार कार्रवाई की मांग की गई।
मुजफ्फरनगर। श्रीकृष्ण को लेकर मौलाना जर्जीस के विवादित बयान पर अब मुस्लिम समाज के लोगों ने भी विरोध दर्ज कराया है। लोहिया बाजार स्थित शाह इस्लामिक लाइब्रेरी के संस्थापक कारी मोहम्मद ख़ालिद क़ासमी ने बुधवार दोपहर 3 बजे प्रेसवार्ता कर कथित बयान की निंदा की। उन्होंने कहा कि इस तरह के बयान से करोड़ों लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं।
कारी मोहम्मद ख़ालिद क़ासमी ने कहा कि किसी भी धर्म, देवी-देवता, महापुरुष या धार्मिक आस्था को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी करना न तो इस्लाम की शिक्षा का हिस्सा है और न ही भारत की गंगा-जमुनी संस्कृति के अनुरूप है। उन्होंने कहा कि ऐसे बयान समाज में तनाव और आपसी दूरी बढ़ाने का काम करते हैं, जिससे विभिन्न समुदायों के बीच विश्वास कमजोर होता है।
उन्होंने मौलाना जर्जीस अंसारी से अपने कथित बयान को सार्वजनिक रूप से वापस लेने और माफी मांगने की मांग की। कारी मोहम्मद ख़ालिद क़ासमी ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति समाज में धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने वाली भाषा का इस्तेमाल करता है तो उसे अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने लोगों से अपील की कि ऐसे बयानों को बढ़ावा न दें और सामाजिक स्तर पर इसका विरोध करें।
कारी मोहम्मद ख़ालिद क़ासमी ने उत्तर प्रदेश सरकार से मांग की कि यदि किसी बयान से धार्मिक भावनाएं आहत हुई हैं और कानून का उल्लंघन हुआ है तो मामले की निष्पक्ष जांच कर नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि कानून सभी के लिए समान होना चाहिए और किसी भी समुदाय के प्रति अपमानजनक टिप्पणी को स्वीकार नहीं किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि समाज और धर्म से जुड़े जिम्मेदार लोगों को ऐसे मामलों में समय रहते अपना स्पष्ट रुख रखना चाहिए। जिम्मेदार लोगों की चुप्पी का असर पूरे समाज की छवि पर पड़ता है। उन्होंने सभी धर्मों के लोगों से एक-दूसरे की आस्था का सम्मान करने और सामाजिक सौहार्द व भाईचारा बनाए रखने की अपील की।
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