मुजफ्फरनगर: धार्मिक स्थलों के ध्वस्तीकरण पर सपा का सवाल, कहा- कानूनी प्रक्रिया का मिले मौका

HIGHLIGHTS
- सपा प्रदेश सचिव विनोद सविता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर मुजफ्फरनगर पहुंचे।
- पार्टी कार्यालय में कार्यकर्ताओं ने विनोद सविता का स्वागत किया।
- विनोद सविता ने सैन समाज के लोगों से मुलाकात कर बातचीत की।
मुजफ्फरनगर में समाजवादी पार्टी के प्रदेश सचिव विनोद सविता के पार्टी कार्यालय पहुंचने पर कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे पर आए विनोद सविता ने सैन समाज के लोगों से मुलाकात कर बातचीत की। शाम करीब 6 बजे आयोजित प्रेस वार्ता में सपा जिला अध्यक्ष ज़िया चौधरी और महिला सभा की जिला अध्यक्ष पूजा अंबेडकर ने प्रदेश की मौजूदा स्थिति और सरकार की नीतियों को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए।
प्रेस वार्ता के दौरान सपा जिला अध्यक्ष ज़िया चौधरी ने बताया कि प्रदेश सचिव विनोद सविता पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दौरे के तहत मुजफ्फरनगर पहुंचे हैं। इस दौरान उन्होंने सैन समाज के लोगों से मुलाकात कर उनकी समस्याओं और राजनीतिक स्थिति को लेकर चर्चा की। इसके बाद पार्टी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
धार्मिक स्थलों और मस्जिदों के ध्वस्तीकरण को लेकर ज़िया चौधरी ने कहा कि किसी भी व्यक्ति का धार्मिक स्थल टूटने पर दुख होना स्वाभाविक है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार विकास कार्यों और एक्सप्रेस-वे में अनियमितताओं से जुड़े सवालों का जवाब नहीं दे पा रही है। उनका यह भी आरोप था कि चुनाव नजदीक आते ही धार्मिक ध्रुवीकरण का मुद्दा उठाया जा रहा है।
ज़िया चौधरी ने कहा कि जिन लोगों की संपत्ति या धार्मिक स्थल से जुड़ा मामला है, उन्हें कानूनी और न्यायिक सहायता का पूरा अवसर मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि किसी भी तरह की कार्रवाई कानून और न्यायिक प्रक्रिया के तहत ही की जानी चाहिए।
सपा महिला सभा की जिला अध्यक्ष पूजा अंबेडकर ने भी सरकार की नीतियों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव करीब आते ही पुरानी मस्जिदों के ध्वस्तीकरण जैसी कार्रवाइयों के जरिए धार्मिक राजनीति को बढ़ावा दिया जा रहा है। उन्होंने ऐसी कार्रवाई को गलत बताते हुए कहा कि प्रभावित लोगों को कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से अपना पक्ष रखने का अवसर मिलना चाहिए।
महिला सुरक्षा के मुद्दे पर पूजा अंबेडकर ने सरकार के ‘बेटी बचाओ’ से जुड़े दावों पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि बेटियों की सुरक्षा को लेकर किए जा रहे दावे जमीन पर नाकाम दिखाई दे रहे हैं।
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