केंद्रीय कर्मचारियों-पेंशनरों के DA में 3% बढ़ोतरी संभव, 60 से बढ़कर 63% हो सकता है महंगाई भत्ता

HIGHLIGHTS
- मौजूदा समय में केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को 60 फीसदी की दर से DA/DR मिल रहा है।
- जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 तक CPI-IW में लगातार बढ़ोतरी दर्ज हुई थी।
- जुलाई 2026 में सामान्य सूचकांक 153.2 पर पहुंच गया।
केंद्र सरकार के करीब 49 लाख कर्मचारियों और 69 लाख पेंशनरों के महंगाई भत्ते और महंगाई राहत यानी डीए/डीआर में तीन फीसदी की बढ़ोतरी होने की संभावना है। आने वाले दिनों में केंद्रीय कैबिनेट से मंजूरी मिलते ही सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को पहली जुलाई से इसका आर्थिक लाभ मिल सकता है। फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों को 60 फीसदी की दर से डीए/डीआर मिल रहा है। इसमें तीन फीसदी की वृद्धि होने पर यह दर बढ़कर 63 फीसदी हो जाएगी।
केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष एक जुलाई से कर्मचारियों और पेंशनरों के डीए/डीआर में तीन फीसदी का इजाफा किया था। इसके बाद डीए/डीआर की दर 58 फीसदी हो गई थी। वहीं, एक जनवरी 2026 से डीए/डीआर में दो फीसदी की बढ़ोतरी के बाद यह दर 58 से बढ़कर 60 प्रतिशत हो गई।
जुलाई 2025-दिसंबर 2025 के सूचकांक की स्थिति
ऑल इंडिया कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स फॉर इंडस्ट्रियल वर्कर्स के अनुसार जुलाई 2025 में सूचकांक 146.5, अगस्त में 147.1, सितंबर में 147.3, अक्टूबर में 147.7, नवंबर में 148.2 और दिसंबर में भी 148.2 पर रहा था।
जनवरी 2026-जुलाई 2026 के सूचकांक की स्थिति
श्रम ब्यूरो के मुताबिक, इस वर्ष जनवरी में अखिल भारतीय सीपीआई-आईडब्ल्यू यानी औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक 148.6 रहा। फरवरी में यह 148.5, मार्च में 149.1, अप्रैल में 149.9, मई में 150.8, जून में 151.9 और जुलाई में 153.2 दर्ज किया गया।
जून 2026 में महंगाई दर 4.76 फीसदी रही, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में यह दर 2.55 फीसदी थी। श्रम ब्यूरो हर महीने औद्योगिक श्रमिकों के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार करता है। इसके लिए देशभर के 88 महत्वपूर्ण औद्योगिक केंद्रों के 317 बाजारों से जुटाए गए खुदरा मूल्यों का इस्तेमाल किया जाता है।
अखिल-भारत समूह-वार सूचकांक: जून-जुलाई 2026
| समूह | जून | जुलाई |
|---|---|---|
| खाद्य एवं पेय | 157.1 | 158.9 |
| पान, सुपारी, तंबाकू एवं नशीले पदार्थ | 176.8 | 176.9 |
| कपड़े एवं जूते | 157.6 | 158.0 |
| आवास | 140.6 | 143.0 |
| ईंधन एवं प्रकाश | 159.2 | 159.9 |
| विविध | 148.0 | 148.2 |
| सामान्य सूचकांक | 151.9 | 153.2 |
इस बाबत वित्त राज्य मंत्री की दो टूक
आमतौर पर सरकार दो-तीन महीने की देरी के बाद यानी होली और दिवाली के अवसर पर डीए/डीआर की घोषणा करती है। जब डीए/डीआर की दर 50 फीसदी से अधिक हो जाती है तो नियम के अनुसार इसे मूल वेतन और पेंशन में मर्ज किया जाना चाहिए। हालांकि वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी संसद में स्पष्ट कर चुके हैं कि सरकार ऐसा कोई विलय नहीं करेगी।
नेशनल मिशन फॉर ओल्ड पेंशन स्कीम भारत के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल का कहना है कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उनके अनुसार, सरकार पहले ही कर्मचारियों का हर महीने दस प्रतिशत पैसा बचा रही है। पिछले दो वर्षों से कर्मचारियों के वेतन और पेंशन में दस प्रतिशत के हिसाब से कटौती हो रही है। आठवें वेतन आयोग के लागू होने की उम्मीद भी दो साल बाद ही की जा सकती है। ऐसे में कर्मचारियों को चार साल तक हर महीने दस प्रतिशत वेतन का नुकसान उठाना पड़ रहा है।
डीए को बेसिक वेतन में मर्ज नहीं किया गया
एक जनवरी 2024 को डीए 50 प्रतिशत हो गया था। इसके बावजूद इसे मूल वेतन में मर्ज नहीं किया गया। आठवें वेतन आयोग की सिफारिशें भी दो साल बाद ही लागू हो सकेंगी। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स ने कैबिनेट सचिव को पत्र लिखकर महंगाई भत्ता/महंगाई राहत यानी डीए/डीआर की गणना का कैलकुलेटर बदलने की मांग की थी।
डीए की दर निर्धारित करने के लिए 12 महीने के औसत की जगह तीन महीने के औसत को आधार बनाने की मांग की गई है। यानी कर्मचारियों को परिवर्तनीय डीए दिया जाए। इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों को हर तीन महीने में वास्तविक मूल्य वृद्धि के आधार पर मुआवजा मिल सकेगा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों का डीए भी इसी आधार पर तय होता है।
कर्मियों और पेंशनरों के लिए अलग से हो सूचकांक
इसके अलावा केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनरों के लिए अलग से उपभोक्ता मूल्य सूचकांक तैयार करने की मांग भी की गई है। कॉन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गवर्नमेंट एम्प्लाइज एंड वर्कर्स के अध्यक्ष एसबी यादव के अनुसार, बैंकिंग कर्मचारियों का डीए हर साल प्रत्येक तिमाही यानी फरवरी-अप्रैल, मई-जुलाई, अगस्त-अक्टूबर और नवंबर-जनवरी में संशोधित किया जाता है। यदि जनवरी में कीमतों में बढ़ोतरी होती है तो उसकी आंशिक भरपाई 12 महीने बाद की जाती है।
हर तीन महीने में हो गणना और भुगतान
डीए की गणना और भुगतान छह महीने की बजाय हर तीन महीने में किया जाना चाहिए। इसके साथ ही पॉइंट-टू-पॉइंट डीए देने की मांग की गई है। फिलहाल डीए को न्यूनतम मूल्य पर राउंड ऑफ किया जाता है। उदाहरण के तौर पर, यदि 42.90 फीसदी डीए के लिए पात्रता बनती है तो केवल 42 फीसदी डीए मंजूर किया जाता है। ऐसे में 0.9 फीसदी डीए से केंद्रीय कर्मचारी छह महीने तक वंचित रहते हैं।
केंद्र सरकार के कर्मचारियों को प्वाइंट-टू-प्वाइंट डीए दिया जाना चाहिए। बैंकों और एलआईसी के कर्मचारियों को प्वाइंट-टू-प्वाइंट डीए मिलता है।
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