दिल्ली सत्य निकेतन हादसा: PG मालिक के खिलाफ FIR दर्ज, CM ने दिए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश; रेस्क्यू जारी

HIGHLIGHTS
- सत्य निकेतन में रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे अचानक ढही इमारत
- मलबे से अब तक 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया
- हादसे में चार लोगों की मौके पर मौत, एक घायल ने इलाज के दौरान दम तोड़ा
दिल्ली यूनिवर्सिटी (डीयू) के दक्षिणी परिसर के नजदीक सत्य निकेतन की एक संकरी गली में रविवार को करीब 50 साल पुरानी पांच मंजिला इमारत भरभराकर गिर गई। हादसे के बाद अब तक कुल 10 लोगों को रेस्क्यू किया जा चुका है, जिनमें से 5 की मौत हो गई है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, हादसे के वक्त इमारत के भीतर 30 से 50 लोग मौजूद हो सकते थे। हालांकि, अधिकारियों की ओर से मलबे में फंसे लोगों की संख्या को लेकर कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है। इस बीच दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सत्य निकेतन में इमारत गिरने की घटना की मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए हैं।
इस घटना को लेकर थाना साउथ कैंपस में FIR संख्या 153/26 दर्ज की गई है। पुलिस ने BNS की धारा 105/290/125(a) के तहत कथित मालिक हरिराम और अन्य के खिलाफ मामला दर्ज किया है। बताया जा रहा है कि इस इमारत में पीजी संचालित किया जा रहा था। आरोप है कि ग्राउंड फ्लोर पर मरम्मत और नवीनीकरण का काम चल रहा था, इसी दौरान इमारत ढह गई।
जांच के लिए पुलिस की कई टीमें गठित
आरोपियों की तलाश के लिए पुलिस ने कई टीमों का गठन किया है। अब तक 10 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा चुका है। वहीं घटनास्थल पर चार लोगों को मृत घोषित किया गया, जबकि एक घायल व्यक्ति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। घटनास्थल पर राहत और बचाव अभियान लगातार जारी है।
पेइंग गेस्ट के रूप में हो रहा था इस्तेमाल
इमारत में एक बेसमेंट के साथ ऊपर पांच मंजिलें थीं। एक अधिकारी के अनुसार, इसका इस्तेमाल पेइंग गेस्ट (पीजी) के तौर पर किया जा रहा था। हादसे के समय बेसमेंट में मरम्मत का काम चल रहा था और करीब 1:30 बजे दोपहर इमारत अचानक ढह गई। इमारत के मलबे की चपेट में कई वाहन भी आ गए।
स्थानीय लोगों का दावा है कि पिछले कुछ दिनों से लगातार बारिश के कारण बेसमेंट में पानी जमा हो रहा था। उनका कहना है कि पानी जमा होने से इमारत की नींव कमजोर हो गई थी और इसी वजह से यह हादसा हुआ।
मलबे में फंसे लोगों की तलाश जारी
दिल्ली में शुक्रवार से अच्छी खासी बारिश हुई है। एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि यह इमारत लगभग 50 वर्ष पुरानी थी। मलबे में जीवित बचे लोगों की तलाश के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की दो टीमें मौके पर हैं। इन टीमों में 70 कर्मी शामिल हैं। इसके अलावा एक श्वान दस्ता भी तलाशी अभियान में लगाया गया है।
एनडीआरएफ के एक अधिकारी के मुताबिक, मलबे में फंसे लोगों को सांस लेने में मदद देने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर भी नीचे पहुंचाए गए हैं। घटनास्थल पर दमकल की गाड़ियां भी तैनात हैं।
कई राज्यों के छात्रों की रहती है मौजूदगी
संकरी और भीड़भाड़ वाली गलियों वाले इस इलाके में कई छात्रावास और भोजनालय हैं। यहां इमारतें एक-दूसरे के काफी नजदीक बनी हैं और बड़ी संख्या में छात्रों की मौजूदगी के कारण आवाजाही के लिए अक्सर बेहद कम जगह बचती है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में रहने वाले ज्यादातर छात्र केरलम, हरियाणा और उत्तर प्रदेश से हैं और आसपास के कॉलेजों में पढ़ाई करते हैं। जब बचाव दल मलबा हटाकर राहत और बचाव अभियान में जुटा था, तब स्थानीय लोग और प्रत्यक्षदर्शी भी इस मुश्किल काम में उनके साथ जुट गए। उन्होंने अपने हाथों और उपलब्ध औजारों की मदद से मलबे में दबे लोगों की तलाश शुरू की।
मुख्यमंत्री समेत कई अधिकारी मौके पर पहुंचे
हादसे के बाद दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू, पुलिस आयुक्त अनुराग कुमार और सांसद बांसुरी स्वराज तत्काल घटनास्थल पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने हादसे में लोगों की मौत पर दुख जताया। उन्होंने बताया कि जमीनी स्थिति की जानकारी लेने के लिए उन्होंने मुख्यमंत्री, पुलिस आयुक्त और राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) के महानिदेशक से बातचीत की।
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