मुजफ्फरनगर से फरीदाबाद तक ED की रेड, GST चोरी मामले में 3.80 करोड़ कैश बरामद

HIGHLIGHTS
- कार्रवाई करीब 24 घंटे बाद मंगलवार सुबह समाप्त हुई
- फर्जी बिलिंग से जुड़े दस्तावेज भी जांच एजेंसी को मिले
- जांच में 27.02 करोड़ रुपये के सरकारी नुकसान का दावा
जीएसटी चोरी के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने छापेमारी के दौरान सभी ठिकानों से करीब 3.80 करोड़ रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा कई ऐसे संदिग्ध दस्तावेज भी मिले हैं, जो लंबे समय से फर्जी बिलिंग के जरिए जीएसटी चोरी से जुड़े हैं। ईडी की छापेमारी की कार्रवाई करीब 24 घंटे बाद मंगलवार सुबह समाप्त हुई। अब सभी आरोपियों को सितंबर के पहले सप्ताह में समन भेजकर पूछताछ के लिए बुलाया जाएगा।
ईडी ने सोमवार को मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद और फरीदाबाद में आरोपियों के 11 ठिकानों पर छापेमारी की थी। इनमें मुख्य रूप से पूर्व बसपा एमएलसी शाहनवाज राणा और उनके करीबी परिजन, स्टील कारोबारी, चार्टर्ड अकाउंटेंट आदि शामिल थे। ईडी ने शाहनवाज राणा समेत अन्य लोगों के खिलाफ वर्ष 2024 में जीएसटी छापे में सामने आई टैक्स चोरी और एफआईआर के आधार पर कार्रवाई की है।
27.02 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ
जांच में सामने आया कि बिना कोई सामान खरीदे फर्जी बिल जारी कर फर्जी 'इनपुट टैक्स क्रेडिट' लिया गया और उसे आगे बढ़ाया गया। इससे सरकारी खजाने को 27.02 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। कंपनी ने फर्जी आईटीसी हासिल करने और सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचाने के इरादे से पहले से योजना बनाकर जाली बिल्टी यानी ट्रांसपोर्ट रसीदें तैयार की थीं।
वहीं, कंपनी ने वित्तीय वर्ष 2018-19 के दौरान अस्तित्वहीन और फर्जी कंपनियों की एक चेन के जरिए करीब 10.28 करोड़ रुपये का फर्जी आईटीसी लिया और आगे बढ़ाया। इसका लाभ उठाने वाली फर्मों से मिले पैसे को उसी दिन इसी तरह की फर्जी कंपनियों में ट्रांसफर कर दिया गया।
इसके बाद कई खातों के जरिए रकम को डायवर्ट करने के बाद आखिर में नकद निकाल लिया गया। छापेमारी के दौरान ईडी ने दस्तावेजों का विश्लेषण करने के साथ आरोपियों के बयान भी दर्ज किए। इससे सामने आया कि फर्जी आईटीसी का नेटवर्क ऐसी कई अन्य यूनिट्स तक फैला हुआ है। ईडी बरामद दस्तावेजों और डिजिटल डिवाइस की गहनता से जांच कर रहा है।
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