नेपाल में अचानक आई बाढ़ से 32 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित, 1344 की मौत

HIGHLIGHTS
- नेपाल में अचानक आई बाढ़ से 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं।
- बाढ़ में मरने वालों की संख्या बढ़कर 1344 हो गई है।
- करीब 55 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुई हैं।
नेपाल में अचानक आई बाढ़ के कारण 32 हजार से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। बाढ़ से सड़कें, पुल, स्कूल और स्वास्थ्य केंद्र क्षतिग्रस्त हुए हैं। सरकार की ओर से शुक्रवार को जारी शुरुआती रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई है।
राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण और प्रबंधन प्राधिकरण यानी एनडीआरआरएमए ने यह रिपोर्ट तैयार की है। प्राधिकरण ने शुक्रवार को आयोजित प्रेस वार्ता में रिपोर्ट जारी की।
बाढ़ में मरने वालों की संख्या कितनी हुई?
अचानक आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या शुक्रवार को बढ़कर 1344 हो गई। प्रभावित क्षेत्रों से और शव मिलने के बाद मृतकों की संख्या में इजाफा हुआ है।
नेपाल में इतनी तबाही कैसे हुई?
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत सीमा के पास बर्फ और चट्टानों का एक बड़ा हिस्सा अचानक नीचे आ गया था। इसके बाद अचानक बाढ़ आ गई। बाढ़ ने नेपाल के उत्तरी और मध्य हिस्सों के शहरों और गांवों में भारी तबाही मचाई।
कई क्षेत्रों में बाढ़ के बाद तबाही का बड़ा मंजर देखने को मिला। सरकार की शुरुआती रिपोर्ट के अनुसार, 32,933 लोग प्रभावित हुए हैं। शिक्षण संस्थानों को हुए नुकसान के कारण 6,500 से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं।
कितने अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्रों को नुकसान?
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में चार स्वास्थ्य केंद्र पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए हैं। वहीं, तीन अन्य स्वास्थ्य केंद्रों को आंशिक नुकसान पहुंचा है।
कितनी सड़कें और पुल टूटे?
करीब 55 किलोमीटर सड़कें पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं। इन सड़कों पर वाहनों की आवाजाही होती थी। इसके अलावा 37 ऐसे पुल पूरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिनसे वाहनों का आवागमन होता था।
वहीं, 68 झूला पुल भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। हालांकि, नुकसान का विस्तृत आकलन अभी पूरा नहीं हुआ है।
सरकार पर क्या आरोप लगा?
इस बीच नेपाली कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अर्जुन नरसिंह केसी ने सरकार की आलोचना की है। उन्होंने बचाव और राहत अभियान के बीच तालमेल की कमी का आरोप लगाया। केसी प्रतिनिधि सभा के सदस्य हैं।
उन्होंने कहा कि बचाव और राहत कार्यों में गंभीर स्तर पर तालमेल की कमी रही। उन्होंने लंबे समय की योजना में भी कमी होने की बात कही। हालांकि, उन्होंने नेपाल सेना, नेपाल पुलिस और सशस्त्र पुलिस बल की भूमिका की सराहना की।
केसी ने कहा कि इन बलों ने खोज और बचाव अभियान में अहम भूमिका निभाई।
बाढ़ से कितना नुकसान होने का दावा?
केसी ने दावा किया कि इस आपदा से 800 अरब रुपये से अधिक का नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार की भी आलोचना की। उन्होंने कहा कि आपदा के बाद जरूरतों का आकलन करने के लिए सरकार ने तेजी से कदम नहीं उठाए।
राहत के लिए क्या मांग की गई?
केसी ने सरकार से सभी दलों को शामिल करते हुए एक व्यवस्था बनाने की मांग की। उन्होंने कहा कि इससे राहत सामग्री का वितरण अधिक प्रभावी तरीके से किया जा सकेगा और सभी लोगों को साथ लेकर राहत कार्य किया जा सकेगा।
उन्होंने राहत और पुनर्वास कार्यों की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय संसदीय समिति गठित करने की भी मांग की।
नेपाल ने जलवायु न्याय की मांग क्यों की?
केसी ने सरकार से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जलवायु न्याय का मुद्दा उठाने की अपील की। उन्होंने कहा कि नेपाल जैसे देशों को मुआवजा दिलाने की कोशिश की जानी चाहिए। ऐसे देश जलवायु परिवर्तन के प्रभावों के प्रति अधिक संवेदनशील हैं।
केसी ने संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस की पहले की चेतावनियों का भी जिक्र किया। गुटेरेस ने नेपाल पर जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को लेकर चेतावनी दी थी।
केसी ने कहा कि इस आपदा ने एक बार फिर जलवायु अन्याय के मुद्दे को सामने ला दिया है।
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