'इस्तीफा नहीं, कड़ी सजा मिले': राम मंदिर ट्रस्ट के फैसले पर विपक्ष का हमला
By News Desk — July 6, 2026

HIGHLIGHTS
- राम मंदिर ट्रस्ट ने चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए, जिसके बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं।
- कांग्रेस, आम आदमी पार्टी, शिवसेना (यूबीटी) और समाजवादी पार्टी ने मामले की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच की मांग उठाई।
- विपक्षी नेताओं का कहना है कि केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं है, बल्कि पूरे प्रकरण में जवाबदेही तय कर सच्चाई सामने लाई जानी चाहिए।
Author: — Dainik Dehat
चंदा विवाद को लेकर बढ़े राजनीतिक घमासान के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठक में महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए गए। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने इसकी आधिकारिक जानकारी दी। हालांकि, इस फैसले के बाद विपक्षी दलों ने ट्रस्ट और सरकार पर कई सवाल खड़े करते हुए मामले की स्वतंत्र जांच की मांग तेज कर दी है।
कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने सोशल मीडिया पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि इस्तीफों की स्वीकृति से उन आरोपों को बल मिलता है, जिन पर पिछले कुछ समय से चर्चा हो रही थी। उन्होंने कहा कि केवल पद छोड़ने से जवाबदेही खत्म नहीं हो जाती और ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े सभी पक्षों की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। खेड़ा ने यह भी सवाल उठाया कि यदि वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं तो उनकी निगरानी के लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
कांग्रेस नेता ने ट्रस्ट में नए महासचिव की नियुक्ति पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि आरोपों से जुड़े किसी भी व्यक्ति की भूमिका की जांच होनी चाहिए। उन्होंने ट्रस्ट के पुनर्गठन और मामले की स्वतंत्र एजेंसी से न्यायिक निगरानी में जांच कराने की मांग दोहराई।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने कहा कि यदि किसी तरह की गड़बड़ी हुई है तो केवल इस्तीफा पर्याप्त नहीं माना जा सकता। उन्होंने दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि लोगों की आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होनी चाहिए।
शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के नेता आदित्य ठाकरे ने भी मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि आरोपों की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। उनका कहना था कि पूरे प्रकरण की सच्चाई सामने लाने के लिए जांच किसी स्वतंत्र संस्था या न्यायिक निगरानी में कराई जानी चाहिए।
वहीं, समाजवादी पार्टी के विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि मामले के सामने आने के बाद ट्रस्ट की ओर से प्रतिक्रिया आने में काफी समय लगा। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की जांच किसी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश की निगरानी में कराई जाए, ताकि तथ्यों की निष्पक्ष पड़ताल हो सके और जिम्मेदार लोगों की पहचान हो पाए।
इस्तीफों के बाद अब राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े इस विवाद पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। विपक्ष जहां स्वतंत्र जांच और जवाबदेही की मांग कर रहा है, वहीं ट्रस्ट की ओर से लिए गए फैसलों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।
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