असम में 91 हजार से ज्यादा डी-वोटर, विधानसभा में मुख्यमंत्री हिमंत सरमा ने दी जानकारी

HIGHLIGHTS
- असम विधानसभा में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि मतदाता सूची में 91,385 लोग ‘डी-वोटर’ यानी संदिग्ध मतदाता के रूप में दर्ज हैं।
- सरकार के अनुसार, डी-वोटर से जुड़े मामलों में विदेशी न्यायाधिकरणों ने 56,728 लोगों को विदेशी और 65,171 लोगों को भारतीय नागरिक घोषित किया है।
- मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले दो वर्षों में असम से 1,679 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेजा गया है।
गुवाहाटी। असम की मतदाता सूची में इस समय 91,385 लोगों को ‘संदिग्ध मतदाता’ यानी डी-वोटर के रूप में दर्ज किया गया है। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने सोमवार को विधानसभा में यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि राज्य में नागरिकता को लेकर संदेह वाले मतदाताओं की पहचान की प्रक्रिया वर्ष 1997 से जारी है।
कांग्रेस विधायक नुरुल इस्लाम के सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि सोनितपुर जिले में सबसे अधिक 13,719 डी-वोटर हैं। इसके बाद बारपेटा में 8,081 और उदलगुड़ी व नगांव जिलों में 7,800 से अधिक संदिग्ध मतदाता दर्ज हैं।
कई मामलों में विदेशी न्यायाधिकरण ने दिए फैसले
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में बताया कि डी-वोटर से जुड़े मामलों को विदेशी न्यायाधिकरणों के पास भेजा जाता है। अब तक 2,44,144 ऐसे मामले न्यायाधिकरणों में भेजे गए, जिनमें से 2,05,659 मामलों का निपटारा हो चुका है।
उन्होंने बताया कि 56,728 लोगों को विदेशी न्यायाधिकरणों ने विदेशी घोषित किया है, जबकि 65,171 लोगों को भारतीय नागरिक माना गया है। इसके अलावा गुवाहाटी हाईकोर्ट ने 42 और सुप्रीम कोर्ट ने तीन डी-वोटर को भारतीय नागरिकता के योग्य माना है।
1997 में शुरू हुई थी डी-वोटर व्यवस्था
हिमंत बिस्व सरमा ने बताया कि चुनाव आयोग के निर्देश पर वर्ष 1997 में असम में डी-वोटर की व्यवस्था लागू की गई थी। इसके तहत उन लोगों को संदिग्ध मतदाता के रूप में चिन्हित किया गया, जो अपनी नागरिकता साबित करने के लिए पर्याप्त दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर पाए थे।
डी-वोटर का दर्जा हटाने या सामान्य मतदाता स्थिति बहाल करने का फैसला विदेशी न्यायाधिकरण और उच्च न्यायालयों के आदेशों के आधार पर किया जाता है।
1,679 अवैध प्रवासियों को भेजा गया वापस
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में यह भी बताया कि पिछले दो वर्षों में असम से 1,679 अवैध प्रवासियों को बांग्लादेश वापस भेजा गया है। यह कार्रवाई 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 के बीच की गई।
उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों की पहचान के बाद उन्हें निर्वासन और वापसी की प्रक्रिया के तहत भेजा गया। जिन मामलों में किसी व्यक्ति की अपील हाईकोर्ट या सुप्रीम कोर्ट में लंबित होती है, उनमें अंतिम निर्णय तक कार्रवाई नहीं की जाती।
कानूनी प्रक्रिया के तहत होती है कार्रवाई
मुख्यमंत्री ने कहा कि नागरिकता से जुड़े मामलों में राज्य सरकार केंद्र सरकार के दिशा-निर्देशों और मौजूदा कानूनों के अनुसार काम करती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी कार्रवाई में मानवाधिकारों की सुरक्षा के लिए जरूरी प्रावधानों का पालन किया जाता है।
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