स्टील पर कार्बन कर और आयात शुल्क को लेकर यूरोपीय संघ पर बरसे पीयूष गोयल

HIGHLIGHTS
- गोयल के मुताबिक, भारत वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में केवल 3 से 3.5 फीसदी योगदान देता है।
- भारत और जर्मनी के बीच मौजूदा 31 अरब यूरो के व्यापार को बढ़ाकर 310 अरब यूरो करने का लक्ष्य रखा गया।
- जर्मनी की ऊर्जा मंत्री कैथरीना राइशे ने दोनों देशों के बीच लालफीताशाही कम करने और संयुक्त उपक्रमों को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
स्टील पर कार्बन कर और 50 फीसदी आयात शुल्क लगाकर यूरोपीय संघ अपनी मुश्किलें बढ़ा रहा है। इससे यूरोप में रहन-सहन महंगा हो सकता है और वहां के उद्योग वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा करने में कमजोर पड़ सकते हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने बर्लिन ग्लोबल डायलॉग में यह चेतावनी दी। उन्होंने कहा कि जिन खुली सीमाओं और नीतियों के सहारे यूरोप ने विकास किया, अब उन्हीं के बीच नियमों और पाबंदियों का जाल बिछाकर वह अपने लिए मुश्किलें खड़ी कर रहा है।
गोयल ने कहा कि यूरोपीय संघ ने कार्बन सीमा समायोजन व्यवस्था यानी सीबीएएम लागू की है और स्टील के आयात पर 50 फीसदी शुल्क लगाया है। कुछ क्षेत्रों को संरक्षण देने के लिए कई बार ऐसे मानक बनाए जा रहे हैं, जिनसे उद्योगों पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और दूसरे देशों के लिए गैर-शुल्क बाधाएं पैदा होती हैं।
आप एक नियम बनाएंगे, तो जवाब में दो नियम आएंगे
गोयल ने चेताया कि दुनिया अब जैसे को तैसा की नीति की ओर बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि दुनिया के बड़े नेता भी इस बात को कह रहे हैं। अगर कोई देश नियम बनाकर दूसरे देश को अपने साथ व्यापार करने से रोकने की कोशिश करेगा, तो जवाब में दूसरा देश दो नियम लागू कर सकता है। इसका परिणाम यूरोप में बढ़ती महंगाई और कारोबार की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता में कमी के रूप में सामने आ सकता है।
भारत का पक्ष रखते हुए गोयल ने कहा कि दुनिया की 17 फीसदी आबादी भारत में रहती है, लेकिन वैश्विक कार्बन उत्सर्जन में देश की हिस्सेदारी केवल तीन से साढ़े तीन फीसदी है।
उन्होंने कहा कि भारत सभी साझेदार देशों के साथ निष्पक्ष और संतुलित समझौते कर रहा है। भारत सिंगापुर जैसे देशों के साथ भी व्यापार करेगा, जहां इस तरह की पाबंदियां नहीं हैं। भारत कई मौकों पर इन नियमों पर अपनी आपत्ति जता चुका है।
अनुमान के मुताबिक, कार्बन कर के कारण यूरोप को निर्यात किए जाने वाले भारतीय स्टील, एल्युमिनियम और सीमेंट पर 20 से 35 फीसदी तक अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है। वहीं, वन कटाई से जुड़े नियमों के तहत रबड़ जैसे क्षेत्रों के निर्यातकों को भी कड़ी शर्तों का सामना करना पड़ता है।
31 अरब यूरो के व्यापार को 310 अरब यूरो तक ले जाने का लक्ष्य
पीयूष गोयल ने चेतावनी के साथ भारत और जर्मनी के व्यापारिक रिश्तों को विस्तार देने की संभावना भी रखी। भारत-जर्मनी कारोबारी मंच पर उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच 31 अरब यूरो का व्यापार होता है। इस आंकड़े के आगे एक शून्य जोड़ने पर यह 310 अरब यूरो हो जाएगा। उन्होंने कहा कि इस लक्ष्य को हासिल करने की समयसीमा उद्योग जगत तय करे।
इस दौरान ऊर्जा मंत्री कैथरीना राइशे ने भी अफसरशाही के बोझ को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि दोनों देशों के रिश्तों को गति देने के लिए लालफीताशाही खत्म करनी होगी। साथ ही, संयुक्त उपक्रमों पर अधिक जोर देने की जरूरत है। मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों के संबंधों के लिए मजबूत आधार बनेगा। उन्होंने यह भी कहा कि जर्मनी भारतीय उद्यमियों का स्वागत करता है।
20 साल में पूरी हुई बातचीत, पिछले 13 महीनों में हुआ असली काम
भारत और यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते पर कैथरीना राइशे ने कहा कि इसे पूरा होने में करीब 20 साल लग गए, लेकिन अब इंतजार खत्म हो गया है।
इस पर पीयूष गोयल ने मुस्कुराते हुए कहा कि बातचीत भले ही 20 साल तक चली हो, लेकिन वास्तविक काम पिछले 13 महीनों में हुआ। गोयल ने बताया कि 27 जनवरी को समझौता पूरा होने की घोषणा की गई थी और यूरोपीय संघ के सभी 27 देशों ने सर्वसम्मति से इसका समर्थन किया।
उन्होंने उम्मीद जताई कि समझौते पर इसी साल हस्ताक्षर हो जाएंगे और अगले चार से पांच महीनों में इसे लागू किया जा सकता है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.


























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.