PM मोदी का वीडियो हटाने पर मेटा पर भड़के निशिकांत दुबे, बोले- जुकरबर्ग माफी मांगें

HIGHLIGHTS
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने पर भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने Meta पर गंभीर सवाल उठाए।
- दुबे ने मार्क जुकरबर्ग से सार्वजनिक माफी की मांग की और सेफ हार्बर संरक्षण पर पुनर्विचार की बात कही।
- Meta, YouTube और X के एल्गोरिद्म की पारदर्शिता पर भी सवाल उठाते हुए उन्होंने संसदीय समिति की चिंताओं को सामने रखा।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का वीडियो फेसबुक से हटाए जाने का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। संसदीय संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी संबंधी स्थायी समिति की बैठक के बाद समिति के अध्यक्ष और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने मेटा (Meta) पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया जाना बेहद गंभीर विषय है और यह देश को अस्थिर करने की कोशिश जैसा प्रतीत होता है। उन्होंने मांग की कि मेटा प्रमुख मार्क जुकरबर्ग इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगें।
'यह पहली बार नहीं है'
बैठक के बाद पत्रकारों से बातचीत में निशिकांत दुबे ने कहा कि Meta India ने प्रधानमंत्री का कंटेंट हटाया, जबकि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जनवरी 2024 के चुनावों को लेकर भी मार्क जुकरबर्ग ने एक बयान दिया था, जिसके बाद उन्हें माफी मांगनी पड़ी थी। दुबे ने कहा कि जब भारत के प्रधानमंत्री का वीडियो हटाया जा सकता है और कंपनी स्वयं यह स्वीकार करती है कि कंटेंट रात 12:30 बजे से सुबह 5 बजे तक उपलब्ध नहीं था, तो यह बेहद गंभीर मामला है।
'जुकरबर्ग माफी मांगें, नहीं तो सेफ हार्बर पर हो विचार'
भाजपा सांसद ने कहा कि संसदीय समिति की ओर से दो प्रमुख बातें सामने रखी गई हैं। पहली, मार्क जुकरबर्ग इस मामले में सार्वजनिक रूप से माफी मांगें। दूसरी, यदि ऐसा नहीं होता है तो मेटा को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 79 के तहत मिलने वाले 'सेफ हार्बर' संरक्षण को वापस लेने पर विचार किया जाना चाहिए। यह प्रावधान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को कुछ परिस्थितियों में यूजर द्वारा पोस्ट किए गए कंटेंट के लिए सीमित कानूनी सुरक्षा प्रदान करता है।
Meta, YouTube और X के एल्गोरिद्म पर भी उठाए सवाल
निशिकांत दुबे ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के एल्गोरिद्म को लेकर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश को यह जानने का अधिकार है कि Meta, X और YouTube का एल्गोरिद्म किस प्रकार काम करता है। उनके अनुसार, कई ऐसे समूह जिन्हें न तो राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत किया गया है और न ही गैर-सरकारी संगठन (NGO) के रूप में, उन्हें प्रमुख राजनीतिक दलों की तुलना में अधिक पहुंच मिल रही है। उन्होंने दावा किया कि हाल ही में बने एक आरक्षण विरोधी मंच को कुछ ही दिनों में लाखों व्यूज मिले, जबकि बड़े राजनीतिक दलों की पहुंच उससे कम रही।
CSAM और महिलाओं से जुड़े कंटेंट पर भी लगाए आरोप
भाजपा सांसद ने आरोप लगाया कि Meta और YouTube बाल यौन शोषण सामग्री (CSAM) और महिलाओं से जुड़े आपत्तिजनक कंटेंट को हटाने के मामले में पर्याप्त कार्रवाई नहीं करते। उन्होंने कहा कि इस संबंध में भारत सरकार के नियम सख्त हैं, लेकिन उनके अनुसार संबंधित कंपनियां गृह मंत्रालय और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निर्देशों का पालन नहीं कर रही हैं। उन्होंने तेलंगाना में Meta India के खिलाफ दर्ज एफआईआर का भी उल्लेख किया। हालांकि, निशिकांत दुबे के इन आरोपों पर मेटा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।
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