12 साल में मंत्रियों के बंगलों पर ₹547 करोड़ खर्च, CJP ने उठाए सवाल तो BJP ने दिया जवाब

HIGHLIGHTS
- 2014-15 में सरकारी बंगलों के रखरखाव पर करीब ₹27 करोड़ खर्च हुए थे।
- 2025-26 में यह खर्च बढ़कर रिकॉर्ड ₹92 करोड़ पहुंच गया।
- आरटीआई से मिली जानकारी के आधार पर पार्टी ने आंकड़े सामने रखे।
कॉकरोच जनता पार्टी ने लुटियंस दिल्ली में केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी बंगलों के रखरखाव पर होने वाले खर्च को लेकर सवाल खड़े किए हैं। पार्टी का कहना है कि मंत्रियों के आलीशान सरकारी आवासों के रखरखाव पर खर्च की जा रही रकम का इस्तेमाल सरकारी स्कूलों की बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने में किया जा सकता था। सूचना के अधिकार से मिली जानकारी के आधार पर सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, पिछले 12 वर्षों में केंद्रीय मंत्रियों के आवासों के रखरखाव पर कुल ₹547.68 करोड़ खर्च किए गए हैं।
2025-26 में ₹92 करोड़ खर्च
यह मामला पीटीआई की एक रिपोर्ट सामने आने के बाद चर्चा में आया, जिसमें बताया गया कि केंद्रीय मंत्रियों के सरकारी आवासों के रखरखाव पर सालाना खर्च 2014-15 में करीब ₹27 करोड़ था। 2025-26 में यह रकम बढ़कर रिकॉर्ड ₹92 करोड़ हो गई। इन आंकड़ों को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी ने सरकार पर निशाना साधते हुए सवाल किया कि जब सरकारी स्कूलों में अभी भी बुनियादी सुविधाओं की कमी है, तो इतनी बड़ी रकम मंत्रियों के बंगलों के रखरखाव पर क्यों खर्च की जा रही है।
'शानदार बंगलों को ठीक करना बंद करो'
कॉकरोच जनता पार्टी ने एक्स पर पोस्ट कर अपनी नाराजगी जाहिर की। पार्टी ने लिखा कि अपने शानदार बंगलों को ठीक करना बंद करो और स्कूलों को ठीक करो! ₹92 करोड़ = 10 नए विश्वस्तरीय सरकारी स्कूल। पैसा तो है, लेकिन इसे सरकारी स्कूलों पर खर्च करने की इच्छाशक्ति की कमी है।
पार्टी ने इन आंकड़ों को सूचना के अधिकार के तहत मिली जानकारी पर आधारित बताया। उसके मुताबिक, 2014 से 2019 के बीच मंत्रियों के बंगलों के रखरखाव पर ₹133.9 करोड़ खर्च हुए। 2019 से 2024 के बीच यह खर्च बढ़कर ₹250 करोड़ और 2024 से 2026 के बीच ₹174.5 करोड़ रहा। 12 साल की अवधि में कुल खर्च ₹547.68 करोड़ बताया गया है।
‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच उठाया मुद्दा
मंत्रियों के सरकारी बंगलों पर खर्च को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी की यह टिप्पणी ग्रामीण सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के लिए चलाए जा रहे ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के बीच आई है। पार्टी ने 15 अगस्त को इस अभियान की शुरुआत की थी।
अभियान के तहत ग्रामीण सरकारी स्कूलों का सामाजिक अंकेक्षण कराने और वहां बिजली, पीने का पानी, शौचालय तथा मध्याह्न भोजन जैसी बुनियादी सुविधाओं में सुधार की मांग की जा रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पढ़ने वाले बच्चों के सामने मौजूद परिवहन की समस्या को भी पार्टी ने अभियान का हिस्सा बनाया है।
'धन की कमी नहीं, इच्छाशक्ति की कमी है'
कॉकरोच जनता पार्टी का कहना है कि सरकारी स्कूलों को बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष नहीं करना चाहिए, खासकर तब जब सरकार के पास दूसरे क्षेत्रों में खर्च करने के लिए पर्याप्त धन उपलब्ध है। पार्टी ने एक्स पर एक अन्य पोस्ट में कहा कि धन की कमी कभी समस्या नहीं रही, बल्कि समस्या इरादे की कमी है।
पार्टी का तर्क है कि सरकारी धन के इस्तेमाल की प्राथमिकताओं पर नए सिरे से विचार करने की जरूरत है और ग्रामीण स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शिक्षा के साथ जरूरी बुनियादी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए।
पीएम केयर्स निधि को लेकर भी सवाल
इससे पहले कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने पीएम केयर्स निधि के इस्तेमाल को लेकर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि इस निधि का इस्तेमाल ग्रामीण सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर करने के लिए क्यों नहीं किया जा सकता।
पीएम केयर्स निधि के नवीनतम लेखापरीक्षित विवरण के अनुसार, निधि की कुल राशि 2023-24 में ₹7,173.03 करोड़ थी, जो 17.8 प्रतिशत बढ़कर 2024-25 में ₹8,452.07 करोड़ हो गई।
गांवों के स्कूलों का दौरा करने का दावा
अभिजीत दीपके ने कहा कि उन्होंने हाल ही में ग्रामीण इलाकों के सरकारी स्कूलों का दौरा किया और वहां कई जगहों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी देखी। उनके मुताबिक, कुछ स्कूलों में बच्चों के लिए पीने के पानी जैसी जरूरी सुविधा भी पर्याप्त रूप से उपलब्ध नहीं है।
दीपके ने सवाल उठाते हुए कहा कि स्कूलों में पीने का पानी मिलना भी मुश्किल हो रहा है, तो उन बच्चों के स्कूलों के लिए इस पैसे का इस्तेमाल क्यों नहीं किया जा रहा है और नए स्कूल बनाने के लिए इस राशि का उपयोग क्यों नहीं किया जा रहा है।
उन्होंने स्कूलों की ओर से बताई जाने वाली धन की कमी और पीएम केयर्स निधि में मौजूद राशि के बीच अंतर का भी मुद्दा उठाया। उनका कहना था कि एक तरफ स्कूलों के लिए धन नहीं होने की बात कही जा रही है और दूसरी तरफ पीएम केयर्स निधि में ₹8,500 करोड़ पड़े हैं।
8 करोड़ की लागत से 1,000 से ज्यादा आदर्श स्कूलों का दावा
दीपके ने अनुमान लगाया कि आधुनिक और बेहतर बुनियादी सुविधाओं वाले एक आदर्श स्कूल के निर्माण पर करीब ₹8 करोड़ खर्च हो सकते हैं। इसी आधार पर उन्होंने कहा कि पीएम केयर्स निधि में मौजूद राशि से सैद्धांतिक तौर पर 1,000 से अधिक ऐसे स्कूल बनाए जा सकते हैं।
उन्होंने कहा कि अगर एक स्कूल की लागत ₹8 करोड़ है, तो ₹8,500 करोड़ से 1,000 से ज्यादा नए आधुनिक आदर्श स्कूल बनाए जा सकते थे। लेकिन ऐसा कुछ नहीं हो रहा है।
27 मार्च 2020 को हुई थी पीएम केयर्स निधि की स्थापना
पीएम केयर्स निधि की स्थापना 27 मार्च 2020 को कोविड-19 महामारी सहित आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के उद्देश्य से की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसके अध्यक्ष हैं, जबकि रक्षा मंत्री, गृह मंत्री और वित्त मंत्री इसके ट्रस्टी हैं।
निधि को लेकर समय-समय पर इसकी पारदर्शिता, धन के इस्तेमाल और इसके उद्देश्यों को लेकर राजनीतिक बहस होती रही है। मौजूदा विवाद में भी कॉकरोच जनता पार्टी ने स्कूलों की जरूरतों और निधि में उपलब्ध राशि की तुलना करते हुए सवाल उठाए हैं।
भाजपा ने आरोपों को खारिज किया
कॉकरोच जनता पार्टी के आरोपों पर भाजपा ने पलटवार करते हुए पार्टी पर पीएम केयर्स निधि को लेकर गलत जानकारी फैलाने का आरोप लगाया। भाजपा की गोवा इकाई ने कहा कि पीएम केयर्स निधि आपातकालीन परिस्थितियों और आपदा राहत के लिए बनाई गई है।
भाजपा ने कॉकरोच जनता पार्टी पर निशाना साधते हुए इसे आम आदमी पार्टी का ‘पॉलिटिकल प्रोजेक्ट’ बताया। पार्टी ने एक्स पर लिखा कि पीएम केयर्स निधि आपातकाल और आपदा राहत के लिए है और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्होंने अपने लोगों को अच्छी नौटंकी तो सिखाई, लेकिन बुनियादी बातें नहीं।
भाजपा ने दीपके को पंजाब जाने की चुनौती दी
भाजपा ने अभिजीत दीपके को पंजाब जाकर वहां के सरकारी स्कूलों की स्थिति का जायजा लेने की चुनौती भी दी। पार्टी ने आम आदमी पार्टी की पंजाब सरकार के ‘विश्वस्तरीय स्कूलों’ के दावों पर भी सवाल उठाए।
इस तरह एक ओर कॉकरोच जनता पार्टी सरकारी बंगलों के रखरखाव और पीएम केयर्स निधि में मौजूद राशि को सरकारी स्कूलों की जरूरतों से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा रही है, वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी और आम आदमी पार्टी पर राजनीतिक बयानबाजी करने का आरोप लगाया है।
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