परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर राहुल गांधी का हमला, बोले- छात्रों की आवाज दबा रही सरकार

HIGHLIGHTS
- राहुल गांधी ने पेपर लीक और परीक्षा गड़बड़ियों को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए छात्रों की आवाज दबाने का आरोप लगाया।
- प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी छात्रों के प्रदर्शन पर कथित पुलिस कार्रवाई और आंसू गैस के इस्तेमाल की आलोचना की।
- सीजेपी के 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने रोका, वहीं संगठन ने परीक्षा सुधार और पेपर लीक मामलों में कार्रवाई की मांग रखी।
देश में परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों के विरोध प्रदर्शन को लेकर राजनीतिक माहौल गर्म हो गया है। लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को "सबसे युवा विरोधी प्रधानमंत्री" बताते हुए आरोप लगाया कि पेपर लीक जैसे मामलों में ठोस कार्रवाई नहीं की जा रही है, जबकि आवाज उठाने वाले छात्रों पर पुलिस कार्रवाई की जा रही है। कांग्रेस ने इसे शिक्षा व्यवस्था से जुड़ी गंभीर समस्या बताते हुए सरकार से जवाब मांगा है।
राहुल गांधी ने सोमवार को जारी वीडियो संदेश में कहा कि सरकार छात्रों की परेशानियों को सुनने के बजाय उन्हें दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि देशभर में 152 परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने से लगभग 7.5 करोड़ छात्र प्रभावित हुए, लेकिन अभी तक किसी जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई है। राहुल गांधी ने यह भी कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने जैसी कोई कार्रवाई नहीं की गई। उनके मुताबिक, सरकार युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों को लेकर गंभीर नहीं है।
छात्रों पर कार्रवाई को लेकर राहुल गांधी का आरोप
राहुल गांधी ने संसद की ओर मार्च कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई को लेकर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि कथित तौर पर पेपर लीक करने वाले लोग खुले घूम रहे हैं, जबकि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग करने वाले छात्रों को हिरासत में लिया जा रहा है और उनके खिलाफ बल प्रयोग किया जा रहा है।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार युवाओं की समस्याओं का समाधान करने के बजाय उनकी आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है।
प्रियंका गांधी ने भी छात्रों का किया समर्थन
कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने भी प्रदर्शनकारी छात्रों के खिलाफ कथित बल प्रयोग और आंसू गैस के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठाए। संसद परिसर के बाहर उन्होंने कहा कि छात्र देश का भविष्य हैं और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा अधिकार है।
प्रियंका गांधी ने कहा कि संसद किसी एक व्यक्ति की संपत्ति नहीं है, बल्कि पूरे देश की है। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष लगातार शिक्षा नीति और परीक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की मांग करता रहा है, लेकिन सरकार इस पर बहस से बच रही है। उनके अनुसार, शिक्षा व्यवस्था में कई गंभीर समस्याएं हैं, जिन पर खुलकर चर्चा जरूरी है।
'संसद चलो' मार्च के दौरान हुआ विवाद
सोमवार को संसद मार्ग पर उस समय स्थिति तनावपूर्ण हो गई, जब कॉकरोच जनता पार्टी और उसके समर्थकों ने कथित नीट-यूजी पेपर लीक और परीक्षा सुधारों की मांग को लेकर 'संसद चलो' मार्च निकाला।
प्रदर्शनकारी संसद भवन की ओर बढ़ने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें संसद मार्ग के पास रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उन्हें हटाने के लिए बल प्रयोग किया गया और कई लोगों को हिरासत में लिया गया।
हालांकि, दिल्ली पुलिस ने उन खबरों का खंडन किया, जिनमें संगठन के संस्थापक अभिजीत दिपके की गिरफ्तारी या हिरासत की बात कही गई थी।
प्रदर्शनकारियों ने रखीं ये मांगें
प्रदर्शन के दौरान संगठन के प्रतिनिधियों ने केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को ज्ञापन सौंपा। इसमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को हटाने, परीक्षा व्यवस्था में सुधार और कथित पेपर लीक से प्रभावित छात्रों के परिवारों को सहायता देने जैसी मांगें शामिल थीं।
प्रतिनिधियों के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने उनकी मांगों पर विचार करने का आश्वासन दिया है। वहीं, विपक्ष लगातार इस मुद्दे को संसद और सार्वजनिक मंचों पर उठाकर सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग कर रहा है। आने वाले दिनों में यह मामला संसद के अंदर और बाहर राजनीतिक चर्चा का बड़ा मुद्दा बना रह सकता है।
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