रामजी लाल सुमन ने 15 साल पुराने केस में अलीगढ़ कोर्ट में किया सरेंडर

समाजवादी पार्टी के राज्यसभा सांसद रामजी लाल सुमन ने 15 साल पुराने एक मामले में जारी गैर-जमानती वारंट के बाद अलीगढ़ स्थित एमपी-एमएलए विशेष अदालत में आत्मसमर्पण किया। बुधवार को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच वे गुपचुप तरीके से कोर्ट पहुंचे, जहां कानूनी औपचारिकताओं के बाद उन्हें जमानत मिल गई।
जानकारी के अनुसार, सांसद ने पहले एसीजेएम प्रथम कोर्ट में आत्मसमर्पण की अर्जी दाखिल की थी। चूंकि मामला एक मौजूदा सांसद से जुड़ा था, इसलिए इसे सुनवाई के लिए विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया गया। इसके बाद अदालत में दोनों पक्षों के वकीलों के बीच बहस हुई।
बचाव पक्ष ने दलील दी कि रामजी लाल सुमन स्वयं अदालत में उपस्थित हुए हैं और उन्होंने न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया है। वकीलों ने इसे राजनीतिक रूप से प्रेरित मामला भी बताया। दलीलें सुनने के बाद अदालत ने उन्हें शर्तों के साथ जमानत प्रदान कर दी।
2011 का मामला क्या है?
यह मामला वर्ष 2011 का बताया जाता है। आरोप है कि कोतवाली नगर क्षेत्र के तुर्कमान गेट स्थित सामियाना प्लाजा में एक जनसभा के लिए प्रशासन से अनुमति नहीं ली गई थी। इसके बावजूद तत्कालीन सपा नेता रामजी लाल सुमन अपने समर्थकों के साथ वहां पहुंचे और कथित तौर पर ताला तोड़कर सभा आयोजित की थी।
इसके बाद पुलिस ने सरकारी आदेशों की अवहेलना और तोड़फोड़ सहित कई धाराओं में मामला दर्ज किया था। अदालत में लगातार पेश न होने पर उनके खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया गया था, जिसके बाद उन्होंने बुधवार को आत्मसमर्पण किया।
जमानत के बाद बयान
जमानत मिलने के बाद मीडिया से बातचीत में सांसद ने प्रदेश सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में पुलिस का दुरुपयोग हो रहा है और निर्दोष लोगों के साथ अन्याय किया जा रहा है। साथ ही उन्होंने कहा कि सरकार विपक्ष की आवाज को दबाने का प्रयास कर रही है और कानून-व्यवस्था की स्थिति चिंताजनक है।
उन्होंने यह भी दावा किया कि प्रदेश में बुलडोजर कार्रवाई जाति और धर्म के आधार पर की जा रही है। हालांकि, 2011 के पुराने मामले और कोर्ट में आत्मसमर्पण को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया।
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