उमर अब्दुल्ला सरकार में बढ़ी बगावत, नेकां के 21 नाराज विधायकों ने की बैठक

HIGHLIGHTS
- बैठक श्रीनगर एयरपोर्ट के पास हुमहामा में पूर्व मंत्री कैसर जमशेद लोन के आवास पर हुई।
- विधायकों ने जून में डाचीगाम में हुई पार्टी बैठक के फैसलों को लागू करने की मांग की।
- प्रस्तावों पर चर्चा के लिए विधायक नजीर गुरेजी की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई गई।
श्रीनगर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के मंत्रिमंडल विस्तार के बाद नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) के भीतर असंतोष लगातार बढ़ रहा है। शुक्रवार को पूर्व मंत्री और विधायक कैसर जमशेद लोन के आवास पर पार्टी के 21 नाराज विधायकों ने बैठक की। सूत्रों के मुताबिक, इस दौरान कई प्रस्तावों पर सहमति बनी।
बैठक में कथित तौर पर चार मंत्रियों के साथ मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी और पार्टी के कोषाध्यक्ष शम्मी ओबराय को भी पद से हटाने की मांग उठाई गई। विधायकों ने यह प्रस्ताव भी रखा कि जिन मंत्रियों को पद संभाले दो साल हो चुके हैं, उन्हें हटाकर दूसरे विधायकों को जिम्मेदारी दी जाए।
इसके अलावा, जून में श्रीनगर के डाचीगाम में हुई नेकां की बैठक में लिए गए फैसलों को लागू करने की मांग भी की गई। विधायकों ने नजीर गुरेजी की अध्यक्षता में एक कमेटी गठित की है। यह समिति जल्द ही पार्टी अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला से मुलाकात कर अपनी मांगों से जुड़े प्रस्ताव सौंपेगी।
3 नवंबर को इस्तीफा देने के फैसले पर अड़े आगा रुहुल्ला
दूसरी ओर, नेकां के बागी सांसद आगा सैयदा रुहुल्ला भी तीन नवंबर को पार्टी और लोकसभा की सदस्यता से इस्तीफा देने की घोषणा पर कायम हैं। पार्टी नेतृत्व अब असंतोष को और बढ़ने से रोकने के लिए नाराज विधायकों के साथ रुहुल्ला को भी मनाने की कोशिश कर रहा है।
दरअसल, मंगलवार को मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने मंत्रिमंडल का विस्तार किया था। इस दौरान सतीश शर्मा को मंत्रिमंडल से बाहर कर चार नए मंत्रियों को शपथ दिलाई गई। मंत्री पद की उम्मीद लगाए बैठे कई विधायक इससे नाराज हो गए और उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपना विरोध जताया।
शुक्रवार को 21 विधायक श्रीनगर एयरपोर्ट के पास हुमहामा में लोलाब के विधायक कैसर जमशेद लोन के घर पहुंचे। यह बैठक दोपहर तीन बजे शुरू हुई और शाम छह बजे तक चली।
इसमें राजौरी-पुंछ क्षेत्र के विधायक भी शामिल हुए। थन्नामंडी के विधायक मुजफ्फर इकबाल खान पहले ही अपने क्षेत्र को मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिलने पर चिंता जाहिर कर चुके हैं। बैठक में पुंछ हवेली के विधायक एजाज जान और बुड़ाल के विधायक जावेद इकबाल चौधरी भी मौजूद रहे।
नेकां के एक विधायक ने कहा कि डाचीगाम में हुई बैठक के दौरान जिन मंत्रियों पर सबसे गंभीर आरोप लगाए गए थे, वे अब भी अपने पदों पर बने हुए हैं। वहीं, कैसर लोन ने इस बैठक को लेकर कहा कि उन्होंने अपने सभी साथियों को भोज के लिए बुलाया था।
रुहुल्ला के इस्तीफे से बढ़ सकती है पार्टी की मुश्किल
बागी सांसद आगा सैयदा रुहुल्ला ने तीन नवंबर को प्रस्तावित रैली के लिए लोगों को आमंत्रित किया है। उन्होंने लोगों से मंगलवार को बड़गाम में जिला उपायुक्त कार्यालय के पास जुटने की अपील की।
रुहुल्ला के इस्तीफे से नेकां के सामने राजनीतिक चुनौती बढ़ सकती है। वह बड़गाम से आते हैं और उनकी नाराजगी के बीच हुए उपचुनाव में पार्टी को इस सीट पर हार का सामना करना पड़ा था। अब रुहुल्ला लोकसभा सीट भी छोड़ने का मन बना चुके हैं। ऐसे में श्रीनगर संसदीय सीट पर उपचुनाव भी नेकां के लिए मुश्किल साबित हो सकता है।
फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को महासचिव पद से हटाया
21 नाराज विधायकों की बैठक के बाद नेकां अध्यक्ष डॉ. फारूक अब्दुल्ला ने मुबारक गुल को पार्टी के महासचिव पद से हटा दिया। मंत्री पद नहीं मिलने से नाराज गुल को यह जिम्मेदारी मिलने के महज तीन दिन बाद ही पद से मुक्त कर दिया गया।
अब मंत्री अली मोहम्मद सागर को अगले आदेश तक महासचिव का कामकाज संभालने के लिए कहा गया है। गुल को मंगलवार को ही महासचिव नियुक्त किया गया था। इससे पहले इस पद की जिम्मेदारी अली मोहम्मद सागर के पास थी।
महासचिव बनाए जाने के कुछ समय बाद ही मुबारक गुल ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि उनके समर्थक उन पर पार्टी और इस पद को छोड़ने का दबाव बना रहे हैं। उन्होंने चार नवंबर को अपने अगले फैसले की घोषणा करने की बात कही थी। इसी बीच शुक्रवार रात श्रीनगर में उनके समर्थकों ने मशाल जुलूस भी निकाला।
बताया जा रहा है कि पार्टी नेतृत्व को आशंका थी कि अगर तीन नवंबर को रुहुल्ला की रैली के बाद गुल खुद महासचिव पद छोड़ने का ऐलान करते, तो इससे पार्टी को नुकसान पहुंच सकता था। ऐसे में उन्हें पहले ही पद से हटाकर पार्टी अनुशासन को लेकर संदेश देने की कोशिश की गई है।
बैठक में शामिल हुए ये विधायक
शुक्रवार की बैठक में नेकां के कई वरिष्ठ और अन्य विधायक शामिल हुए। इनमें मुबारक गुल (ईदगाह), हसनैन मसूदी (पंपोर), अर्जुन सिंह राजू (रामबन), सैफ-उद-दीन बट (खानसाहिब), फारूक शाह (तंगमर्ग), नजीर अहमद खान (गुरेज), हिलाल लोन (सोनावारी), बशीर वीरी (बिजबिहाड़ा), अब्दुल मजीद लारमी (अनंतनाग वेस्ट), गुलाम मोहिउद्दीन मीर (राजपोरा), जावेद अहमद (करनाह), एजाज जान (पुंछ हवेली), जावेद इकबाल (बुद्धल), खुर्शीद अहमद (गुलाबगढ़), सज्जाद शफी (उड़ी), मुश्ताक अहमद गुरु (छलनापोरा) और मुजफ्फर खान (थन्नामंडी) शामिल थे।
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