शेयर बाजार में लौटी तेजी, सेंसेक्स 400 अंक चढ़ा और निफ्टी में भी उछाल

HIGHLIGHTS
- सुबह 10:19 बजे सेंसेक्स 73,646.31 और निफ्टी 22,809.25 के स्तर पर कारोबार कर रहे थे।
- IT, मीडिया और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक शेयरों में प्रमुख रूप से तेजी रही।
- विदेशी संस्थागत निवेशकों ने बुधवार को 871.83 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की।
भारतीय शेयर बाजार में गुरुवार को तेजी देखने को मिली। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों में बदलाव नहीं किए जाने से बाजार को सहारा मिला, हालांकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के कारण निवेशक सतर्क बने रहे। सुबह 10:19 बजे बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 400.28 अंक यानी 0.54 प्रतिशत बढ़कर 73,646.31 पर कारोबार कर रहा था। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 110.41 अंक यानी 0.49 प्रतिशत की तेजी के साथ 22,809.25 के स्तर पर पहुंच गया।
अधिकांश सेक्टोरल सूचकांकों में बढ़त दर्ज की गई। सूचना प्रौद्योगिकी, मीडिया और सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक प्रमुख तेजी वाले क्षेत्रों में शामिल रहे। निजी वित्तीय सेवा क्षेत्र ने भी बाजार को मजबूती देने में अहम भूमिका निभाई। एफएमसीजी, उपभोक्ता टिकाऊ वस्तुओं और धातु कंपनियों के शेयरों में भी बढ़त रही। फार्मा, स्वास्थ्य सेवा तथा तेल और गैस सूचकांकों में मामूली तेजी दर्ज हुई। मिडकैप सूचकांक भी हल्की बढ़त के साथ कारोबार कर रहे थे।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति संबंधी घोषणा के बाद डॉलर में थोड़ी कमजोरी आई। इसके बीच गुरुवार को शुरुआती कारोबार में रुपया डॉलर के मुकाबले 11 पैसे मजबूत होकर 95.17 पर पहुंच गया।
किन क्षेत्रों के शेयरों में गिरावट रही?
बाजार में तेजी के बीच रियल एस्टेट, ऑटोमोबाइल और रसायन क्षेत्र के शेयरों में कमजोरी देखने को मिली। सीमेंट कंपनियों और रियल एस्टेट निवेश ट्रस्टों के शेयर भी गिरावट के साथ कारोबार कर रहे थे। प्रमुख कंपनियों में टीसीएस के शेयर 1 प्रतिशत चढ़े, जबकि बजाज फिनसर्व के शेयरों में 1 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई।
वैश्विक बाजारों में कैसा रहा कारोबार?
अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। जापान के निक्केई 225 वायदा में 0.4 प्रतिशत और टोपिक्स में 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई। शंघाई कंपोजिट 0.6 प्रतिशत नीचे रहा, जबकि एसएंडपी 500 वायदा में 0.5 प्रतिशत की कमजोरी दर्ज की गई।
इसके विपरीत, ऑस्ट्रेलिया का एसएंडपी/एएसएक्स 200 सूचकांक 0.4 प्रतिशत और हांगकांग का हैंग सेंग 0.3 प्रतिशत बढ़ा। यूरो स्टॉक्स 50 वायदा में 0.1 प्रतिशत की गिरावट रही।
विदेशी और घरेलू निवेशकों ने कितने शेयर खरीदे?
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, बुधवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने 871.83 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध खरीदारी की। घरेलू संस्थागत निवेशक (DIIs) भी 643.35 करोड़ रुपये के शेयरों के शुद्ध खरीदार रहे।
चॉइस ब्रोकिंग के तकनीकी अनुसंधान के उपाध्यक्ष सचिन गुप्ता के अनुसार, विदेशी और घरेलू दोनों तरह के संस्थागत निवेशकों की खरीदारी से बाजार को व्यापक समर्थन मिला। अमेरिकी फेडरल रिजर्व ने बुधवार को अपनी प्रमुख ब्याज दर लगभग 3.9 प्रतिशत पर स्थिर रखी। यह फैसला ऊंची मुद्रास्फीति के बावजूद लिया गया।
बाजार के सामने आगे क्या चुनौतियां हैं?
फेडरल रिजर्व की ओर से ब्याज दरों को स्थिर रखने के फैसले को वैश्विक शेयर बाजारों के लिए हल्के सकारात्मक संकेत के रूप में देखा गया। हालांकि, भारतीय बाजार के सामने चुनौतियां बनी हुई हैं। जियोजित इन्वेस्टमेंट्स लिमिटेड के मुख्य निवेश रणनीतिकार वीके विजयकुमार ने कहा कि अमेरिका के 10 वर्षीय बॉन्ड की यील्ड करीब 5 प्रतिशत पर बनी हुई है और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी के संकेत नहीं मिल रहे हैं।
वैश्विक तेल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड की कीमत 1.03 प्रतिशत गिरकर 114.13 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई।
कच्चे तेल की ऊंची कीमतों को लेकर विशेषज्ञों की चिंता
वीके विजयकुमार ने कहा कि यदि कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो इससे व्यापार घाटे और चालू खाता घाटे में बढ़ोतरी हो सकती है। इसका असर रुपये के मूल्य पर पड़ सकता है और आयातित मुद्रास्फीति भी बढ़ सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि इस साल मानसून में अत्यधिक कमी रहने की स्थिति में महंगाई का दबाव और बढ़ सकता है।
एशियाई बाजारों में भी अलग-अलग रुझान देखने को मिले। दक्षिण कोरिया का कोस्पी 3 प्रतिशत गिरा, जबकि शंघाई का एसएसई कंपोजिट इंडेक्स 1 प्रतिशत नीचे रहा। हांगकांग का हैंग सेंग और जापान का निक्केई 225 लगभग सपाट रहे। दूसरी ओर, बुधवार को अमेरिकी शेयर बाजार ऊंचे स्तर पर बंद हुए थे।
इससे पहले बुधवार को भारतीय बाजार में गिरावट दर्ज की गई थी। बीएसई सेंसेक्स 352.64 अंक टूटकर 73,246.03 पर बंद हुआ था, जबकि एनएसई निफ्टी 50 में 50.90 अंक की गिरावट आई थी और यह 22,698.85 पर बंद हुआ था।
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