राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था अब संत समाज के हाथों में, ट्रस्ट ने बनाई नई समिति

HIGHLIGHTS
- राम मंदिर ट्रस्ट ने धार्मिक व्यवस्था की निगरानी के लिए नई धार्मिक समिति का गठन किया।
- अब पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों की जिम्मेदारी संत समाज संभालेगा, व्यवस्था वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार चलेगी।
- ट्रस्ट स्थायी अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला शुरू करेगा, जहां पुजारियों को पूजा-पद्धति और मंदिर सेवा का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था को लेकर बड़ा निर्णय लिया है। अब मंदिर में पूजा-अर्चना और सभी धार्मिक गतिविधियों की निगरानी की जिम्मेदारी संत समाज को सौंपी जाएगी। ट्रस्ट की बैठक में धार्मिक समिति का पुनर्गठन किया गया है। इसके बाद मंदिर की धार्मिक व्यवस्था वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार संचालित की जाएगी।
ट्रस्ट के निर्णय के अनुसार, धार्मिक मामलों को लेकर गठित समिति के फैसले को अंतिम और सर्वोपरि माना जाएगा। नई धार्मिक समिति की अध्यक्षता ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि करेंगे।
इस समिति में अयोध्या के प्रमुख संतों को शामिल किया गया है। इनमें महंत दिनेंद्र दास (निर्मोही अखाड़ा), महंत कमलनयन दास (मणिराम दास छावनी), महंत डॉ. रामानंद दास (रामकथा कुंज), राजकुमार दास (रामबल्लभा कुंज) और महंत मिथिलेशनंदिनी शरण शामिल हैं।
इसके अलावा जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी वासुदेवानंद सरस्वती और जगद्गुरु स्वामी विश्वप्रसन्नतीर्थ भी समिति के सदस्य बनाए गए हैं। नौ सदस्यीय इस धार्मिक समिति में अयोध्या के संतों का बहुमत रहेगा।
ट्रस्ट का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य राम मंदिर की धार्मिक परंपराओं और अनुष्ठानों का संचालन वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार सुनिश्चित करना है।
देशभर के मंदिरों के लिए तैयार होंगे प्रशिक्षित अर्चक
ट्रस्ट की बैठक में धार्मिक समिति को अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति और उनके आचरण की निगरानी की जिम्मेदारी भी दी गई है।
ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने बताया कि राम मंदिर परिसर में वर्तमान में 14 मंदिर हैं, जिनके संचालन के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित अर्चकों की आवश्यकता होगी। इसी को ध्यान में रखते हुए ट्रस्ट स्थायी अर्चक प्रशिक्षण पाठशाला स्थापित करेगा।
उन्होंने बताया कि इससे पहले ट्रस्ट ने एक साल का अर्चक प्रशिक्षण केंद्र चलाया था, जिसमें करीब 30 प्रशिक्षित अर्चक तैयार किए गए थे। बाद में यह व्यवस्था बाधित हो गई थी। अब नई व्यवस्था के तहत नियमित प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रशिक्षण पाठशाला में अर्चकों को पूजा-पद्धति, वैदिक मंत्रों के शुद्ध उच्चारण, कर्मकांड, मंदिर प्रबंधन और रामानंदी परंपरा के अनुसार सेवा-पूजा का प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रशिक्षण पूरा करने वाले अर्चकों को प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा, जिससे वे देशभर के विभिन्न मंदिरों में सेवाएं दे सकेंगे।
ट्रस्ट का मानना है कि इस पहल से राम मंदिर की धार्मिक व्यवस्था और अधिक व्यवस्थित होगी और वैदिक परंपराओं के अनुसार प्रशिक्षित अर्चकों की उपलब्धता सुनिश्चित हो सकेगी।
धार्मिक समिति को मिले ये अधिकार
- मंदिर में होने वाली नित्य पूजा और सभी धार्मिक अनुष्ठान वैदिक रामानंदी परंपरा के अनुसार हो रहे हैं या नहीं, इसकी निगरानी।
- रामनवमी, विवाह पंचमी, सीता नवमी सहित वार्षिक पर्वों की तिथि तय करना और आयोजन की व्यवस्था करना।
- विशेष वैदिक अनुष्ठान, यज्ञ, रामार्चा और वेद पारायण जैसे धार्मिक आयोजनों की योजना और संचालन।
- अर्चकों के प्रशिक्षण, नियुक्ति, आचरण, ड्रेस कोड और पूजा-पद्धति की निगरानी के साथ स्थायी अर्चक प्रशिक्षण संस्थान की स्थापना।
- अयोध्या के मठों, मंदिरों, संत समाज और गुरुकुलों के साथ नियमित संवाद और समन्वय स्थापित करना।
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