बुजुर्गों के अधिकारों पर SC सख्त, सभी राज्यों से मांगी वृद्धाश्रमों की रिपोर्ट

HIGHLIGHTS
- वरिष्ठ नागरिकों के लिए पर्याप्त पेंशन और बेहतर चिकित्सा सुविधाओं की भी मांग है।
- राज्यों को अपनी रिपोर्ट दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया गया है।
- अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी राज्यों के महाधिवक्ताओं को औपचारिक संदेश भेजेंगे।
नई दिल्ली। देश के वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को बेहतर और सुरक्षित बनाने से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शीर्ष अदालत ने सभी राज्यों को नोटिस जारी करते हुए वृद्धाश्रमों के निर्माण और वहां बुजुर्गों को मिल रही सुविधाओं की मौजूदा स्थिति पर रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
यह मामला देश के करोड़ों बुजुर्गों की गरिमा और उनके अधिकारों से जुड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट में यह सुनवाई डॉ. अश्विनी कुमार की ओर से वर्ष 2016 में दाखिल जनहित याचिका पर हो रही है। याचिका में हर जिले में वृद्धाश्रम बनाने, पर्याप्त पेंशन देने और वरिष्ठ नागरिकों के लिए बेहतर स्वास्थ्य एवं चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की गई है।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ इस मामले की सुनवाई कर रही है।
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता डॉ. अश्विनी कुमार ने स्वयं अदालत में पक्ष रखते हुए कहा कि वृद्धाश्रमों की स्थापना और बुजुर्गों की देखभाल को महज प्रशासनिक औपचारिकता नहीं माना जा सकता। यह उनके मानवीय अधिकारों से जुड़ा विषय है। करोड़ों वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण से संबंधित यह मामला लंबे समय से लंबित है।
केंद्र सरकार की ओर से इस मामले को संबंधित उच्च न्यायालयों में भेजने का सुझाव दिया गया था। हालांकि, शीर्ष अदालत ने पहले सभी राज्यों से जमीनी स्तर की स्थिति की जानकारी लेने का निर्णय लिया।
अदालत ने निर्देश दिया है कि अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी इस संबंध में सभी राज्यों के महाधिवक्ताओं को औपचारिक संदेश भेजेंगे। इसके बाद महाधिवक्ताओं से सूचना मिलने के चार सप्ताह के भीतर राज्यों को अपनी रिपोर्ट दाखिल करनी होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राज्यों को अपनी रिपोर्ट में यह बताना होगा कि वहां वृद्धाश्रमों की स्थिति कैसी है और वरिष्ठ नागरिकों को कौन-कौन सी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। अदालत ने अपने पूर्व निर्देशों का भी उल्लेख किया और राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (नाल्सा) तथा 'हेल्पएज इंडिया' जैसी संस्थाओं की भूमिका को महत्वपूर्ण माना।
वर्ष 2016 में जारी आदेशों के तहत बुजुर्गों को कानूनी सहायता और सुरक्षा उपलब्ध कराने को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
शीर्ष अदालत के इस नए कदम से देश के बुजुर्गों के लिए सम्मान और सुरक्षा के साथ जीवन जीने की उम्मीद मजबूत हुई है।
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