'किराया देना है...', शहजाद पूनावाला ने बताई BJP से इस्तीफा देने की वजह; बोले- पार्टी नहीं देती वेतन

HIGHLIGHTS
- पार्टी छोड़ने के पीछे आर्थिक और निजी परिस्थितियों का हवाला
- पूनावाला ने कहा, राजनीतिक पार्टियां प्रवक्ताओं को वेतन नहीं देतीं
- बोले- बीजेपी मेरे लिए नौकरी नहीं, विचारधारा से जुड़ने का माध्यम है
नई दिल्ली। बीजेपी के राष्ट्रीय प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। टीवी डिबेट में सत्ताधारी पार्टी के प्रमुख चेहरों में शामिल रहे पूनावाला ने बताया कि उन्होंने जरूरी आर्थिक और निजी परिस्थितियों के कारण यह फैसला लिया है।
बीजेपी छोड़ने के बाद एक इंटरव्यू में पूनावाला ने कहा कि बीजेपी समेत राजनीतिक पार्टियां अपने प्रवक्ताओं को वेतन नहीं देती हैं और उनके लिए अपना खर्च चलाना मुश्किल हो रहा था। उन्होंने कहा, "मुझे किराया देना है। मेरा मकान मालिक मुझे मुफ्त में घर नहीं देगा क्योंकि मैं बीजेपी से हूं। वह 1 तारीख को किराया मांगता है। राजनीतिक पार्टियां कार्यकर्ताओं को पैसे नहीं देती हैं।"
पीएम मोदी के विजन के प्रति प्रतिबद्ध रहने की बात
पूनावाला ने कहा कि उन्हें बीजेपी से अपने गुजारे की उम्मीद नहीं थी और वह अब भी पार्टी तथा प्रधानमंत्री के विजन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी का काम उनका या किसी अन्य कार्यकर्ता का गुजारा करना नहीं है। उनके मुताबिक, राजनीतिक आंदोलन से जुड़ना नौकरी करना नहीं है, बल्कि विचारधारा, व्यक्ति या संगठन के प्रति लगाव के कारण कार्यकर्ता बनना है। उन्होंने कहा कि ये तीनों चीजें अब भी उनके साथ हैं।
आर्थिक वजहों को बताया इस्तीफे का मुख्य कारण
कांग्रेस छोड़कर 2021 में बीजेपी में शामिल हुए शहजाद पूनावाला ने कहा कि पार्टी से बाहर निकलने के उनके फैसले के पीछे मुख्य वजह आर्थिक परिस्थितियां थीं। उन्होंने कहा कि ज्यादातर नेता या तो 'लेता' यानी फायदा लेने वाले या 'बेटा' यानी किसी का बेटा वाली श्रेणी में आते हैं, लेकिन वह इनमें से किसी में नहीं आते। इसलिए उन्हें अपना गुजारा चलाने के लिए दूसरे रास्ते तलाशने की जरूरत थी।
उन्होंने कहा कि लोग यह मानने को तैयार नहीं हैं कि उनके जैसे पहली पीढ़ी के और नए दौर के राजनेता किसी राजनीतिक विरासत से नहीं आते। उन्होंने सचिन पायलट और ऐसे नेताओं के बेटों का उदाहरण देते हुए कहा कि लोग उनकी जीवनशैली देखने के इतने आदी हो चुके हैं कि उन्हें लगता है कि हर किसी की स्थिति ऐसी ही होती है।
पार्टी छोड़ने की इच्छा जताने पर लीडरशिप ने किया संपर्क
पूनावाला ने कहा कि उनका इस्तीफा अचानक लिया गया फैसला नहीं है और वह 2024 से ही इस बारे में विचार कर रहे थे। उन्होंने बताया कि कुछ सप्ताह पहले जब उन्होंने पार्टी छोड़ने की इच्छा जाहिर की थी, तब पार्टी नेतृत्व ने उनसे संपर्क किया था।
उन्होंने कहा कि जिन लोगों को उनसे संपर्क करना था, उन्होंने 30 जुलाई को ही उनसे संपर्क कर लिया था। इससे पहले भी जब उन्होंने अपनी चुनौतियों के बारे में बताया था तो पार्टी नेतृत्व ने उनकी मदद करने और यह देखने की कोशिश की थी कि उनका ध्यान कैसे रखा जा सकता है। हालांकि, उन्होंने कहा कि उनका जमीर उन्हें इसकी अनुमति नहीं देता।
पूनावाला ने कहा कि बीजेपी उनके लिए नौकरी का माध्यम नहीं है। उनके मुताबिक, बीजेपी उनके लिए विचारधारा से जुड़ने का अवसर है और पार्टी की विचारधारा या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के प्रति समर्पित रहने के लिए उन्हें पार्टी में किसी पद पर रहने की जरूरत नहीं है।
इस्तीफे को लेकर चल रही थ्योरीज पर क्या बोले?
अपने इस्तीफे को लेकर चल रही अलग-अलग थ्योरीज, जिसमें कथित स्टिंग ऑपरेशन का वीडियो भी शामिल है, पर पूनावाला ने कहा कि उन्होंने ऐसे किसी वीडियो के बारे में पहली बार सुना है। उन्होंने सोशल मीडिया पर चल रही कहानियों को गलत बताया।
अपने इस्तीफे के पत्र में पूनावाला ने पिछले कुछ दिनों में कुछ लोगों की वजह से हुई घटनाओं का जिक्र किया था, लेकिन किसी का नाम या कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी थी। इस बारे में उन्होंने कहा कि किसी भी संगठन, खासकर राजनीतिक या मीडिया संगठनों में सभी लोगों के बीच रिश्ते हमेशा अच्छे रहें, ऐसा जरूरी नहीं है।
उन्होंने यह भी कहा कि कुछ लोग उन्हें गिरते हुए देखना चाहते हैं, हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति का नाम नहीं लिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक जीवन ऐसा ही होता है और लोग आपको नीचे गिराना चाहते हैं।
कांग्रेस में लौटने को लेकर रखी शर्त
कांग्रेस में दोबारा शामिल होने की संभावना को खारिज करते हुए शहजाद पूनावाला ने अपनी सोच बदलने के लिए एक शर्त बताई। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा कि वह एक शर्त पर कांग्रेस में शामिल होंगे कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और प्रियंका वाड्रा को हटाया जाए और नेहरू के कामों के लिए माफी मांगी जाए।
पूनावाला ने कहा कि वह वैचारिक रूप से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन के प्रति प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि वह राहुल गांधी की तरह भविष्यवक्ता नहीं हैं, लेकिन फिलहाल इतना कह सकते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बड़ा नेता देश में न तो कोई हुआ है और न ही कोई होगा।
उन्होंने कहा कि दुनिया की सबसे बड़ी लोकतांत्रिक पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता के तौर पर काम करने के बाद क्या यह माना जा सकता है कि वह किसी दूसरी पार्टी से जुड़ेंगे। उनके मुताबिक, इस समय भारत में बीजेपी ही सबसे अच्छी पार्टी है।
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