PM मोदी चाहते हैं यादगार हो तारिक रहमान का भारत दौरा, भारत-बांग्लादेश संबंधों पर क्या बोले उच्चायुक्त?

HIGHLIGHTS
- दोनों देशों के बीच आपसी भरोसे को मजबूत करने पर जोर
- व्यापार और निवेश को संबंधों का अहम आधार बनाने की कोशिश
- युवाओं के लिए नए अवसरों को द्विपक्षीय रिश्तों से जोड़ने पर जोर
भारत और बांग्लादेश के बीच हालिया तनाव के बावजूद नई दिल्ली दोनों देशों के संबंधों को फिर से सामान्य करने की कोशिश कर रही है। भारतीय उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चाहते हैं कि बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान का प्रस्तावित भारत दौरा यादगार रहे। भारत ने आपसी भरोसे, व्यापार, निवेश और युवाओं के लिए अवसरों को द्विपक्षीय संबंधों का आधार बनाने पर जोर दिया है। हालांकि, शेख हसीना के प्रत्यर्पण और भारत से दिए गए उनके हालिया मीडिया संदेश को लेकर दोनों देशों के बीच मतभेद अब भी बड़ी चुनौती बने हुए हैं।
रहमान के स्वागत को लेकर पीएम मोदी का भरोसा
राजदूत की ये बातें मंगलवार को ऐसे समय में सामने आईं, जब 12-13 सितंबर को ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के लिए नई दिल्ली में रहमान के प्रस्तावित दौरे को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। ढाका की ओर से अपदस्थ प्रधानमंत्री शेख हसीना के प्रत्यर्पण की मांग को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच पैदा हुई नई तल्खी के कारण यह अनिश्चितता बनी हुई है।
द बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, त्रिवेदी ने मंगलवार को भारतीय उच्चायोग की ओर से बांग्लादेश के प्रमुख कारोबारी नेताओं और कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII) के प्रतिनिधिमंडल के लिए आयोजित स्वागत समारोह में कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का संदेश था कि दोनों नेताओं को मुलाकात करनी चाहिए।
'मोदी चाहते हैं दौरा बने यादगार'
बैठक के दौरान राजदूत त्रिवेदी ने भरोसा दिलाया कि भारत दौरे के दौरान पीएम रहमान का उचित और सम्मानजनक स्वागत किया जाएगा। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने केवल एक बात कही है कि दोनों नेताओं को मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि उनकी ओर से रहमान को बताया जा सकता है कि उन्हें भारत के प्रधानमंत्री का भरोसा है कि भारत आने पर उनका उसी तरह सम्मानजनक स्वागत किया जाएगा, जिसके वे हकदार हैं।
उन्होंने जोर दिया कि दोनों नेताओं के बीच मजबूत संबंधों से दोनों पड़ोसी देशों के लोगों और कारोबारियों को अंततः लाभ मिलेगा। इस अंतर को पाटने में दुनिया भर के व्यापारियों की बड़ी भूमिका है।
अतीत के मतभेदों को सुलझाकर आगे बढ़ने की अपील
त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देशों को भविष्य की ओर देखते हुए अतीत के मतभेदों को सुलझाकर आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि अतीत को भूलने की बात नहीं है, बल्कि उसे ध्यान में रखते हुए पुराने मतभेदों को दूर कर आगे बढ़ने की जरूरत है।
उन्होंने कहा कि 'जीवंत लोकतंत्रों' के बीच मतभेद होना स्वाभाविक है और बातचीत तथा आपसी जुड़ाव के जरिए इन्हें सुलझाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि भारत बांग्लादेश के लोगों की चिंताओं को अच्छी तरह समझता है, लेकिन दोनों देशों के बीच संबंध बराबरी की साझेदारी पर आधारित हैं।
रिश्तों की बुनियाद है आपसी भरोसा
उन्होंने दोनों देशों के बीच टिकाऊ संबंधों के लिए आपसी विश्वास को बेहद जरूरी बताया। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक चलने वाले किसी भी रिश्ते की नींव आपसी और बिना शर्त भरोसा होती है।
भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति पर जोर देते हुए त्रिवेदी ने कहा कि दोनों देशों के संबंधों में कुछ 'मुश्किलें' जरूर आई हैं, लेकिन इन चुनौतियों को व्यापक द्विपक्षीय संबंधों को कमजोर करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।
हसीना को लेकर फिर बढ़ी भारत-बांग्लादेश की तल्खी
5 अगस्त को नई दिल्ली से हसीना की वर्चुअल मीडिया बातचीत के बाद हाल के दिनों में दोनों देशों के रिश्तों में आई तल्खी के बीच रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा का मुद्दा अहम हो गया है।
बांग्लादेश ने इस मीडिया बातचीत पर नाराजगी जताते हुए कहा कि कार्यक्रम से वहां के लोगों की भावनाएं आहत हुई हैं और इसका भारत के साथ द्विपक्षीय संबंधों को बेहतर बनाने की कोशिशों पर नकारात्मक असर पड़ सकता है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि हसीना से जुड़े इस मीडिया कार्यक्रम में उसकी कोई भूमिका नहीं थी और वह उस मंच पर बांग्लादेश सरकार के बारे में कही गई किसी भी बात का समर्थन नहीं करता है।
हसीना के प्रत्यर्पण को लेकर जारी है गतिरोध
अगस्त 2024 में छात्रों के हिंसक विरोध-प्रदर्शनों के बाद हसीना को सत्ता से हटा दिया गया था और वह भारत आ गई थीं। नवंबर 2025 में बांग्लादेश की एक विशेष ट्रिब्यूनल ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कार्रवाई के दौरान कथित "मानवता के खिलाफ अपराधों" के लिए उन्हें उनकी गैर-मौजूदगी में मौत की सजा सुनाई।
इसके बाद से ढाका लगातार भारत से हसीना के प्रत्यर्पण की मांग कर रहा है। वहीं, नई दिल्ली का कहना है कि प्रत्यर्पण के अनुरोध की जांच लागू कानूनों और स्थापित कानूनी प्रक्रियाओं के तहत की जा रही है।
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