चीन ने रचा इतिहास, पहली बार रॉकेट के पहले हिस्से को जमीन पर सफलतापूर्वक उतारा

HIGHLIGHTS
- झूके-3 रॉकेट को बुधवार सुबह लॉन्च किया गया
- उड़ान के बाद पहला हिस्सा सफलतापूर्वक वापस उतारा गया
- चीन के लिए जमीन पर रॉकेट उतारने की यह पहली सफलता
चीन ने पहली बार किसी रॉकेट के पहले हिस्से को जमीन पर सफलतापूर्वक वापस उतार लिया है। सरकारी मीडिया ने बुधवार को इसकी जानकारी दी। चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए इस तकनीक को विकसित कर रहा है।
जमीन पर रॉकेट के पहले हिस्से को वापस उतारना चीन की पहली सफल कोशिश है। हालांकि, रॉकेट के किसी हिस्से को वापस हासिल करने की यह चीन की दूसरी सफलता है। इससे पहले जुलाई में समुद्र में बने एक प्लेटफॉर्म पर रॉकेट के हिस्से को सफलतापूर्वक वापस उतारा गया था।
चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के मुताबिक, दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट झूके-3 को बुधवार सुबह लॉन्च किया गया। इसके बाद रॉकेट के पहले हिस्से को सफलतापूर्वक वापस जमीन पर उतार लिया गया।
चीन ने यह तकनीक क्यों विकसित की?
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन 2015 से रॉकेटों को वापस उतार रही हैं। इससे रॉकेट के उन हिस्सों का दोबारा इस्तेमाल किया जा सकता है, जिन्हें पहले इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता था। इससे अंतरिक्ष में उपग्रह और अन्य सामान भेजने की लागत कम करने में मदद मिली है।
शिन्हुआ ने बताया कि बुधवार को रॉकेट को वापस उतारते समय चीन ने पहली बार खुलने वाले लैंडिंग पैर का इस्तेमाल किया। एजेंसी ने इसे दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले रॉकेट की तकनीक में चीन की एक बड़ी सफलता बताया।
समुद्र में कैसे वापस लाया गया था रॉकेट?
10 जुलाई को लॉन्ग मार्च-10बी रॉकेट का पहला हिस्सा उड़ान भरने के बाद दूसरे हिस्से से अलग हो गया था। इसके बाद इसे समुद्र में बने एक प्लेटफॉर्म पर वापस लाया गया था। उस समय रॉकेट को जाल से पकड़ने वाली व्यवस्था का इस्तेमाल कर उसे वापस हासिल किया गया था।
इसके अगले दिन, 11 जुलाई को जापान ने दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले एक प्रयोगात्मक रॉकेट की पहली परीक्षण उड़ान की। उड़ान भरने के बाद रॉकेट सुरक्षित तरीके से वापस जमीन पर उतरने में सफल रहा।
जापान भी रॉकेट को दोबारा इस्तेमाल करने वाली तकनीक हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसका उद्देश्य अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने की लागत कम करना और दुनिया के अंतरिक्ष बाजार में दूसरी बड़ी ताकतों से मुकाबला करना है।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.































Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.