राम मंदिर चढ़ावा चोरी का राज खोलेगी SIT जांच, अब तक 81 लाख रुपये बरामद

HIGHLIGHTS
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी कब से चल रही थी, इसकी जांच एसआईटी करेगी।
- शुरुआती कार्रवाई में 17 घंटे के भीतर 81.19 लाख रुपये की नकदी बरामद हुई थी।
- मामले की शुरुआत मंदिर के शौचालय से मिली 40 हजार रुपये की रकम से हुई थी।
अयोध्या: राम मंदिर में चढ़ावे की रकम में चोरी का सिलसिला कब से चल रहा था, इसका जवाब अब एसआईटी जांच से मिलने की उम्मीद है। फिलहाल इस बात की कोई निश्चित जानकारी सामने नहीं आई है कि आरोपितों ने कितने समय से इस तरह की गतिविधियों को अंजाम दिया।
जांच में सीसीटीवी फुटेज भी अहम भूमिका निभा सकता है, लेकिन मंदिर परिसर के कैमरों की रिकॉर्डिंग सीमित अवधि यानी करीब 45 दिनों तक ही सुरक्षित रहती है। ऐसे में आरोपितों से पूछताछ और उनके बयानों के आधार पर ही चोरी की अवधि और रकम का सही अंदाजा लगाया जा सकेगा।
शौचालय से मिली थी पहली रकम
मामले का खुलासा तब हुआ, जब मंदिर परिसर के शौचालय से 40 हजार रुपये की नकदी बरामद हुई। बताया गया कि एक गेट कीपर ने वहां नोट देखे और तत्काल इसकी जानकारी ट्रस्ट के तत्कालीन महासचिव चंपतराय को दी।
सूचना मिलते ही चंपतराय मंदिर पहुंचे और मामले की जानकारी सुरक्षा अधिकारियों तथा ट्रस्ट के अन्य सदस्यों को दी गई। सभी की मौजूदगी में संबंधित लोगों की जांच की गई। चार जून को मामला सामने आने के बाद ट्रस्ट ने पुलिस अधिकारियों को भी इसकी जानकारी दी, जिसके बाद जांच और बरामदगी की प्रक्रिया शुरू हुई।
17 घंटे में बरामद हुई 81 लाख रुपये की नकदी
मामले से जुड़े सूत्रों के अनुसार, शुरुआती कार्रवाई के दौरान ट्रस्ट के समन्वय से आरोपितों के ठिकानों पर जांच की गई। करीब 17 घंटे के भीतर अयोध्या के अलावा बहराइच के नानपारा और प्रतापगढ़ के कुंडा समेत कई स्थानों से नकदी बरामद की गई।
जांच में अनुकल्प मिश्रा, लवकुश, करुणेश समेत अन्य आरोपितों की निशानदेही पर कुल 81 लाख 19 हजार रुपये बरामद होने की बात सामने आई। वहीं रमाशंकर मिश्रा का संबंध बहराइच के नानपारा और अविनाश शुक्ला का पैतृक संबंध प्रतापगढ़ से बताया जा रहा है।
21 लोगों की टीम ने संभाली थी कार्रवाई
घटना सामने आने के बाद करीब 21 लोगों की टीम ने मामले में सक्रियता दिखाई। गणना स्थल से चोरी की जानकारी सबसे पहले चंपतराय को दी गई थी। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में पहुंचकर ट्रस्ट पदाधिकारियों और संबंधित लोगों के साथ बैठक की और धनराशि वापस कराने की प्रक्रिया शुरू कराई।
सूत्रों के मुताबिक, कार्रवाई सख्त होने के बाद कुछ आरोपितों के परिजन भी सामने आए और कथित तौर पर चोरी की रकम लौटाने के लिए मंदिर पहुंचे।
इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी ट्रस्ट के अलावा कुछ पुलिस अधिकारियों को भी थी, लेकिन अब तक ट्रस्ट महासचिव चंपतराय और पुलिस अधिकारियों की ओर से इस मामले में विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
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