सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल का मामला पहुंचा हाई कोर्ट, याचिका में फोर्स-फीडिंग की मांग

HIGHLIGHTS
- सोनम वांगचुक के अनशन को लेकर दिल्ली हाई कोर्ट में जनहित याचिका दाखिल की गई।
- याचिका में उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने और जरूरत पड़ने पर फोर्स-फीडिंग की मांग की गई है।
- शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर आंदोलन जारी है।
नई दिल्ली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक का मामला अब दिल्ली हाई कोर्ट पहुंच गया है। वांगचुक के अनशन और बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति को लेकर एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई है।
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता और अधिवक्ता राकेश कुमार सैनी की ओर से दाखिल की गई है। इसमें केंद्र सरकार को निर्देश देने की मांग की गई है कि सोनम वांगचुक को तत्काल चिकित्सकीय निगरानी में रखा जाए और उनकी जान बचाने के लिए जरूरत पड़ने पर उन्हें जबरन भोजन उपलब्ध कराया जाए।
मामले की सुनवाई के दौरान वकीलों की हड़ताल के कारण केंद्र सरकार की ओर से कोई प्रतिनिधि अदालत में मौजूद नहीं था। इसके चलते दिल्ली हाई कोर्ट ने सुनवाई को आगे के लिए टाल दिया।
18 दिन से जारी है अनशन
सोनम वांगचुक 28 जुलाई से दिल्ली के जंतर-मंतर पर आमरण अनशन कर रहे हैं। उनका आंदोलन परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर चल रहा है।
आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि मई में सामने आए परीक्षा पेपर लीक मामलों से बड़ी संख्या में छात्रों का भविष्य प्रभावित हुआ है। इसी मुद्दे को लेकर शिक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग उठाई जा रही है।
स्वास्थ्य को लेकर बढ़ी चिंता
लगातार अनशन के कारण सोनम वांगचुक की सेहत को लेकर चिंता जताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनका वजन करीब 8.5 किलोग्राम तक कम हुआ है। उन्हें कमजोरी और मांसपेशियों में दर्द जैसी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
हालांकि, समर्थकों और अन्य लोगों की ओर से अनशन खत्म करने की अपील किए जाने के बावजूद वांगचुक अपनी मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखे हुए हैं।
संसद मार्च की तैयारी
वहीं, आंदोलन से जुड़े संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने संसद के मानसून सत्र के पहले दिन 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद भवन तक शांतिपूर्ण मार्च निकालने का ऐलान किया है।
संगठन ने छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से इस मार्च में शामिल होने की अपील की है। आंदोलन की प्रमुख मांगों में शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और परीक्षा प्रक्रिया में सुधार शामिल हैं।
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