दिल्ली में लावारिस कुत्तों की नसबंदी अभियान शुरू करने का आदेश, HC ने MCD को दिए निर्देश
By Hitesh — August 3, 2026

HIGHLIGHTS
- एमसीडी और एनडीएमसी को शुरुआत में कुछ क्षेत्रों में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में अभियान चलाने को कहा गया।
- हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि शिविरों से पहले लोगों को जानकारी देने के लिए प्रचार-प्रसार किया जाए।
- सुनवाई के दौरान अदालत ने दिल्ली में गौरैया और कौओं की घटती संख्या को लेकर भी सवाल उठाए।
Author: — Dainik Dehat
दिल्ली हाईकोर्ट ने सोमवार को नगर निगम दिल्ली (एमसीडी) और नई दिल्ली नगर परिषद (एनडीएमसी) को राजधानी के सभी वार्डों में लावारिस कुत्तों के टीकाकरण और नसबंदी के लिए विशेष शिविर लगाने के निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति दिनेश मेहता और न्यायमूर्ति रजनीश कुमार गुप्ता की खंडपीठ ने लावारिस कुत्तों के प्रबंधन से जुड़े स्वत: संज्ञान जनहित याचिका मामले की सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया।
एमसीडी को हाईकोर्ट के निर्देश
अदालत ने कहा कि एमसीडी और एनडीएमसी अपने-अपने क्षेत्रों के हर वार्ड में इन शिविरों का आयोजन करें और शुरुआत में इसे पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जाए।
हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि शिविर शुरू होने से पहले लोगों को इसकी जानकारी देने के लिए व्यापक प्रचार किया जाए और प्रमुख जगहों पर प्लेकार्ड लगाए जाएं। इनमें साफ तौर पर बताया जाए कि लावारिस कुत्तों को पकड़ा नहीं जा रहा है और न ही उन्हें डॉग पाउंड भेजा जाएगा। उन्हें केवल टीकाकरण और नसबंदी के उद्देश्य से शिविरों में लाया जाएगा।
ज्यादा भीड़ वाले इलाकों से शुरुआत का सुझाव
हाईकोर्ट ने एमसीडी को सलाह दी कि वह उन क्षेत्रों से इस अभियान की शुरुआत करे, जहां लोगों की आवाजाही अधिक रहती है।
खंडपीठ ने कहा कि छोटे क्षेत्र से शुरुआत की जा सकती है। कनॉट प्लेस और इंडिया गेट जैसे वार्ड चुने जा सकते हैं, जहां बड़ी संख्या में कार्यालय हैं। ऐसे क्षेत्रों में सभी कुत्तों की नसबंदी कराई जा सकती है।
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति दिनेश मेहता ने डॉग बाइट की घटनाओं को लेकर अपने निजी अनुभव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि उनकी मां को तीन बार कुत्तों ने काटा है।
डॉग बाइट की घटनाओं पर जताई चिंता
सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति मेहता ने कुत्तों के काटने की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अदालत डॉग बाइट के मामलों पर ध्यान दे रही है और यह सभी के लिए चिंता का विषय है।
उन्होंने कहा कि रोजाना कुत्तों के काटने की खबरें सामने आती हैं। हालांकि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वह इस बहस में नहीं जाना चाहते कि कुत्ते काटते हैं या नहीं काटते।
भविष्य की पीढ़ियों के लिए कुत्तों का संरक्षण जरूरी
अदालत ने कहा कि वह डॉग बाइट की घटनाएं नहीं चाहती, लेकिन भविष्य की पीढ़ियों के लिए कुत्तों का संरक्षण भी जरूरी है।
खंडपीठ ने कहा कि वह किसी भी कुत्ते की मौत नहीं चाहती और यह भी नहीं सुनना चाहती कि किसी को कुत्ते ने काटा। अदालत ने कहा कि कुत्तों की संख्या पूरी तरह खत्म नहीं होनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां उन्हें देख सकें।
पक्षियों की घटती संख्या पर भी सवाल
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने दिल्ली और देश के अन्य हिस्सों में पक्षियों की कम होती संख्या पर भी चिंता जताई। अदालत ने पूछा कि गौरैया और कौए कहां चले गए हैं।
खंडपीठ ने कहा कि पूरी दुनिया कुत्तों के मुद्दे पर चर्चा कर रही है, लेकिन पक्षियों की घटती संख्या पर भी ध्यान देने की जरूरत है। मामले की अगली सुनवाई 1 सितंबर को होगी।
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