सोनीपत: डिजिटल क्राप सर्वे के दौरान खेत में ततैयों ने किया हमला, पटवारी घायल

HIGHLIGHTS
- गांव बेगा में सर्वे के दौरान ततैयों के झुंड ने किया हमला
- भागते समय पटवारी के पैर में नुकीली वस्तु चुभी
- खेतों में सांप और जहरीले जीवों का खतरा सामने आया
सोनीपत। हरियाणा सरकार की ओर से कराए जा रहे डिजिटल क्राप सर्वे (डीसीएस) के तहत शुक्रवार को सोनीपत के गांवों में प्रशासनिक अधिकारियों और पटवारियों की टीमें फील्ड परीक्षण के लिए पहुंचीं।
गन्नौर तहसील के गांव बेगा में अंडर ट्रेनी तहसीलदार देवेंद्र और पटवारी सुरेंद्र खेत में सर्वे के लिए पहुंचे थे। इसी दौरान ततैयों के झुंड ने दोनों पर हमला कर दिया। ततैयों से बचने के लिए अधिकारी खेत से बाहर की ओर भागे और बाहर निकलने के बाद राहत की सांस ली।
भागते समय पटवारी के पैर में कोई नुकीली वस्तु चुभ गई, जिससे वह घायल हो गए। इसके अलावा फील्ड सर्वे के दौरान अधिकारियों और कर्मचारियों को कई अन्य व्यावहारिक परेशानियों का भी सामना करना पड़ा।
मुख्यालय की ओर से जारी सख्त निर्देशों के अनुसार पटवारियों को खेत के वास्तविक रकबे के करीब 20 मीटर अंदर जाकर फोटो प्वाइंट से डिजिटल डेटा और तस्वीरें अपलोड करनी हैं।
पटवारियों ने इस व्यवस्था को अव्यावहारिक बताते हुए पहले ही इससे जुड़ी समस्याओं की जानकारी दी थी। उनका कहना था कि पानी से भरे खेतों और गन्ने, ज्वार व बाजरे जैसी ऊंची फसलों के बीच जाकर सर्वे करना मुश्किल है।
शुक्रवार को अधिकारियों ने पटवारियों के साथ खेतों में जाकर व्यवस्था का वास्तविक परीक्षण किया। इस दौरान सुरक्षा और तकनीकी व्यवस्था से जुड़ी कई गंभीर चुनौतियां सामने आईं।
कर्मचारियों की सुरक्षा सबसे बड़ी चुनौती
गोहाना के गांव जौली में सर्वे के दौरान पटवारी के पैर में नुकीली वस्तु चुभ गई, जिससे वह घायल हो गए। वहीं एक अन्य स्थान पर नए पटवारी विष्णु भी चोटिल हुए।
जलभराव वाले धान के खेतों, गन्ने और बाजरे की खड़ी फसलों में सांप और जहरीले जीवों का खतरा बना हुआ है। इसके अलावा कांटेदार झाड़ियों के कारण तय फोटो प्वाइंट तक पहुंचना भी बेहद कठिन साबित हो रहा है।
एप की तकनीकी खामियों से भी परेशानी
गांव जुआं में हुए फील्ड परीक्षण के दौरान सामने आया कि एक खसरे का सर्वे पूरा करने में करीब 5 से 10 मिनट लग रहे हैं। डीसीएस एप में एक बड़ी समस्या यह सामने आई कि यदि एक ही खसरे में एक से अधिक फसलें बोई गई हैं तो फोटो प्वाइंट पर मौजूद फसल ही दर्ज हो रही है। दूसरी फसल को दर्ज करने के लिए एप में कोई विकल्प नहीं है।
इसके अलावा फसल की सटीक किस्म, जैसे बासमती या गैर-बासमती, दर्ज करने और बुआई की सही तारीख बताने में भी पटवारियों को दिक्कत हो रही है। इसका कारण यह है कि इन जानकारियों का कोई लिखित रिकॉर्ड पटवारियों के पास पहले से उपलब्ध नहीं होता।
अलग-अलग गांवों में इन अधिकारियों ने किया सर्वे
- गांव जुआं में पटवारी दलबीर राणा, तहसीलदार कीर्ति और नायब तहसीलदार सोमेश वशिष्ठ ने सर्वे किया।
- गांव बेगा में अंडर ट्रेनी तहसीलदार देवेंद्र तथा पटवारी सुरेंद्र और नीतू ने सर्वे किया।
- गांव जौली में कानूनगो संदीप, नायब तहसीलदार हेमंत और पटवारी अंकित ने सर्वे किया।
- गांव पलड़ी कलां में नायब तहसीलदार इरफान अली और पटवारी प्रमोद ने सर्वे किया।
- गांव कंवाली में नायब तहसीलदार अचिन, कानूनगो धर्मबीर व अनिल और पटवारी अनिल मोर ने सर्वे किया।
20 अगस्त से धरने पर पटवारी और कानूनगो
द रेवेन्यू पटवार एवं कानूनगो एसोसिएशन के बैनर तले प्रदेशभर के पटवारी और कानूनगो 20 अगस्त से धरने पर हैं। वे अव्यावहारिक नियमों और पोर्टल में मौजूद तकनीकी खामियों का विरोध कर रहे हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि बुनियादी सुरक्षा व्यवस्था और एप में जरूरी सुधार किए बिना खेतों के बीच जाकर सर्वे करना कर्मचारियों की जान को जोखिम में डालने जैसा है। एसोसिएशन के प्रदेश महासचिव सन्नी दहिया के अनुसार तहसीलदार द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट, वीडियोग्राफी और फोटोग्राफी उपायुक्त को भेजी जा चुकी है।
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