कर्नाटक के राज्य गान पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला, धुन और समय तय करने के आदेश में दखल से इनकार

HIGHLIGHTS
- गायक किक्केरी कृष्णमूर्ति की अपील सुप्रीम कोर्ट ने खारिज की
- पीठ में जस्टिस बीवी नागरत्ना और आर. महादेवन शामिल रहे
- हाई कोर्ट के पांच जनवरी 2026 के फैसले को चुनौती दी गई थी
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के उस फैसले में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें राज्य गान ‘जयभारत जननीय तनुजाते’ के गायन के लिए एक निश्चित धुन और समय निर्धारित करने के प्रदेश सरकार के निर्णय को बरकरार रखा गया था।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस आर. महादेवन की पीठ ने गायक किक्केरी कृष्णमूर्ति की ओर से दाखिल अपील को खारिज कर दिया।
कृष्णमूर्ति ने हाई कोर्ट के पांच जनवरी, 2026 के फैसले को चुनौती दी थी। हाई कोर्ट ने अपने फैसले में राज्य सरकार के 25 सितंबर, 2022 के आदेश को रद्द करने से इनकार किया था। इस आदेश में कहा गया था कि राज्य गान को मैसूर अनंतस्वामी द्वारा तैयार की गई धुन में ढाई मिनट के भीतर गाया जाएगा।
याचिका खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि राज्य गान के गायन में राग और अवधि, दोनों के लिहाज से एकरूपता होनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि प्रदेश सरकार को राज्य गान के लिए राग निर्धारित करने का अधिकार है, खासकर तब जब इसे किसी विशेषज्ञ ने तैयार किया हो।
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