यूपी बोर्ड का बड़ा फैसला, 2027 से डिजिटल सिस्टम से तय होंगे हाईस्कूल-इंटर के परीक्षा केंद्र

HIGHLIGHTS
- यूपी बोर्ड ने 2027 हाईस्कूल और इंटर परीक्षा के लिए परीक्षा केंद्र निर्धारण प्रक्रिया को पूरी तरह ऑनलाइन करने का निर्णय लिया है।
- नई व्यवस्था में स्कूलों की सुविधाओं का डेटा अपलोड, भौतिक सत्यापन और सॉफ्टवेयर आधारित चयन शामिल होगा।
- पारदर्शिता बढ़ाने के लिए आपत्तियों और निस्तारण के बाद अंतिम परीक्षा केंद्र सूची जारी की जाएगी।
लखनऊ। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने वर्ष 2027 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्र निर्धारण प्रक्रिया को पूरी तरह डिजिटल करने का फैसला लिया है। नई व्यवस्था के तहत अब केंद्रों का चयन सॉफ्टवेयर आधारित प्रणाली से किया जाएगा, जिससे पारदर्शिता बढ़ेगी और मानवीय हस्तक्षेप कम होगा।
हाथरस में तैयारी शुरू, स्कूलों को दिए निर्देश
हाथरस जिले में इस नई प्रणाली को लागू करने की तैयारियां तेज हो गई हैं। जिला विद्यालय निरीक्षक संत प्रकाश ने सभी स्कूल संचालकों को तय समयसीमा में पोर्टल पर आवश्यक जानकारी अपलोड करने के निर्देश दिए हैं। जिले के कुल 352 विद्यालय (राजकीय, सहायता प्राप्त और वित्तविहीन) इस प्रक्रिया में शामिल होंगे।
स्कूलों की सुविधाओं का ऑनलाइन सत्यापन
नई व्यवस्था के अनुसार, स्कूलों को अपने यहां उपलब्ध सुविधाओं—जैसे कक्षों की संख्या, फर्नीचर, पेयजल, शौचालय, बिजली, सीसीटीवी और अन्य संसाधनों—का पूरा विवरण ऑनलाइन दर्ज करना होगा। इसके बाद तहसील स्तरीय समिति भौतिक सत्यापन करेगी और रिपोर्ट पोर्टल पर अपलोड करेगी।
इन्हीं आंकड़ों के आधार पर सॉफ्टवेयर परीक्षा केंद्रों की प्रारंभिक सूची तैयार करेगा। आपत्तियों और उनके निस्तारण के बाद अंतिम सूची जारी की जाएगी।
परीक्षा केंद्र निर्धारण की समय-सारिणी
• 20 जुलाई तक: स्कूलों द्वारा विवरण अपलोड
• 03 अगस्त तक: तहसील स्तर पर भौतिक सत्यापन
• 10 अगस्त तक: सत्यापन रिपोर्ट अपलोड
• 17 अगस्त: पहली सूची जारी
• 22 अगस्त तक: आपत्तियां दर्ज
• 01 सितंबर: आपत्तियों का निस्तारण
• 07 सितंबर: संशोधित सूची जारी
• 14 सितंबर तक: दूसरी आपत्तियां
• 18 सितंबर: अंतिम परीक्षा केंद्र सूची जारी
पारदर्शी व्यवस्था की दिशा में कदम
डीआईओएस संत प्रकाश के अनुसार, इस नई ऑनलाइन प्रणाली से परीक्षा केंद्र निर्धारण अधिक पारदर्शी और निष्पक्ष होगा। साथ ही शिकायतों का समय पर निस्तारण सुनिश्चित किया जा सकेगा और विवादों में कमी आएगी।
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